देहरादून। शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर वर्षों से जनता के बीच आक्रोश का कारण बन चुकी कंपनियां इकोन वेस्ट मैनेजमेंट सॉल्यूशंस प्रा.लि. और वाटरग्रेस पर जिलाधिकारी एवं तत्कालीन नगर निगम प्रशासक सविन बंसल ने कड़ा शिकंजा कसते हुए प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान ही निर्णायक कार्रवाई की थी। प्रशासक का कार्यभार संभालते ही डीएम ने इन कंपनियों के खिलाफ जांच शुरू कराई, नोटिस जारी किए, अर्थदंड लगाए और आखिरकार तमाम दबावों और सिफारिशों को दरकिनार करते हुए दोनों कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया।
तीन महीने का अल्टीमेटम, फिर सफाई कंपनियों का सफाया
प्रशासक सविन बंसल ने दोनों कंपनियों को सुधार के लिए तीन महीने का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन हालात नहीं सुधरे। इसके बाद वाटरग्रेस को 47 वार्डों से बाहर कर दिया गया, जबकि इकोन वेस्ट पर उच्चस्तरीय जांच का निर्देश दिया गया। लगातार मॉनिटरिंग और समीक्षा बैठकों के बावजूद दोनों कंपनियों की कार्यशैली में कोई सुधार नहीं आया था।
जनता को झेलनी पड़ी थी अव्यवस्थाएं, डीएम ने खोली परत दर परत पोल
शहरवासी इन दोनों कंपनियों की सफाई व्यवस्थाओं से बुरी तरह त्रस्त थे। डीएम द्वारा गठित जांच समिति ने जब फाइलों की गहन जांच की तो परत-दर-परत करोड़ों की अव्यवस्थाओं और अनियमितताओं का खुलासा हुआ।
जांच में यह पाया गया कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान भारी गड़बड़ी की गई थी। टेंडर जीतने वाली भार्गव फैसिलिटी सर्विसेज प्रा.लि. कंपनी ने नियमों के विरुद्ध अपने एसपीवी (स्पेशल परपज व्हीकल) के रूप में इकोन वेस्ट मैनेजमेंट को कार्य हेतु नामित किया था। दस्तावेजों में छेड़छाड़ करते हुए बाद में पृष्ठ जोड़कर अनधिकृत तरीके से इकोन का नाम जोड़ा गया था, जो आरएफपी की शर्तों का खुला उल्लंघन था।
इतना ही नहीं, टेंडर फाइलों में इकोन की अर्हता को लेकर कोई स्पष्ट टिप्पणी भी नहीं मिली। बावजूद इसके कंपनी से अनुबंध कर भुगतान किया जाता रहा, यहां तक कि कार्य प्रारंभ होने से पहले के बिल भी पास कर दिए गए थे।
बार-बार हड़ताल, अनियमित वाहन संचालन बनी सफाई बिगाड़ने की वजह
इकोन कंपनी को शहर के 26 वार्डों की सफाई व्यवस्था सौंपी गई थी, जिनमें मालसी, विजयपुर, रांझावाला, एमकेपी, डालनवाला, धर्मपुर, नेहरू कॉलोनी समेत प्रमुख वार्ड शामिल थे। लेकिन कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलना और नियमित रूप से वाहनों का संचालन न होना सफाई व्यवस्था को चरमरा देने वाले बड़े कारण बने। आये दिन कर्मचारियों की हड़ताल से पूरा शहर गंदगी के ढेर में तब्दील हो जाता था।
अंत में नगर निगम ने खत्म किया अनुबंध, 26 वार्डों का जिम्मा सनलाइट कंपनी को सौंपा
नगर निगम ने अब विधिक प्रक्रिया पूरी कर इकोन वेस्ट मैनेजमेंट का अनुबंध निरस्त कर दिया है और 26 वार्डों की सफाई का जिम्मा सनलाइट कंपनी को सौंप दिया गया है। साथ ही निगम ने सभी वाहनों को भी जल्द से जल्द हैंडओवर कराने के आदेश जारी कर दिए हैं। वहीं वाटरग्रेस के मामले में निगम पहले ही सफाई का कार्य अपने स्तर पर कर रहा है।
डीएम की सख्ती से खुला घोटाले का जाल, कई अफसरों पर भी जांच की तलवार
बताया जा रहा है कि डीएम द्वारा कराई गई इस जांच के बाद नगर निगम के कई बड़े अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है। जांच में सामने आया कि टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं और अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी तरीके से कंपनियों को लाभ पहुँचाया गया।
निष्कर्ष:
डीएम सविन बंसल के प्रशासक कार्यकाल में उठाए गए ठोस कदमों से देहरादून नगर निगम की सफाई व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जगी है। दोनों कंपनियों को बाहर कर एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई को अंजाम दिया गया, जो आने वाले समय में सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।








