Dehradun Kimadi Forest Skeleton Case 2026: DNA Test to
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​Dehradun Kimadi Forest Skeleton Case: 93 दिनों से लापता छात्र का जंगल में मिला कंकाल, मौत का राज खोलेगी DNA रिपोर्ट

On: October 20, 2026 6:43 AM
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​Dehradun Kimadi Forest Skeleton Case में एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के किमाड़ी क्षेत्र में लगभग सात किलोमीटर घने जंगल के भीतर एक मानव कंकाल बरामद हुआ है। कंकाल के पास से मिले कपड़ों और क्षतिग्रस्त स्कूटी के आधार पर परिजनों ने दावा किया है कि यह अवशेष तीन महीने पहले रहस्यमयी परिस्थितियों में गायब हुए 22 वर्षीय छात्र मोहम्मद सारिक के हैं। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वैज्ञानिक आधार पर पुष्टि करने के लिए डीएनए परीक्षण का सहारा लिया है। फॉरेंसिक लैब से रिपोर्ट आने के बाद ही इस पूरे घटनाक्रम से पर्दा उठ सकेगा।

​17 जुलाई की रात से गायब था छात्र

​Dehradun Kimadi Forest Skeleton Case की जड़ें करीब 93 दिन पुरानी हैं। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के शेरकोट निवासी मोहम्मद सारिक देहरादून की आजाद कॉलोनी में किराए पर रहता था। वह ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से रेडियोथेरेपी टेक्नोलॉजी (B.Sc) की पढ़ाई कर रहा था।

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​17 जुलाई 2026 की रात करीब 10 बजे वह अपने कमरे में मौजूद साथी से 30 मिनट में वापस आने की बात कहकर अपनी स्कूटी से निकला था, लेकिन उसके बाद वह लौटकर नहीं आया। काफी तलाश करने के बावजूद जब उसका कोई सुराग नहीं मिला और मोबाइल भी लगातार स्विच ऑफ आया, तो चिंतित परिजनों ने 18 जुलाई को पटेलनगर कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की, लेकिन छात्र की कोई जानकारी न मिलने पर बाद में इस मामले को अपहरण की धाराओं में तरमीम कर दिया गया था।

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​Dehradun Kimadi Forest Skeleton Case में ड्रोन कैमरे से मिला पहला सुराग

​लगातार तीन महीने तक पुलिस और परिजन छात्र की खोजबीन में जुटे रहे। हाल ही में किमाड़ी-मसूरी मार्ग पर जंगल के दुर्गम इलाके और गहरी खाई की तरफ तलाश अभियान चलाया गया।

​इस दौरान जब ड्रोन की मदद से किमाड़ी के घने जंगल में भीतर तक स्कैनिंग की गई, तो घने पेड़ों के बीच एक दुर्घटनाग्रस्त स्कूटी और कुछ दूरी पर मानव अवशेष दिखाई दिए। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। करीब सात किलोमीटर जंगल के भीतर खाई के पास मिले कपड़ों और सामान की मदद से परिजनों ने प्राथमिक रूप से सारिक की पहचान की। 

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