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​”मोदी कैबिनेट का बड़ा एक्शन: 12,000 करोड़ से चमकेगा इंफ्रास्ट्रक्चर, जूट किसानों को तोहफा और ‘केरल’ अब हुआ ‘केरलम’!”

On: February 24, 2026 10:54 AM
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में देश के विकास को नई रफ्तार देने के लिए कई बड़े और दूरगामी फैसले लिए गए। सरकार ने रेलवे, शहरी परिवहन (मेट्रो), नागरिक उड्डयन और कृषि आधारित जूट उद्योग को मजबूती देने के लिए 12,236 करोड़ रुपये के कुल वित्तीय परिव्यय वाली परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
कैबिनेट के इन फैसलों का उद्देश्य न केवल आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण करना है, बल्कि क्षेत्रीय पहचान और किसानों की आय में वृद्धि को भी सुनिश्चित करना है। आइए जानते हैं कैबिनेट के इन महत्वपूर्ण फैसलों के मुख्य बिंदु।

  1. रेलवे और मेट्रो: कनेक्टिविटी का नया अध्याय
    सरकार का सबसे बड़ा फोकस ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क को दुरुस्त करने पर है। कैबिनेट ने रेलवे के विस्तार और मेट्रो परियोजनाओं के लिए भारी निवेश को हरी झंडी दिखाई है।
  • नेटवर्क विस्तार: रेलवे की नई परियोजनाओं से माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी और यात्रियों के सफर में लगने वाले समय में कमी आएगी।
  • शहरी परिवहन: मेट्रो परियोजनाओं के विस्तार से बड़े शहरों में यातायात का दबाव कम होगा और ‘ईज ऑफ लिविंग’ (Ease of Living) को बढ़ावा मिलेगा। इन परियोजनाओं से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
  1. नागरिक उड्डयन (Aviation): एयरपोर्ट्स का आधुनिकीकरण
    हवाई संपर्क को देश के कोने-कोने तक पहुँचाने के उद्देश्य से, कैबिनेट ने हवाई अड्डों के विकास के लिए विशेष बजट आवंटित किया है। छोटे शहरों को बड़े केंद्रों से जोड़ने के लिए ‘उड़ान’ योजना के अगले चरण और मौजूदा हवाई अड्डों की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इससे पर्यटन और व्यापार दोनों क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा।
  2. जूट क्षेत्र को संजीवनी: किसानों और मजदूरों के लिए बड़ी खबर
    मोदी सरकार ने जूट क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया है।
  • अनिवार्य पैकेजिंग: केंद्र ने खाद्यान्न और चीनी की पैकेजिंग में जूट के बोरों के अनिवार्य उपयोग के मानदंडों को विस्तार दिया है।
  • प्रभाव: इस फैसले से पश्चिम बंगाल, बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों के लाखों जूट किसानों और मिल श्रमिकों को सीधा फायदा होगा। यह कदम न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा।
  1. केरल अब होगा ‘केरलम’: भाषाई और सांस्कृतिक पहचान का सम्मान
    कैबिनेट के सबसे चर्चित फैसलों में से एक ‘केरल’ राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी देना रहा।
  • ऐतिहासिक संदर्भ: मलयालम भाषा में राज्य को ‘केरलम’ ही कहा जाता है। राज्य सरकार ने लंबे समय से यह मांग की थी कि संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में राज्य का नाम बदलकर केरलम किया जाए।
  • महत्व: केंद्र की इस मंजूरी को सहकारी संघवाद और क्षेत्रीय संस्कृति के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।
  1. पावर सेक्टर में सुधार: बिजली उपभोक्ताओं को राहत
    कैबिनेट ने ऊर्जा क्षेत्र (Power Sector) में सुधारों को लेकर भी नीतिगत फैसले लिए हैं। इसमें वितरण कंपनियों (DISCOMs) की कार्यक्षमता बढ़ाने और अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) के ग्रिड एकीकरण को सरल बनाने पर चर्चा हुई। इसका सीधा असर भविष्य में बिजली की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ेगा।
    आर्थिक और रणनीतिक महत्व
    12,236 करोड़ रुपये का यह निवेश भारत को $5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होने वाला ₹1 अर्थव्यवस्था में ₹2.5 से ₹3 तक का मूल्यवर्धन (Value Addition) करता है।
    मुख्य प्रभाव:
  • लॉजिस्टिक्स लागत में कमी: रेलवे के सुधार से सामान पहुंचाना सस्ता होगा।
  • मेक इन इंडिया को बढ़ावा: जूट और इंफ्रा प्रोजेक्ट्स से स्थानीय उद्योगों को काम मिलेगा।
  • राज्यों के साथ सामंजस्य: केरल के नाम परिवर्तन जैसे फैसले केंद्र-राज्य संबंधों को मधुर बनाएंगे।
    निष्कर्ष
    मोदी कैबिनेट के ये फैसले स्पष्ट करते हैं कि सरकार का लक्ष्य ‘गति’ और ‘शक्ति’ के साथ-साथ ‘संस्कृति’ को भी साथ लेकर चलना है। जहां एक ओर भारी निवेश से बुनियादी ढांचा चमकने वाला है, वहीं दूसरी ओर जूट किसानों और भाषाई पहचान का सम्मान कर सरकार ने समावेशी विकास का संदेश दिया है।

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