देहरादून में यातायात व्यवस्था को सुचारु करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। लगातार बढ़ते ट्रैफिक और जाम की विकराल होती स्थिति को देखते हुए लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) ने एक बड़ी योजना तैयार की है। इस योजना के तहत नेहरू कॉलोनी तिराहे से लेकर धर्मपुर चौक तक एक किलोमीटर लंबा फोरलेन फ्लाईओवर बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
फ्लाईओवर निर्माण से हरिद्वार-देहरादून राजमार्ग पर आने-जाने वाले हजारों वाहन चालकों को राहत मिलेगी और शहर के मध्यवर्ती इलाकों में जाम की समस्या में भी कमी आएगी। इस परियोजना की व्यवहार्यता जांचने के लिए लोनिवि ने टेंडर जारी कर दिए हैं। इच्छुक एजेंसियों से 19 मई तक निविदाएं आमंत्रित की गई हैं।
जाम से जूझता है रिस्पना पुल और धर्मपुर क्षेत्र
रिस्पना पुल और धर्मपुर चौक देहरादून के प्रमुख ट्रैफिक हॉटस्पॉट्स माने जाते हैं। सबसे अधिक दबाव रिस्पना पुल पर देखा जाता है, जहां लोकल और हाईवे ट्रैफिक के वाहन आपस में क्रॉस करते हैं। इसके चलते अजबपुर आरओबी, विधानसभा तिराहा और नेहरू कॉलोनी तिराहे तक वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। दूसरी ओर, धर्मपुर चौक पर भी हालात कम विकट नहीं हैं। जेएनएनयूआरएम के तहत हुए चौड़ीकरण के बावजूद मौजूदा ट्रैफिक का भार संभालना इस चौराहे के लिए मुश्किल हो गया है। जब रेड लाइट पर वाहन रुकते हैं तो सड़क का अधिकांश भाग बाधित हो जाता है, जिससे माता मंदिर और रेसकोर्स की ओर से आने वाले वाहन चालकों को भारी परेशानी होती है।
फ्लाईओवर ही दिखता है एकमात्र समाधान
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फ्लाईओवर निर्माण को ही फिलहाल एकमात्र समाधान माना जा रहा है। लोनिवि द्वारा बनाई जाने वाली फिजीबिलिटी रिपोर्ट न केवल फ्लाईओवर की उपयोगिता को सिद्ध करेगी, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगी कि इसका एलाइनमेंट कैसा होगा और किन इलाकों में भूमि अधिग्रहण की जरूरत पड़ेगी।
भूमि अधिग्रहण, बजट और बाधाओं का होगा आकलन
रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया जाएगा कि निर्माण क्षेत्र में कौन-कौन सी आधारभूत संरचनाएं—जैसे बिजली लाइनें, पानी की पाइपलाइन आदि—आ रही हैं। इससे निर्माण के दौरान आने वाली बाधाओं और अतिरिक्त खर्च का स्पष्ट आंकलन किया जा सकेगा, जिससे परियोजना की योजना को प्रभावी ढंग से कार्यान्वित किया जा सके।
पुल की क्षमता से पांच गुना ज्यादा ट्रैफिक दबाव
रिस्पना पुल की डिज़ाइन क्षमता 2,900 पीसीयू (पैसेंजर कार यूनिट) प्रतिदिन थी, जबकि वर्तमान में इस क्षेत्र से प्रतिदिन लगभग 16,453 पीसीयू गुजर रहे हैं। यह पुल पर वास्तविक क्षमता से करीब 5.67 गुना अधिक ट्रैफिक दबाव दर्शाता है। इससे स्पष्ट है कि वाहनों को यहां से गुजरने में कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
फ्लाईओवर निर्माण की दिशा में यह पहला कदम है, और फिजीबिलिटी रिपोर्ट के आने के बाद ही परियोजना के भविष्य की तस्वीर और अधिक स्पष्ट होगी।







