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एम्स ऋषिकेश में एथेरेक्टोमी तकनीक से हुआ सफल इलाज, अब बिना सर्जरी और स्टंट के दूर होगा नसों का ब्लॉकेज

On: April 22, 2025 11:52 AM
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अब तक पैरों की नसों में ब्लॉकेज की समस्या का इलाज बायपास सर्जरी या स्टंट डालने से किया जाता था, लेकिन एम्स ऋषिकेश ने आधुनिक तकनीक ‘एथेरेक्टोमी’ के जरिए इस प्रक्रिया को नया मोड़ दिया है। यह तकनीक मरीजों को न केवल बड़ी सर्जरी से बचाती है, बल्कि रक्त वाहिकाओं में स्टंट डालने की आवश्यकता भी समाप्त कर देती है। इस उन्नत और न्यूनतम इनवेसिव उपचार के जरिये अब रोगी बिना जटिल प्रक्रियाओं के राहत पा सकते हैं।

देश के नवस्थापित एम्स में पहली बार प्रयोग

एम्स ऋषिकेश, देश के नव स्थापित एम्स संस्थानों में पहला ऐसा संस्थान बन गया है जिसने इस तकनीक को अपनाया है। रेडियोलॉजी विभाग ने अप्रैल के पहले सप्ताह में देहरादून निवासी एक 68 वर्षीय बुज़ुर्ग मरीज का सफलतापूर्वक इलाज किया। मरीज को पैरों में ब्लॉकेज के कारण चलने-फिरने में अत्यधिक दर्द हो रहा था और पैरों का रंग काला पड़ने लगा था। एम्स के डायग्नोस्टिक और इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विभाग द्वारा की गई इस प्रक्रिया से अब वह बेहतर महसूस कर रहे हैं और उनके लक्षणों में स्पष्ट सुधार देखा गया है।

क्या है ‘एसएफए एथेरेक्टोमी’?

इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर एवं इस प्रक्रिया के ऑपरेटिंग विशेषज्ञ डॉ. उदित चौहान के अनुसार, ‘एसएफए एथेरेक्टोमी’ एक अत्याधुनिक एंडोवास्कुलर तकनीक है। यह तकनीक मुख्य रूप से सुपरफिशियल फेमोरल आर्टरी (SFA) में जमा एथेरोस्क्लेरोटिक प्लाक को हटाने के लिए विकसित की गई है। इस प्रक्रिया में न्यूनतम चीरा लगाकर ब्लॉकेज हटाया जाता है, जिससे पैरों में रक्त का प्रवाह सुचारु होता है और मरीज को चलने-फिरने में राहत मिलती है।

परिधीय धमनी रोग (PAD) से पीड़ित मरीजों के लिए वरदान

रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. अंजुम ने बताया कि यह तकनीक परिधीय धमनी रोग (Peripheral Arterial Disease) से जूझ रहे मरीजों के लिए बेहद लाभकारी है। इस रोग में पैरों की धमनियों में अवरोध उत्पन्न हो जाता है, जिससे रक्त प्रवाह बाधित होता है और अंगों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी आ जाती है। एथेरेक्टोमी तकनीक से इस समस्या का समाधान सर्जरी के बिना संभव हो सका है।

एम्स ऋषिकेश की नई उपलब्धि

एम्स ऋषिकेश की यह उपलब्धि उन्नत चिकित्सा तकनीकों को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रक्रिया की सफलता, संस्थान की इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी में बढ़ती क्षमताओं का प्रमाण है। साथ ही, यह अन्य नवस्थापित एम्स के लिए एक प्रेरणा भी है। चिकित्सा सेवाओं में नवाचार और मरीजों को विश्वस्तरीय उपचार प्रदान करने की प्रतिबद्धता को यह उपलब्धि सशक्त रूप से दर्शाती है।

रेडियोलॉजी विभाग के डॉ. पंकज शर्मा और डॉ. उदित चौहान ने अपील की है कि पैर की नसों में ब्लॉकेज की समस्या से परेशान मरीज एम्स ऋषिकेश के पांचवें तल पर स्थित डीएसए लैब में संपर्क कर सकते हैं और इस नवीनतम तकनीक का लाभ ले सकते हैं।

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