गंगा एक्सप्रेसवे का महाविस्तार: अब मेरठ नहीं, अमरोहा-बिजनौर के रास्ते हरिद्वार तक पहुंचेगा 594 किमी लंबा यह कॉरिडोर - Doonprimenews
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गंगा एक्सप्रेसवे का महाविस्तार: अब मेरठ नहीं, अमरोहा-बिजनौर के रास्ते हरिद्वार तक पहुंचेगा 594 किमी लंबा यह कॉरिडोर

On: February 27, 2026 10:22 AM
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उत्तर प्रदेश की अत्यंत महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ को लेकर एक बड़ा विकास सामने आया है, जो न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के लिए भी प्रगति के नए द्वार खोलेगा। मेरठ से प्रयागराज तक निर्माणाधीन इस एक्सप्रेसवे के मूल स्वरूप में एक ऐतिहासिक विस्तार करते हुए अब इसे सीधे उत्तराखंड की पावन नगरी हरिद्वार से जोड़ने की योजना को अंतिम रूप दे दिया गया है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सरकारों के बीच बनी उच्च स्तरीय सहमति के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि अब यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे अमरोहा और बिजनौर के माध्यम से हरिद्वार तक अपनी पहुंच बनाएगा। इस अलाइनमेंट में बदलाव का मुख्य कारण पुरानी मेरठ-हरिद्वार योजना में आने वाली तकनीकी और भौगोलिक बाधाएं थीं, जिन पर अब यूपीडा (UPEIDA) ने एक नया और व्यवहार्य रोडमैप तैयार कर लिया है।
इस नए विस्तार की सबसे बड़ी विशेषता इसका लगभग 140 किलोमीटर लंबा वह मार्ग है जो अमरोहा से शुरू होकर बिजनौर जिले को नई संजीवनी प्रदान करेगा। बिजनौर जैसे कृषि प्रधान जिले के लिए, जो लंबे समय से बेहतर कनेक्टिविटी की मांग कर रहा था, यह एक्सप्रेसवे आर्थिक उन्नति का एक प्रमुख साधन बनेगा। इस विस्तार के बाद प्रयागराज और पूर्वांचल से हरिद्वार की यात्रा न केवल बेहद सुगम हो जाएगी, बल्कि यात्रा के समय में भी भारी कमी आएगी। अलाइनमेंट में एक और महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव यह किया गया है कि पूर्व में गंगा नदी के बाईं ओर से प्रस्तावित मार्ग को बदलकर अब इसे गंगा की दायीं दिशा से ले जाने का निर्णय लिया गया है। इस बदलाव के पीछे मुख्य उद्देश्य निर्माण के दौरान आने वाली पर्यावरणीय चुनौतियों को कम करना और हरिद्वार के मुख्य शहरी क्षेत्रों को अधिक प्रभावी कनेक्टिविटी प्रदान करना है।
हाल ही में उत्तराखंड सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में यूपीडा के अधिकारियों ने मुख्य सचिव के समक्ष इस पूरी परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इस बैठक में भूमि अधिग्रहण की वर्तमान स्थिति, बिजली की लाइनों और पाइपलाइनों जैसी उपयोगिताओं की शिफ्टिंग और सबसे महत्वपूर्ण पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) जैसे गंभीर विषयों पर गहन विमर्श किया गया। प्रशासनिक स्तर पर यह स्पष्ट किया गया है कि गंगा तटीय क्षेत्र होने के कारण पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी। अधिकारियों ने यूटिलिटी शिफ्टिंग और भूमि की उपलब्धता पर अपना पक्ष मजबूती से रखा ताकि भविष्य में निर्माण कार्य में कोई बाधा न आए।
आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से यह विस्तार एक ‘गेम चेंजर’ साबित होने वाला है। यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच केवल एक सड़क मार्ग नहीं, बल्कि एक मजबूत आर्थिक गलियारे के रूप में कार्य करेगा। बिजनौर को लिंक कॉरिडोर के जरिए जोड़ने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों को अपनी उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी। इसके अलावा, गंगा तटीय पर्यटन (River Tourism) के क्षेत्र में भी इसके माध्यम से असीम संभावनाएं पैदा होंगी। अब श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के सीधे प्रयागराज से चलकर हरिद्वार तक पहुँच सकेंगे, जिससे दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध नई ऊंचाइयों को छुएंगे। लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज पांडेय के अनुसार, यह नया अलाइनमेंट न केवल दूरी घटाएगा बल्कि दोनों राज्यों के आर्थिक सेतु के रूप में उभरेगा।
वर्तमान में मेरठ से प्रयागराज तक इस एक्सप्रेसवे की लंबाई लगभग 594 किलोमीटर है, जो राज्य के 12 प्रमुख जिलों जैसे हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज से होकर गुजरता है। इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे में औद्योगिक क्लस्टर, हवाई पट्टी और आधुनिक जनसुविधाओं जैसी विशेषताएं पहले से शामिल हैं। अमरोहा-बिजनौर के रास्ते हरिद्वार तक का यह नया विस्तार पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के समूचे क्षेत्र के औद्योगीकरण और रोजगार सृजन में मील का पत्थर साबित होगा। यह परियोजना न केवल सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगी बल्कि धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की कनेक्टिविटी को एक नई पहचान देगी।

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