देहरादून। देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में पूर्वी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों के लिए आवंटित सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर बनाए गए पेट्रोल पंप का पर्दाफाश हो गया है। जिलाधिकारी सविन बंसल के आदेश पर जांच के बाद पेट्रोल पंप का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई एक दशक से अधिक समय से संचालित ‘केसरी फिलिंग स्टेशन’ के खिलाफ की गई है, जो शरणार्थियों के लिए सुरक्षित की गई भूमि पर अवैध रूप से चल रहा था।
शिकायत से खुला मामला, जांच में हुई पुष्टि
प्रेमनगर निवासी तेजेंद्र सिंह द्वारा अधिवक्ता आकाश यादव के माध्यम से इस अनियमितता की शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में बताया गया कि पेट्रोल पंप जिस खसरा नंबर 191 पर संचालित था, वह भूमि दरअसल जिला सहायता एवं पुनर्वास कार्यालय द्वारा पूर्वी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को आवंटित की गई थी। भूमि का मालिकाना हक राजस्व विभाग के पास था, जिसे धोखे से निजी स्वामित्व में दिखा दिया गया।
डीएम ने लिया संज्ञान, तत्काल हुई कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने उपजिलाधिकारी सदर के नेतृत्व में जांच के निर्देश दिए। नायब तहसीलदार, पूर्ति निरीक्षक और राजस्व उपनिरीक्षक द्वारा की गई जांच में यह पुष्टि हुई कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर पेट्रोल पंप का संचालन किया जा रहा था।
इसके बाद जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल ने ‘केसरी फिलिंग स्टेशन’ का लाइसेंस निरस्त करते हुए पेट्रोलियम बिक्री को तत्काल प्रभाव से रोक दिया। शाम होते-होते पंप पर ईंधन की बिक्री पूरी तरह बंद कर दी गई।
फर्जीवाड़े की परतें खुलीं, कई बार हुई खरीद-फरोख्त
जांच में यह भी सामने आया कि लगभग 11,700 वर्ग गज की इस बहुमूल्य भूमि (जिसका बाजार मूल्य 25 करोड़ से अधिक आँका गया है) को भूमाफियाओं ने फर्जी कागजों के आधार पर कई बार बेचा। यही नहीं, राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से अवैध रूप से भूमि का दाखिल-खारिज तक कराया गया।
यह मामला पहली बार वर्ष 2010 में सामने आया था, जब तत्कालीन उपजिलाधिकारी मनोज कुमार की जांच में राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी की पुष्टि हुई थी। तब पेशी मुहर्रिर संजय सिंह पर कार्रवाई भी की गई थी, जिन्होंने कथित रूप से भूमि को निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज करा दिया था।
आगे की कार्रवाई जारी, सीलिंग की संस्तुति भेजी गई
अब जिलाधिकारी के आदेश पर पेट्रोल पंप की एनओसी रद्द कर दी गई है और इसे विधिवत सील करने के लिए संस्तुति विस्फोटक नियंत्रक और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन को भेजी गई है। प्रशासन इस मामले को गंभीर भूमि घोटाले के रूप में ले रहा है और इससे जुड़े सभी जिम्मेदार अधिकारियों और भूमाफियाओं पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।








