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भोपाल में सरेआम ‘तांडव’: 30 सेकंड में 27 बार चाकू से वार, नाबालिगों की खूनी रंजिश ने हिला दी राजधानी

On: February 23, 2026 8:11 AM
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भोपाल |
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि किशोरों में बढ़ती हिंसक प्रवृत्ति को लेकर भी समाज को आइना दिखाया है। एक मामूली थप्पड़ का बदला लेने के लिए दो नाबालिगों ने जिस बर्बरता का परिचय दिया, उसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। शहर के एक स्नूकर क्लब में 10वीं के छात्र पर मात्र 30 सेकंड के भीतर 27 बार चाकू और खंजर से हमला किया गया।
फिल्मी स्टाइल में हमला, फिर सोशल मीडिया पर ‘दबंगई’
यह पूरी घटना 15 फरवरी की रात गणेश चौक स्थित एक स्नूकर क्लब में घटित हुई। सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि कैसे दो नाबालिग लड़के किसी पेशेवर अपराधी की तरह क्लब में दाखिल होते हैं। उन्होंने पहले से ही योजना बनाई हुई थी। जैसे ही उनकी नजर 10वीं में पढ़ने वाले पीड़ित छात्र पर पड़ती है, वे उसे चारों तरफ से घेर लेते हैं। बिना किसी बातचीत के, हमलावर छात्र पर ताबड़तोड़ वार करना शुरू कर देते हैं।
हैरानी की बात यह है कि हमलावरों ने न केवल इस वारदात को अंजाम दिया, बल्कि खौफ पैदा करने के लिए इसका सीसीटीवी फुटेज खुद ही सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो में दिख रहा है कि कैसे वे 30 सेकंड के भीतर छात्र को लहुलुहान कर देते हैं और फिर उसी तेजी से मौके से फरार हो जाते हैं।
शरीर पर दर्जनों जख्म: मौत को छूकर लौटा छात्र
इस हमले की क्रूरता का अंदाजा पीड़ित को आई चोटों से लगाया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, छात्र की एक कलाई पर ही 10 से ज्यादा गहरे जख्म हैं। हमले के दौरान बचाव करते समय उसके दूसरे हाथ की दो उंगलियां कट गईं। इसके अलावा, हमलावरों ने उसकी पीठ और कंधे को भी निशाना बनाया, जिससे उसे गहरे घाव आए हैं। इतनी गंभीर चोटों और खून बहने के बावजूद, छात्र ने हिम्मत नहीं हारी और वहां से भागने में सफल रहा। फिलहाल उसका निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
मामूली कहासुनी और थप्पड़ का खूनी इंतकाम
गौतम नगर पुलिस की जांच में जो वजह सामने आई है, वह बेहद चौंकाने वाली है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी और पीड़ित एक ही कोचिंग सेंटर में पढ़ते हैं। कुछ दिन पहले स्नूकर खेलने के दौरान उनके बीच ‘दबदबे’ को लेकर बहस हुई थी। बात बढ़ने पर पीड़ित छात्र ने आरोपियों को थप्पड़ मार दिया था। इसी मामूली अपमान का बदला लेने के लिए आरोपियों ने ‘फिल्मी अंदाज’ में इस खूनी साजिश को रचा।
पुलिसिया कार्रवाई और उठते सवाल
इस मामले ने भोपाल पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतनी भयावह घटना के बावजूद, शुरुआत में पुलिस ने इसे महज मारपीट की सामान्य धाराओं के तहत दर्ज किया। सबसे अधिक हैरान करने वाली बात यह रही कि दोनों नाबालिग आरोपियों को हिरासत में लेने के बाद नोटिस देकर रिहा कर दिया गया।
कानून के जानकारों का मानना है कि जिस तरह से 27 बार वार किए गए, वह स्पष्ट रूप से ‘हत्या के प्रयास’ (Attempt to Murder) की श्रेणी में आता है। सब-इंस्पेक्टर मणिपाल सिंह भदौरिया का कहना है कि पुलिस मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिसके आधार पर धाराओं में इजाफा किया जाएगा। हालांकि, आरोपियों की तत्काल रिहाई ने पीड़ित परिवार और आम जनता में रोष पैदा कर दिया है।
निष्कर्ष: किशोर अपराधों का बढ़ता ग्राफ
भोपाल की यह घटना महज एक ‘क्राइम न्यूज़’ नहीं है, बल्कि यह एक चेतावनी है। सोशल मीडिया पर अपराध का महिमामंडन (Glorification) और छोटी-छोटी बातों पर जान लेने की इच्छा रखना हमारे समाज के पतन की ओर इशारा कर रहा है। जेएनयू जैसी यूनिवर्सिटी हो या भोपाल का स्नूकर क्लब, हिंसा का यह बढ़ता चलन शिक्षा और संस्कारों पर बड़े सवाल दाग रहा है।

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