गैरसैंण (ग्रीष्मकालीन राजधानी) में आयोजित मानसून सत्र में प्रदेश सरकार ने कई अहम विधेयक पारित किए। विधानसभा सचिवालय ने इन सभी विधेयकों को अनुमोदन के लिए राजभवन भेज दिया है। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद ये विधेयक अधिनियम का रूप ले लेंगे।
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) संशोधन विधेयक
इस संशोधन के तहत विवाह पंजीकरण की समय सीमा को छह माह से बढ़ाकर एक वर्ष कर दिया गया है। इससे विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया को और अधिक लचीला बनाने का प्रयास किया गया है।
उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता एवं विधि विरुद्ध प्रतिषेध संशोधन विधेयक
इस विधेयक में जबरन धर्मांतरण पर कड़े प्रावधान किए गए हैं।
यदि कोई व्यक्ति लालच, धन, नौकरी, उपहार या शादी का प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराता है, तो यह अपराध माना जाएगा।
विवाह के उद्देश्य से धर्म छिपाने पर 3 से 10 वर्ष की सजा और अधिकतम 3 लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है।
महिला, एससी/एसटी, दिव्यांग व्यक्तियों और सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा बढ़ाकर 14 साल तक कर दी गई है।
गंभीर मामलों में उम्रकैद तक की सजा का भी प्रावधान है।
अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक
इस विधेयक के तहत मदरसा बोर्ड को समाप्त कर दिया गया है। अब अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता देने की जिम्मेदारी प्राधिकरण को सौंपी जाएगी। अल्पसंख्यक की श्रेणी में सिख, ईसाई, पारसी और बौद्ध समुदाय को शामिल किया गया है।
अन्य पारित विधेयक
मानसून सत्र में पारित अन्य विधेयक भी अब राजभवन भेजे गए हैं। इनमें शामिल हैं:
उत्तराखंड उत्तर प्रदेश बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर संशोधन विधेयक
उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक
उत्तराखंड साक्षी संरक्षण निरसन विधेयक
उत्तराखंड पंचायती राज संशोधन विधेयक
उत्तराखंड लोकतंत्र सेनानी सम्मान विधेयक
इन आठों विधेयकों को राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा।
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