उत्तराखंड की प्रतिष्ठित टिहरी झील को विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। इस संबंध में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान अधिकारियों को ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए सभी आवश्यक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाए, ताकि बाद में बजट में किसी भी तरह की अनावश्यक बढ़ोतरी से बचा जा सके।
टिहरी झील क्षेत्र विकास योजना की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने वर्तमान में चल रही 19 उप-योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट का अवलोकन किया। इसमें डोबरा-चांठी पार्क का विकास, तिवाड़ गांव का उच्चीकरण, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, पर्यटन मार्गों का निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं। उन्होंने इन गतिविधियों की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि सभी कार्यों को तय समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जाए।
मुख्य सचिव ने यह भी निर्देशित किया कि भविष्य में किसी भी नई परियोजना की डीपीआर तैयार करने से पहले जमीनी सर्वेक्षण अनिवार्य रूप से किया जाए, ताकि परियोजना की वास्तविक आवश्यकताओं और संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए उचित योजना बनाई जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि छोटी परियोजनाओं के लिए परामर्शी सेवाओं की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए, जबकि बड़े और महत्वपूर्ण कार्यों के लिए ही विशेषज्ञ सलाहकारों की सहायता ली जा सकती है।
इसके साथ ही मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि प्रत्येक परियोजना के पूर्ण होने के बाद उसका नियमित संचालन और रखरखाव सुनिश्चित किया जाए, जिससे दीर्घकालिक लाभ मिल सके। उन्होंने संबंधित विभागों को अब तक की प्रगति और विभिन्न एजेंसियों द्वारा किए गए कार्यों का एक समेकित विवरण भी अगली बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
बैठक में प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव पर्यटन सचिन कुर्वे, सचिव वी षणमुगम, परियोजना निदेशक अभिषेक रोहेला सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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