38 मुकदमों वाला कुख्यात गैंगस्टर ‘बैग चोरी’ में भेजा गया जेल
देहरादून पुलिस ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधी विनय त्यागी को कार से बैग चोरी के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जबकि उस पर पहले से ही हत्या,के हत्या का प्रयास, डकैती व गुंडा एक्ट सहित 38 संगीन मुकदमे दर्ज हैं। ऐसे में एक बड़े अपराधी को साधारण चोरी के मामले में जेल भेजे जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
चोरी की कहानी या कुछ और?
दरअसल, विनय त्यागी ने नेहरू कॉलोनी स्थित एक चिकित्सक के घर में शरण ली हुई थी। चौंकाने वाली बात यह है कि उसी चिकित्सक की कार से बैग चोरी की तहरीर दर्ज कराई गई।
15 सितंबर को चिकित्सक ने पुलिस को बताया कि उनकी कार का शीशा तोड़कर बैग चोरी कर लिया गया।
बैग में नकदी और सोना-चांदी के आभूषण होना बताया गया।
आमतौर पर चोरी के मामलों में पुलिस महीनों तक मुकदमा दर्ज करने से बचती है, लेकिन इस मामले में पुलिस ने फौरन कार्रवाई करते हुए केस दर्ज कर लिया।
इसके बाद 29 सितंबर की देर रात दून-दिल्ली हाइवे पर डाटकाली टनल के पास से पुलिस ने विनय त्यागी को गिरफ्तार करने का दावा किया। पुलिस ने उसके पास से चोरी का सामान बरामद होने की बात कही और अगले दिन अदालत में पेश कर जेल भेज दिया।
यूपी एसटीएफ की रडार पर था विनय
सूत्रों के मुताबिक, विनय त्यागी की तलाश लंबे समय से यूपी एसटीएफ कर रही थी। उस पर एनकाउंटर का खतरा था, इसी वजह से वह देहरादून भाग आया और यहां अशोक विहार में अपने एक परिचित चिकित्सक (जो स्वयं विवादित है) के घर छिपा रहा।
यहीं से ‘बैग चोरी’ की कहानी बनी और पुलिस ने बड़े अपराधी को एक छोटे मामले में पकड़ने का दावा किया। सूत्रों का कहना है कि यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गैंगस्टरों की ऐसी ‘गुगली’ थी, जिसमें दून पुलिस फंस गई।
गाजियाबाद के माफिया से तार जुड़े
मामले के तार गाजियाबाद इंद्रापुरम के एक बड़े माफिया से भी जोड़े जा रहे हैं।
यह माफिया और उसका पार्टनर बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स के ठेके लेते हैं।
चिकित्सक की इस पार्टनर से करीबी बताई जाती है।
आरोप है कि ईडी की जांच से बचने के लिए इस माफिया ने अपनी कार, जिसमें करोड़ों की नकदी और गहने थे, चिकित्सक के पास रखवाई।
इसके बाद कार से ‘बैग चोरी’ का नाटक रचा गया।
विवादों में घिरा चिकित्सक
जिस चिकित्सक ने शिकायत दर्ज कराई, उसका अतीत भी विवादों से भरा है।
जनवरी 2018 में आराघर स्थित उसके क्लीनिक पर भ्रूण लिंग परीक्षण के आरोप में छापा पड़ा था।
क्लीनिक सील हुआ और उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया।
चिकित्सक पहले भी ऐसे मामलों में जेल जा चुका है।
बाइक बोट घोटाले का मुख्य आरोपी
विनय त्यागी सिर्फ कुख्यात अपराधी ही नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े 42 हजार करोड़ रुपये के बाइक बोट घोटाले का भी मुख्य आरोपी है।
गाजियाबाद स्थित गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड के जरिए हजारों लोगों से निवेश के नाम पर ठगी की गई।
इस घोटाले में विनय की मुख्य भूमिका रही।
उसकी पत्नी यूपी के एक इलाके से ब्लॉक प्रमुख भी रह चुकी है।
पुलिस का दावा और उठते सवाल
देहरादून पुलिस का कहना है कि उसने दर्ज मुकदमे के आधार पर कार्रवाई की और विनय त्यागी को गिरफ्तार किया।
पुलिस का बयान (एसएसपी अजय सिंह):
“गिरफ्तारी के दौरान करीब चार लाख रुपये के गहने और 15 हजार रुपये कैश बरामद हुए हैं। एक और आरोपी की तलाश जारी है। अभी तक किसी अन्य माफिया के जुड़े होने के सबूत नहीं मिले हैं।”
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि —
38 मुकदमों का कुख्यात अपराधी साधारण चोरी के मामले में जेल क्यों भेजा गया?
फरार अपराधी को शरण देने वाले विवादित चिकित्सक पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
क्या पूरा घटनाक्रम केवल चोरी का मामला है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा खेल छिपा है?
इस पूरे मामले ने न सिर्फ दून पुलिस की ‘गुडवर्क’ वाली छवि पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड के आपराधिक नेटवर्क के गहरे तारों को भी उजागर किया है।





