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हल्द्वानी में जमानत के बावजूद जेल से बाहर नहीं आ सकीं ब्लॉगर ज्योति अधिकारी, खटीमा के बी-वारंट ने अटकाई रिहाई

On: January 14, 2026 8:27 AM
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हल्द्वानी के मुखानी थाने में दर्ज मामलों में ब्लॉगर ज्योति अधिकारी को जमानत मिल गई है, लेकिन इसके बावजूद उनकी जेल से रिहाई नहीं हो सकी। खटीमा थाने से जारी बी-वारंट के चलते उन्हें अभी जेल में ही रहना पड़ा। अब बुधवार को उन्हें दूसरी अदालत में पेश किया जाएगा।

मंगलवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट विशाल ठाकुर की अदालत में मुखानी थाने में दर्ज मामलों की सुनवाई हुई, जहां जमानत मंजूर कर ली गई। जमानत मिलने की खबर के बाद स्वजन और परिचितों को उम्मीद थी कि शाम तक हीरानगर स्थित उपकारागार से ज्योति की रिहाई हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।

दरअसल, ज्योति अधिकारी के खिलाफ ऊधम सिंह नगर और अल्मोड़ा जिलों में भी अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज हैं। खटीमा में दर्ज मामले को लेकर पुलिस ने जेल प्रशासन के पास बी-वारंट प्रस्तुत कर दिया, जिसके चलते उनकी रिहाई पर रोक लग गई।

गौरतलब है कि ज्योति अधिकारी के खिलाफ पहला मामला हल्द्वानी के मुखानी थाने में दर्ज हुआ था। जूही चुफाल नामक युवती ने शिकायत देकर आरोप लगाया था कि इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में ज्योति अधिकारी देवी-देवताओं और पहाड़ की महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करती नजर आ रही हैं। साथ ही वह सार्वजनिक स्थान पर दराती लहराते हुए दिखाई दे रही थीं। शिकायत के आधार पर पुलिस ने धार्मिक भावनाओं को आहत करने, आर्म्स एक्ट सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।

इसके बाद आठ जनवरी को पुलिस ने ज्योति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बाद में मुखानी थाने में ही वादी को धमकाने के आरोप में एक और मामला दर्ज किया गया। वहीं, वायरल वीडियो के आधार पर खटीमा, रुद्रपुर और अल्मोड़ा में भी उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।

मंगलवार को अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र बिष्ट, गौरव कपूर समेत अन्य वकीलों ने जमानत के पक्ष में लंबी दलीलें दीं। उन्होंने तर्क दिया कि ज्योति का उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना या समाज को भड़काना नहीं था। तहरीर में वीडियो की तारीख और स्थान का उल्लेख भी नहीं किया गया है। दराती हाथ में लेने का मकसद किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं था। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि ज्योति समाज में सकारात्मक संदेश देने के लिए वीडियो बनाकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को भी तैयार हैं।

जेल अधीक्षक प्रमोद पांडे ने बताया कि खटीमा में दर्ज प्राथमिकी के संबंध में बी-वारंट दाखिल होने के कारण ज्योति अधिकारी की रिहाई संभव नहीं हो सकी। अब उन्हें बुधवार को संबंधित अदालत में पेश किया जाएगा, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

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