Chardham Yatra 2026 की शुरुआत के बाद अब साल के अंत में कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरू हो रही है। हर साल की तरह इस बार भी ठंड और बर्फबारी के मौसम को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड के प्रसिद्ध धामों के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए जाते हैं। हाल ही में आई रिपोर्ट के अनुसार, इस बार Chardham Yatra 2026 के तहत गंगोत्री धाम के कपाट 10 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे, जबकि यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट 11 नवंबर को भैयादूज के पावन पर्व पर बंद होंगे। तीर्थयात्रियों के लिए यह समय काफी महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसके बाद भगवान के दर्शन उनके शीतकालीन गद्दीस्थलों पर किए जाते हैं।
धार्मिक परंपराओं और पंचांग की गणना के अनुसार हर साल दशहरे और अन्य बड़े पर्वों पर इन तारीखों की घोषणा की जाती है। इस बार भी मंदिर समितियों और पुजारियों द्वारा विशेष मुहूर्त निकालकर कपाट बंद होने का समय तय किया गया है। आइए इस पूरे कार्यक्रम के बारे में विस्तार से जानते हैं ताकि आने वाले दिनों में यात्रा की योजना सही तरीके से बनाई जा सके।
हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"
Gangotri Dham Closing: 10 नवंबर को अन्नकूट पर्व पर बंद होंगे गंगोत्री के कपाट
Chardham Yatra 2026 के अंतर्गत सबसे पहले गंगोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए जाने की घोषणा की गई है। गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष और सचिव द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, गंगोत्री धाम के कपाट अन्नकूट पर्व यानी 10 नवंबर को निर्धारित किए गए हैं। इस दिन विशेष पूजा-अर्चना के बाद अमृत बेला और अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12:05 बजे मां गंगा के कपाट बंद कर दिए जाएंगे।
स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ
कपाट बंद होने के बाद मां गंगा की उत्सव डोली उनके शीतकालीन गद्दीस्थल मुखवा (मठा) के लिए रवाना होगी। मुखवा में ही अगले छह महीनों तक मां गंगा की नियमित पूजा-अर्चना की जाएगी। इस दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु मुखवा जाकर मां गंगा के दर्शन कर सकते हैं। गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने की इस प्रक्रिया में हजारों की संख्या में स्थानीय लोग और तीर्थयात्री शामिल होते हैं।
Yamunotri and Kedarnath Dham: 11 नवंबर को भैयादूज पर बंद होंगे यमुनोत्री और केदारनाथ के कपाट
Chardham Yatra 2026 की श्रृंखला में यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट परंपरा के अनुसार भैयादूज के पवित्र पर्व पर 11 नवंबर को बंद किए जाएंगे। भैयादूज का पर्व भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक होने के साथ-साथ उत्तराखंड चारधाम यात्रा के समापन का भी एक बड़ा पड़ाव माना जाता है। इस दिन दोनों ही धामों में विशेष अनुष्ठान और हवन किए जाते हैं, जिसके बाद शीतकाल के लिए ताले लगा दिए जाते हैं।
केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने का आधिकारिक मुहूर्त विजयदशमी के पावन अवसर पर ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ में निकाला जाता है। इसी विशेष अवसर पर बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तारीख, मुहूर्त, पंचपूजा और डोली यात्रा का पूरा कार्यक्रम भी घोषित किया जाता है। केदारनाथ के कपाट बंद होने के बाद बाबा केदार की चल विग्रह डोली उनके शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान करती है, जहां ठंड के महीनों में श्रद्धालु भगवान के दर्शन करते हैं।
Winter Destination Update: शीतकालीन गद्दीस्थलों पर कैसे होंगे दर्शन?
जब Chardham Yatra 2026 का मुख्य मार्ग बंद हो जाता है, तब भगवान के भक्त निराश नहीं होते हैं क्योंकि सभी चारों धामों के शीतकालीन गद्दीस्थल श्रद्धालुओं के लिए खुले रहते हैं। प्रशासन और मंदिर समितियों द्वारा इन शीतकालीन आवासों पर सारी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चलाई जाती हैं ताकि सर्दियों के मौसम में भी दर्शन पूजन में कोई बाधा न आए।
- गंगोत्री धाम: मुखवा गांव में मां गंगा के दर्शन होते हैं।
- यमुनोत्री धाम: खरसाली (खुशी मठ) में मां यमुना की पूजा होती है।
- केदारनाथ धाम: ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में बाबा केदार विराजमान रहते हैं।
- बदरीनाथ धाम: पांडुकेश्वर और जोशीमठ के नृसिंह मंदिर में भगवान बदरी विशाल की पूजा की जाती है।
Conclusion: यात्रा से जुड़ी जरूरी बातें और सुझाव
अगर आप भी इस बार Chardham Yatra 2026 का हिस्सा बनने की सोच रहे हैं या कपाट बंद होने से पहले अंतिम दर्शन करना चाहते हैं, तो आपको मौसम की स्थिति और प्रशासन की गाइडलाइंस का पूरा ध्यान रखना चाहिए। ठंड बढ़ने के साथ ही पहाड़ों पर तापमान तेजी से गिरता है, इसलिए गर्म कपड़ों और जरूरी स्वास्थ्यै संबंधी तैयारी के साथ ही सफर पर निकलें। मंदिर समितियों द्वारा तय किए गए समय और नियमों का पालन करके अपनी यात्रा को सुरक्षित और सफल बनाया जा सकता है।
ALSO READ THIS :Rekha Arya Hospitalized: उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या की अचानक तबीयत बिगड़ी, देहरादून के अस्पताल में कराया गया भर्ती




