देहरादून में डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच अब स्क्रब टाइफस का खतरा भी सामने आने लगा है। दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इस बीमारी से पीड़ित दो बच्चों का उपचार चल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार फिलहाल दोनों की स्थिति स्थिर है और सुधार हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, पौड़ी गढ़वाल की 15 वर्षीय मानसी पिछले सात दिनों से तेज बुखार और चार दिनों से पेट दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची थी। जांच में उसमें स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई, जिसके बाद उसे आईवी एंटीबायोटिक और सहायक उपचार दिया जा रहा है। वहीं, टिहरी के घनसाली निवासी 11 वर्षीय आशुतोष को भी सात दिनों से तेज बुखार था और भर्ती के समय उसका ब्लड प्रेशर कम पाया गया। जांच में उसके भी स्क्रब टाइफस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई।
बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि यह बीमारी ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी नामक बैक्टीरिया से होती है, जो माइट्स में पाया जाता है। माइट्स अक्सर दुधारू व कृषि उपयोगी मवेशियों, जंगलों और बगीचों में पाए जाते हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में गोशालाएं घरों के पास होने के कारण ये आसानी से घरों में प्रवेश कर संक्रमण फैला सकते हैं।
लक्षण
डॉ. अशोक के अनुसार, स्क्रब टाइफस के मुख्य लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना, शरीर में दर्द, त्वचा पर लाल दाने और माइट्स के काटने की जगह पर काला गोल निशान शामिल है।
बचाव के उपाय
दुधारू व कृषि उपयोगी पशुओं को घर से दूर रखें।
पालतू जानवरों (कुत्ते-बिल्ली) की नियमित सफाई करें।
घर और आसपास की स्वच्छता बनाए रखें।
जंगल, घास या बगीचे में जमीन पर न लेटें।
नंगे पैर न चलें और घनी झाड़ियों से दूर रहें।
बुखार न उतरने या सांस लेने में तकलीफ होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
दोनों बच्चों का उपचार डॉ. तन्वी की देखरेख में चल रहा है और उनकी हालत में तेजी से सुधार हो रहा है। चिकित्सकों ने लोगों से साफ-सफाई और सतर्कता बरतने की अपील की है, ताकि इस संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
यह भी पढें- बदरीनाथ हाईवे कौड़ियाला के पास मलबा गिरने से बंद , बदरीनाथ के लिए ऑफलाइन पंजीकरण शुरू






