देहरादून शहर में प्रस्तावित 26 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड रोड निर्माण के लिए बड़ी संख्या में मकानों को तोड़े जाने की तैयारी शुरू हो गई है। यह एलिवेटेड कॉरिडोर रिस्पना और बिंदाल नदी के किनारे बनेगा, जिसके लिए मलिन बस्तियों के कई घर भूमि अधिग्रहण के दायरे में आ रहे हैं।
इस परियोजना के तहत जिन मकानों की जमीन अधिग्रहण की जाएगी, उन पर आज से लाल निशान लगाने की प्रक्रिया प्रारंभ हो रही है। यह निशान भवन स्वामियों को सूचित करने का माध्यम है कि उनका मकान प्रभावित क्षेत्र में आता है और सरकारी अधिग्रहण की प्रक्रिया का हिस्सा बनेगा। लाल निशान लगने के बाद इन भवनों का विस्तृत चिह्नीकरण और स्क्रूटनी की जाएगी।
प्रशासन द्वारा सामाजिक समाघात सर्वे भी कराया जा रहा है, ताकि यह जाना जा सके कि स्थानीय निवासियों की क्या राय है और वे पुनर्वास को लेकर क्या विकल्प चाहते हैं। भवन स्वामी अपनी राय दर्ज करा सकते हैं और उन्हें भूमि के बदले भूमि अथवा उचित मुआवजा पाने का अधिकार दिया जाएगा।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही पुनर्वास नीति तय की जाएगी और प्रभावित लोगों की इच्छानुसार ही मुआवजा अथवा वैकल्पिक जमीन दी जाएगी। प्रशासन का कहना है कि पारदर्शी प्रक्रिया के तहत प्रत्येक भवन स्वामी को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा और उनकी संतुष्टि के अनुसार पुनर्वास सुनिश्चित किया जाएगा।
इस परियोजना के साथ देहरादून में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है, लेकिन इसके लिए स्थानीय निवासियों को अपने आशियाने खोने की कीमत चुकानी पड़ सकती है।







