देहरादून के जाखन इलाके में 75 वर्षीय कौशल्या देवी पर दो रॉटवीलर कुत्तों के हमले ने उनके जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। ढाई महीने बीत जाने के बावजूद उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ है और इलाज पर अब तक लगभग आठ लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। कमजोर कानूनी प्रावधानों की वजह से कुत्तों के मालिक पर मामूली जुर्माना ही लगाया गया, जिससे नागरिकों में डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है। पीड़ित परिवार की मांग है कि खूंखार कुत्ते पालने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
दर्दनाक हमला और गंभीर चोटें
पांच जुलाई की सुबह कौशल्या देवी मंदिर जा रही थीं, तभी अचानक दो रॉटवीलर कुत्तों ने उन पर हमला कर दिया। हमला इतना भयानक था कि उनके शरीर पर 200 से अधिक टांके लगे, एक कान लगभग कट गया, हाथ की हड्डी टूट गई और पूरा शरीर गंभीर जख्मों से भर गया। उन्हें चार सर्जरी करानी पड़ीं और लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद उनका दर्द खत्म नहीं हुआ।
उनके बेटे उमंग निर्वाल बताते हैं कि मां अब भी लगातार दर्द में हैं। बीपी और शुगर की मरीज होने के कारण उन्हें नींद भी नहीं आती, खाना-पीना और शौच जैसी सामान्य गतिविधियां भी मुश्किल हो गई हैं। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि दिमाग से उस भयावह घटना का डर नहीं निकल रहा, और अब वह घर से बाहर भी नहीं निकलतीं।
मालिक पर सिर्फ मामूली जुर्माना
इतने गंभीर हमले के बावजूद कुत्तों के मालिक के खिलाफ कार्रवाई बेहद कमजोर रही। नगर निगम ने पंजीकरण और नसबंदी न कराने के आधार पर केवल 1000 रुपये का जुर्माना लगाया और मामला यहीं समाप्त कर दिया।
पुलिस ने “पालतू जानवर की लापरवाही” की धारा के तहत मामला दर्ज किया, जो गैर-संगीन अपराध है। कुत्तों के मालिक ने चालान भरकर मामले से पल्ला झाड़ लिया और अपने कुत्तों को सहारनपुर के किसी परिचित के पास भेज दिया। अब वह बिना किसी मुश्किल के सामान्य जीवन जी रहा है।
नागरिकों में बढ़ा डर
पिछले एक साल में देहरादून के अस्पतालों में कुत्तों के काटने के 2400 से अधिक मामले दर्ज हुए, लेकिन आधिकारिक शिकायतें 50 से भी कम थीं। इसका कारण पीड़ितों का डर, कानूनी झंझट और समय व पैसे की बर्बादी है।
नगर निगम के नियमों के अनुसार पालतू कुत्तों को सार्वजनिक जगहों पर पट्टा और मुंह पट्टी के साथ रखना अनिवार्य है, लेकिन इसका पालन नहीं होता। शहर की सड़कों और पार्कों में खुले में घूमते खतरनाक कुत्ते आम नजारा हैं। कई बार कुत्तों के मालिक पीड़ितों को डराकर मामले रफा-दफा करवा देते हैं।
पीड़ित परिवार और नागरिक चाहते हैं कि अब खूंखार कुत्ते पालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो ताकि किसी और के साथ ऐसा दर्दनाक हादसा न हो।
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