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शिक्षा निदेशक मारपीट प्रकरण: भाजपा का कड़ा रुख, विधायक उमेश शर्मा काऊ से मांगा जाएगा स्पष्टीकरण

On: February 22, 2026 11:27 AM
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देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब राजधानी देहरादून में शिक्षा विभाग के एक उच्चाधिकारी के साथ मारपीट का मामला सामने आया। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल पर हुए हमले के बाद प्रदेश की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस घटना पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी ने न केवल इस कृत्य की निंदा की है, बल्कि आरोपी विधायक उमेश शर्मा काऊ को नोटिस जारी कर जवाब तलब करने का भी निर्णय लिया है।
अनुशासन पर भाजपा की दो-टूक: “अराजकता बर्दाश्त नहीं”
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया कि पार्टी संगठन किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या कानून के उल्लंघन के पक्ष में नहीं है। भट्ट ने कहा कि “पार्टी किसी भी प्रकार की अराजकता और हिंसा के खिलाफ है। लोकतंत्र में जनसमस्याओं को उठाना और उनके लिए संघर्ष करना एक जनप्रतिनिधि का मूल दायित्व है, लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि कानून को अपने हाथ में लिया जाए।”
उन्होंने जानकारी दी कि रायपुर क्षेत्र के विधायक उमेश शर्मा काऊ से जल्द ही इस घटनाक्रम पर लिखित स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। पार्टी यह जानना चाहती है कि आखिर किन परिस्थितियों में ऐसी नौबत आई और क्या एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति का ऐसा आचरण उचित था।
बोर्ड परीक्षाओं के बीच संयम की अपील
शिक्षा निदेशक के साथ हुई इस घटना के बाद शिक्षा विभाग के कर्मचारियों और शिक्षक संघों में भारी आक्रोश व्याप्त है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए महेंद्र भट्ट ने विभाग के सभी कार्मिकों और शिक्षकों से धैर्य व संयम बरतने की अपील की है।
उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय बोर्ड परीक्षाओं का है। अध्यक्ष ने कहा, “किसी भी विवाद या विरोध प्रदर्शन का सीधा असर छात्रों के भविष्य पर नहीं पड़ना चाहिए। परीक्षाओं को सुचारु रूप से संपन्न कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।” उन्होंने शिक्षक समुदाय को भरोसा दिलाया कि कानून अपना काम निष्पक्षता से करेगा, इसलिए वे विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए अपने कर्तव्यों का पालन करें।
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि बीते दिनों प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल के कार्यालय में विधायक उमेश शर्मा काऊ और उनके समर्थकों के साथ किसी मुद्दे को लेकर बहस हुई थी। आरोप है कि यह बहस इतनी बढ़ गई कि विधायक और उनके साथियों ने निदेशक के साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट की। इस घटना के बाद से ही शिक्षा विभाग के अधिकारी और कर्मचारी आंदोलित हैं और विधायक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
कानून और संगठन की दोहरी कार्रवाई
भाजपा नेतृत्व ने यह साफ कर दिया है कि वह इस मामले में किसी को बचाने के पक्ष में नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि शासन और प्रशासन स्तर पर कानून अपनी कार्यवाही करेगा और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे परिणाम भुगतने होंगे। वहीं, संगठन के स्तर पर भी अनुशासन समिति मामले की जांच करेगी।
यह पहली बार नहीं है जब विधायक काऊ अपने आक्रामक रुख के कारण चर्चा में आए हों, लेकिन इस बार मामला एक वरिष्ठ अधिकारी के सम्मान और सरकारी कार्य में बाधा डालने से जुड़ा है, जिससे पार्टी की छवि पर भी आंच आ रही है।
निष्कर्ष और आगे की राह
शिक्षा निदेशक मारपीट प्रकरण ने एक बार फिर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच के समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहाँ एक ओर भाजपा ने अपने विधायक से जवाब मांगकर डैमेज कंट्रोल की कोशिश की है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। अब सबकी नजरें विधायक द्वारा दिए जाने वाले स्पष्टीकरण और पुलिस की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
पार्टी के इस कड़े रुख से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि सत्ता में होने के बावजूद कानून से ऊपर कोई नहीं है और ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति केवल कागजों तक सीमित नहीं है।
मुख्य बिंदु:

  • भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ को नोटिस जारी कर मांगा जाएगा स्पष्टीकरण।
  • प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने घटना को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार दिया।
  • बोर्ड परीक्षाओं के मद्देनजर शिक्षकों से काम पर लौटने की अपील।
  • कानून के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई के संकेत।

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