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देहरादून आढ़त बाजार पुनर्विकास: मुआवजा लेकर भी कब्जा न छोड़ने वालों पर चलेगा बुलडोजर, MDDA ने दिए बलपूर्वक ध्वस्तीकरण के आदेश

On: March 14, 2026 2:02 PM
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देहरादून आढ़त बाजार में एमडीडीए द्वारा अवैध कब्जे पर बुलडोजर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई और तैनात पुलिस बल

​देहरादून:

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून को आधुनिक और सुव्यवस्थित रूप देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की महत्वाकांक्षी ‘आढ़त बाजार पुनर्विकास परियोजना’ अब अपने सबसे कड़े दौर में पहुंच चुकी है। इस बेहद महत्वपूर्ण परियोजना में जिन लोगों ने सरकार से मुआवजा (प्रतिकर राशि) प्राप्त कर लिया है, लेकिन इसके बावजूद अपनी संपत्तियों से कब्जा नहीं छोड़ रहे हैं, अब उनके खिलाफ प्रशासन सख्त से सख्त रुख अपनाने जा रहा है। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे अतिक्रमणकारियों और बाधा उत्पन्न करने वालों के खिलाफ अब बलपूर्वक ध्वस्तीकरण (बुलडोजर कार्रवाई) की जाएगी।

​एमडीडीए उपाध्यक्ष का कड़ा रुख: खुद करेंगे स्थलीय निरीक्षण

​बुधवार को एमडीडीए सभागार में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान यह बड़ा फैसला लिया गया। बैठक की अध्यक्षता कर रहे एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने इस मामले पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि वह स्वयं इस पूरे क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण करेंगे।

​निरीक्षण के दौरान यदि कोई भी ऐसा मामला सामने आता है जहां मुआवजा लेने के बाद भी दुकान या मकान खाली नहीं किया गया है, तो वहां नियमानुसार तुरंत बलपूर्वक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उपाध्यक्ष ने साफ लहजे में चेतावनी दी कि राजधानी की इस सबसे महत्वपूर्ण और दूरगामी परियोजना के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की कोताही, लापरवाही या देरी को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा।

​जून 2026 तक हर हाल में कार्य पूरा करने का समयसीमा निर्धारित

​यह बैठक मुख्य रूप से आढ़त बाजार पुनर्विकास परियोजना की प्रगति का मूल्यांकन करने के लिए बुलाई गई थी। बैठक में परियोजना से जुड़े तमाम लंबित कार्यों की गहन समीक्षा की गई। उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने सभी संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि जून 2026 तक परियोजना के सभी निर्माण कार्य हर हाल में पूरे कर लिए जाएं।


​उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्राथमिकताओं में शामिल यह ड्रीम प्रोजेक्ट केवल एक सामान्य पुनर्विकास कार्य नहीं है, बल्कि यह देहरादून की व्यापारिक रीढ़ और शहरी बुनियादी ढांचे को एक नया, आधुनिक स्वरूप देने वाली क्रांतिकारी योजना है। इस दौरान एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि सभी विभागों के बीच आपसी समन्वय (विभागीय तालमेल) को और अधिक मजबूत किया गया है, ताकि काम की रफ्तार में कोई तकनीकी या प्रशासनिक रुकावट न आए।

​इस महत्वपूर्ण बैठक में एमडीडीए के संयुक्त सचिव प्रत्यूष, वित्त नियंत्रक संजीव कुमार, अधीक्षण अभियंता अतुल गुप्ता, अधिशासी अभियंता सुनील कुमार और लेखपाल नजीर अहमद सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

​रजिस्ट्री प्रक्रिया को रफ्तार देने के लिए विशेष दिन तय

​बैठक के दौरान परियोजना से प्रभावित होने वाली संपत्तियों की रजिस्ट्री प्रक्रिया की भी विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों ने उपाध्यक्ष को अवगत कराया कि अधिकांश प्रभावित मामलों में रजिस्ट्री की प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है, लेकिन कुछ पेचीदा मामले अभी भी लंबित हैं।

​इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए उपाध्यक्ष ने निर्देश दिए कि शेष बचे हुए सभी मामलों को प्राथमिकता (Priority) के आधार पर जल्द से जल्द निपटाया जाए। प्रभावित परिवारों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे, इसके लिए उन्होंने एक विशेष व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए। अब रजिस्ट्री के कार्यों में तेजी लाने के लिए हर सप्ताह बुधवार और शनिवार को विशेष दिन के रूप में तय किया गया है, ताकि समयबद्ध ढंग से औपचारिकताएं पूरी हो सकें।

​18 करोड़ रुपये के बजट से हटेंगी बिजली की लाइनें

​आढ़त बाजार के बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए क्षेत्र में मौजूदा बिजली की लाइनों और अन्य आवश्यक सुविधाओं को शिफ्ट करने की योजना पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि शासन स्तर से इस तकनीकी कार्य के लिए स्वीकृत की गई लगभग 18 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धनराशि को जल्द से जल्द लोक निर्माण विभाग (PWD) को हस्तांतरित (Transfer) किया जाए। बजट मिलते ही पीडब्ल्यूडी बिजली की तारों को हटाने और स्थानांतरित करने का काम शुरू कर देगा, जिससे मुख्य पुनर्विकास कार्य को गति मिलेगी।

​’आलयम’ आवासीय योजना की भी हुई समीक्षा, जल्द मिलेगा कब्जा

​आढ़त बाजार के साथ-साथ एमडीडीए की एक और प्रमुख योजना ‘आलयम आवासीय योजना’ की प्रगति की भी इस बैठक में समीक्षा की गई। उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिए कि इस आवासीय परियोजना के अंतर्गत जितने भी निर्माण कार्य बचे हुए हैं, उन्हें इसी जून माह के भीतर शत-प्रतिशत पूरा कर लिया जाए। इसके तुरंत बाद जो भी इसके पात्र लाभार्थी हैं, उन्हें उनके आशियाने (आवासों) का कब्जा सौंपने की प्रक्रिया को बिना किसी देरी के शुरू कर दिया जाए।

​निष्कर्ष: राजधानी को मिलेगी एक नई वैश्विक व्यापारिक पहचान

​एमडीडीए के आला अधिकारियों के अनुसार, आढ़त बाजार पुनर्विकास परियोजना के पूरी तरह से धरातल पर उतरने के बाद देहरादून की सूरत पूरी तरह बदल जाएगी। इस ऐतिहासिक योजना के पूरा होने से देहरादून को एक आधुनिक, सुव्यवस्थित और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुविधायुक्त व्यापारिक केंद्र (Commercial Hub) के रूप में एक नई पहचान मिलेगी।

​इससे न केवल स्थानीय व्यापारियों को बेहतर और आधुनिक आधारभूत सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि शहर की सबसे बड़ी समस्या यानी ट्रैफिक जाम और यातायात व्यवस्था से भी लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। कुल मिलाकर, यह परियोजना देहरादून के समग्र शहरी और आर्थिक विकास को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाली साबित होगी।

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