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शुक्रवार को शीतकाल के लिए बंद होंगे रुद्रनाथ धाम के कपाट, गोपीनाथ मंदिर में होगी अगली पूजा

On: October 16, 2025 10:29 AM
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उत्तराखंड के पवित्र चारधामों में से एक, चतुर्थ केदार रुद्रनाथ धाम के कपाट इस शुक्रवार को विधिवत पूजा-अर्चना के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इस अवसर पर भगवान रुद्रनाथ को पारंपरिक रूप से मंदार के बुग्याली पुष्पों से समाधि दी जाएगी। इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय ग्रामीण और हकहकूकधारी धाम में एकत्र हो चुके हैं।
पांडवों को यहीं हुए थे भगवान शिव के दर्शन
धार्मिक मान्यता के अनुसार, रुद्रनाथ धाम वही स्थल है जहां भगवान शिव ने पांडवों को मुखारबिंद (मुख रूप) में दर्शन दिए थे। यह भारत का एकमात्र मंदिर है जहां भगवान शिव के मुख रूप की पूजा होती है। यह मंदिर एक प्राकृतिक गुफा में स्थित है, जिसे मंदिर के रूप में विकसित किया गया है। यहां की यात्रा को अत्यंत कठिन और दुर्गम माना जाता है।
इस वर्ष रिकॉर्ड तोड़ संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
इस वर्ष रुद्रनाथ धाम की यात्रा में एक लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने भाग लिया, जो अब तक की सर्वाधिक संख्या है। यह धार्मिक आस्था और साहसिक ट्रेकिंग दोनों का प्रतीक है। रुद्रनाथ की यात्रा गढ़वाल मंडल के चमोली जिले में स्थित गोपेश्वर से शुरू होती है, जहां से लगभग 19 किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद धाम पहुंचा जाता है। रास्ता कठिन और निर्जन क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जिससे यह यात्रा विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण बन जाती है।
कपाट बंद होने की तैयारियां पूर्ण
मंदिर के पुजारी सुनील तिवारी ने बताया कि कपाट बंद करने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शुक्रवार की सुबह चार बजे मंदिर के कपाट खोले जाएंगे और दैनिक पूजा, श्रृंगार पूजा, भोग और सांध्य आरती की जाएगी। इसके बाद सुबह पांच बजे भगवान शिव को मंदार पुष्पों से समाधि दी जाएगी, और रुद्रनाथ जी की उत्सव डोली को मंदिर से बाहर लाने के साथ ही कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
गोपीनाथ मंदिर में होगी शीतकालीन पूजा
कपाट बंद होने के बाद भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली मौली खर्क और सगर गांव में विशेष पूजा-अर्चना के पश्चात गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर पहुंचेगी। यही मंदिर शीतकाल में भगवान रुद्रनाथ की पूजा-अर्चना के लिए निर्धारित है। विशेष बात यह है कि समाधि के लिए लाए गए मंदार के सफेद पुष्प, कपाट खुलने पर सबसे बड़े प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं को वितरित किए जाएंगे।
कपाट बंदी का विस्तृत कार्यक्रम
• प्रातः 4:00 बजे – कपाट खोले जाएंगे, प्रारंभ होगी विशेष पूजा।
• पूजन क्रम – दैनिक पूजा, श्रृंगार, दिन की भोग आरती और सांध्य पूजा।
• प्रातः 5:00 बजे – भगवान रुद्रनाथ को मंदार फूलों से समाधि दी जाएगी।
• इसके तुरंत बाद – उत्सव डोली मंदिर से प्रस्थान करेगी।
• सूर्यास्त से पूर्व – डोली गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में स्थापित की जाएगी।

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