देहरादून के एक मॉल में होने जा रहे बैंड-बाजा-बरात थीम पर आधारित नकली शादी कार्यक्रम पर पुलिस ने रोक लगा दी है। बढ़ते विवाद को देखते हुए एसएसपी ने आयोजन रद्द करवाया और आयोजकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आगे ऐसा कोई भी कार्यक्रम न किया जाए, जिससे लोगों की धार्मिक या सांप्रदायिक भावनाएं आहत हों।
विवाद बढ़ा तो पुलिस ने रोका इवेंट
मॉल ऑफ देहरादून में छह सितंबर को प्रस्तावित इस इवेंट में नकली शादी की पूरी झलक दिखाने की तैयारी थी। सजावट से लेकर बरात और शादी के रीति-रिवाज तक सबकुछ असली जैसा दिखाया जाना था। लेकिन विवाद गहराने पर पुलिस ने हस्तक्षेप किया और कार्यक्रम को कैंसल कर दिया।
आयोजकों को मिले सख्त निर्देश
पुलिस ने आयोजकों को चेताया कि भविष्य में कोई भी ऐसा आयोजन न किया जाए जो धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करता हो। इसके साथ ही सभी आयोजनों में सेफ्टी मानकों, सुरक्षा प्रोटोकॉल, क्राउड मैनेजमेंट और प्रशासनिक गाइडलाइन का पालन करना अनिवार्य होगा। पुलिस ने साफ कहा कि केवल सांस्कृतिक और मनोरंजन गतिविधियों तक सीमित प्रोग्राम ही आयोजित किए जाएं। किसी भी कार्यक्रम का आयोजन प्रशासन से विधिवत अनुमति मिलने के बाद ही संभव होगा।
रजिस्ट्रेशन फीस और ड्रेस कोड भी तय
इस नकली शादी इवेंट के लिए आयोजकों ने बाकायदा 1001 रुपये रजिस्ट्रेशन फीस रखी थी। इतना ही नहीं, मेहमान बनकर आने वाले युवाओं के लिए ड्रेस कोड भी निर्धारित किया गया था। शादी जैसा माहौल तैयार करने के लिए बरात और डेकोरेशन की पूरी स्क्रिप्ट तैयार थी।
बड़ा कारोबार बन रहा नकली शादी का ट्रेंड
मुंबई, दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों की तर्ज पर अब देवभूमि में भी नकली शादी का चलन शुरू हो गया है। इस कारोबार में आयोजक लाखों रुपये लेकर पूरा पैकेज तैयार करते हैं। बरातियों को जुटाने के लिए ऑनलाइन कार्ड भेजे जाते हैं और अक्सर वही लोग दोबारा ऐसे इवेंट्स में शामिल होते हैं।
सबकुछ नकली, रिश्ता नहीं
इन आयोजनों में बैंड-बाजे से लेकर सजावट तक सबकुछ असली जैसा होता है। बराती आते हैं, डांस और जश्न होता है, लेकिन असली नहीं होता तो वह है रिश्ता। यही वजह है कि इसे केवल धंधा या मनोरंजन का नया कारोबार कहा जा रहा है, जिसमें मोटी कमाई छिपी है
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