मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अधीनस्थ चयन सेवा आयोग की परीक्षा की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जा रही है। इस मामले की जांच के लिए सरकार ने एसआईटी का गठन किया है, जिसकी कमान सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपी गई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी तेजी से आगे बढ़ रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर छात्रों और युवाओं के हित में ठोस कार्रवाई की जाएगी।
विपक्ष पर साधा निशाना – छात्रों की आड़ में हो रहा राजनीतिक लाभ
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ लोग छात्रों की आड़ में केवल सरकार को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। आंदोलन में ऐसे लोग भी शामिल हैं जिनका न तो परीक्षाओं से कोई संबंध है और न ही युवाओं से। वे सिर्फ अपने स्वार्थ को साधने के लिए इस मुद्दे को उछाल रहे हैं। धामी ने कहा कि विपक्ष स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक प्रकरण को मुद्दा बना रहा है, लेकिन इसकी आड़ में देशद्रोह के नारे और सनातन धर्म का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
युवाओं से की अपील – तय करें आंदोलन को दिशा देने वाले कौन
सीएम धामी ने कहा कि युवाओं को खुद यह समझना होगा कि उनके आंदोलनों को संचालित करने वाले लोग कौन हैं और उनका असली मकसद क्या है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग छात्रों की समस्याओं को राजनीति की ओर धकेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की युवा पीढ़ी विवेकशील है और प्रदेश की गरिमा का ध्यान रखते हुए सही निर्णय लेगी।
नियुक्तियों में भ्रष्टाचार की गुंजाइश नहीं
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि प्रदेश सरकार युवाओं के भविष्य और हितों को सर्वोपरि मानती है। उन्होंने कहा कि अब तक 25 हजार नियुक्तियां बिना किसी भ्रष्टाचार के की गई हैं और आगे भी इसी पारदर्शिता के साथ प्रक्रिया जारी रहेगी। भर्ती परीक्षाओं का कैलेंडर जारी कर दिया गया है और उस पर अमल होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार एक माह तक भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा चुकी है ताकि जांच पूरी तरह पारदर्शी ढंग से हो सके।
देवभूमि की गरिमा पर सवाल बर्दाश्त नहीं
धामी ने कहा कि उत्तराखंड सीमावर्ती राज्य है और देवभूमि कहलाता है। ऐसे में यहां देशद्रोह जैसे नारे या धर्म का अपमान अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश देशभक्ति और संस्कृति की मिसाल है और यहां की जनता इस तरह की गतिविधियों को कभी स्वीकार नहीं करेगी।
हरिद्वार में एसआईटी करेगी जनसंवाद
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि एसआईटी अब अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों से सीधे संवाद करेगी। इसी क्रम में शनिवार को हरिद्वार कलेक्ट्रेट सभागार में जनसंवाद कार्यक्रम रखा गया है। इसमें प्रतियोगी छात्र-छात्राएं और अभिभावक अपनी शंकाएं और सवाल सीधे तौर पर समिति के सामने रख सकेंगे।
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