देहरादून शहर में कुत्तों के बढ़ते हमलों और जनसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने पालतू एवं आवारा कुत्तों को लेकर नए सख्त बायलॉज लागू कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बनाए गए इन नियमों के तहत अब कुछ आक्रामक नस्लों के कुत्तों को पालने के लिए कम से कम 300 वर्ग गज क्षेत्रफल का घर होना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही नगर निगम से लाइसेंस लेना भी जरूरी होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना, कुत्ते की जब्ती और एफआईआर तक दर्ज की जा सकती है।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य शहर में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, पालतू कुत्तों के प्रति जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा देना और मानव व पशु के बीच संतुलन बनाए रखना है। इन बायलॉज को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जल्द ही जागरूकता अभियान भी शुरू किया जाएगा।
हर पालतू कुत्ते का पंजीकरण अनिवार्य
नए नियमों के अनुसार, तीन माह या उससे अधिक आयु के प्रत्येक पालतू कुत्ते का नगर निगम में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। यह पंजीकरण एक वर्ष तक वैध रहेगा। बिना पंजीकरण कुत्ता पालने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा, यदि लाइसेंस की अवधि के दौरान एंटी-रेबीज टीकाकरण की वैधता समाप्त हो जाती है, तो संबंधित कुत्ते का लाइसेंस स्वतः ही निरस्त माना जाएगा।
आक्रामक नस्लों के लिए विशेष और सख्त नियम
नगर निगम ने पिटबुल, रोटवीलर, डोगो अर्जेंटीनो, अमेरिकन बुलडॉग जैसी अत्यधिक आक्रामक नस्लों के लिए अलग नियम तय किए हैं। इन नस्लों के कुत्तों को पालने के लिए 300 वर्ग गज या उससे बड़े घर की अनिवार्यता रखी गई है।
इन कुत्तों के लिए 2000 रुपये वार्षिक लाइसेंस शुल्क निर्धारित किया गया है। साथ ही, एक वर्ष की आयु पूरी होने के बाद इनकी नसबंदी अनिवार्य होगी, जिसका प्रमाण पत्र नगर निगम में जमा करना होगा। इन नस्लों की ब्रीडिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
पहले से ऐसे कुत्ते पाल रहे लोगों को तीन माह के भीतर खरीद संबंधी दस्तावेज और नसबंदी प्रमाण पत्र नगर निगम में जमा करना अनिवार्य होगा।
खुले में घुमाने और शौच कराने पर सख्ती
नए बायलॉज के तहत पालतू कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों पर बिना पट्टा, मुंहबंद और निगरानी के ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। खुले में शौच कराने पर चालान और जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी।
यदि कुत्ते के काटने की घटना होती है, तो घायल की स्थिति की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग जुर्माना लगाया जाएगा। गंभीर मामलों में कुत्ते के मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कुत्ते को जब्त किया जा सकता है। इसके अलावा, अत्यधिक भौंकने की शिकायत मिलने पर भी नोटिस और चालान का प्रावधान रखा गया है।
शेल्टर और फीडिंग प्वाइंट की नई व्यवस्था
जो लोग पांच या उससे अधिक कुत्ते पालते हैं, उनके लिए निजी श्वान पशु शेल्टर बनाना अनिवार्य किया गया है। इसके लिए उत्तराखंड पशु कल्याण बोर्ड की अनुमति, नगर निगम को सूचना और 1000 रुपये वार्षिक लाइसेंस शुल्क देना होगा।
यदि शेल्टर आवासीय क्षेत्र के पास स्थित है, तो पड़ोसियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी जरूरी होगा।
वहीं, आवारा कुत्तों के लिए नगर निगम कॉलोनियों और रेजिडेंट वेलफेयर सोसायटी में निर्धारित फीडिंग प्वाइंट बनाएगा। स्कूलों, धार्मिक स्थलों, भीड़भाड़ वाले इलाकों और कॉलोनियों के प्रवेश-निकास स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर कार्रवाई की जाएगी।






