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Badrinath Temple Donation Investigation: बदरीनाथ धाम में दान-चढ़ावे पर उठे सवाल, धामी सरकार ने बनाई हाई लेवल जांच समिति

On: July 8, 2026 6:32 AM
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High-level committee begins Badrinath Temple Donation Investigation into alleged donation and offering management irregularities at Badrinath Dham.

उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध Badrinath Temple Donation Investigation ने राज्य की धार्मिक और प्रशासनिक व्यवस्था में नई चर्चा छेड़ दी है। बदरीनाथ धाम में दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। सरकार ने समिति को 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट और आवश्यक सुझाव सौंपने के निर्देश दिए हैं।

धार्मिक आस्था से जुड़े इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि जांच का उद्देश्य केवल आरोपों की पुष्टि करना नहीं, बल्कि भविष्य में दान-चढ़ावे की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और विश्वसनीय बनाना भी है। Badrinath Temple Donation Investigation अब उत्तराखंड की सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक जांचों में शामिल हो गई है।

तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति करेगी जांच

सरकार द्वारा गठित समिति की अध्यक्षता गढ़वाल मंडल के आयुक्त करेंगे। समिति में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के प्रबंध निदेशक संदीप तिवारी और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग कार्यालय के निदेशक (वित्त) जगत सिंह चौहान को सदस्य बनाया गया है।

सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल की ओर से जारी आदेश के अनुसार Badrinath Temple Donation Investigation के दौरान समिति दान-चढ़ावे से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं, वित्तीय रिकॉर्ड, प्रबंधन व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की गहन समीक्षा करेगी।

15 दिनों में सरकार को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

राज्य सरकार ने जांच समिति को स्पष्ट समय-सीमा देते हुए 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

Badrinath Temple Donation Investigation के तहत समिति सभी तथ्यों की जांच कर यह बताएगी कि दान प्रबंधन में किसी प्रकार की अनियमितता हुई या नहीं। यदि जांच में कोई कमी या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो समिति आवश्यक सुधारात्मक सुझाव भी देगी।

सरकार का मानना है कि समयबद्ध जांच से मामले में पारदर्शिता बनी रहेगी और श्रद्धालुओं का विश्वास भी मजबूत होगा।

विशेषज्ञों और अधिकारियों से भी लिया जा सकेगा सहयोग

जांच प्रक्रिया को व्यापक और निष्पक्ष बनाने के लिए समिति को आवश्यकतानुसार किसी भी अधिकारी, वित्तीय विशेषज्ञ, तकनीकी विशेषज्ञ या संबंधित व्यक्ति का सहयोग लेने की अनुमति दी गई है।

Badrinath Temple Donation Investigation के दौरान समिति मंदिर प्रशासन, बैंकिंग प्रक्रिया, दान संग्रह प्रणाली और रिकॉर्ड प्रबंधन से जुड़े सभी पहलुओं का अध्ययन करेगी।

जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों से पूछताछ भी की जा सकती है ताकि जांच निष्पक्ष और तथ्यपरक हो।

दान प्रबंधन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने पर रहेगा फोकस

सरकार ने जांच समिति को केवल कथित अनियमितताओं की जांच तक सीमित नहीं रखा है।

Badrinath Temple Donation Investigation के तहत समिति भविष्य के लिए ऐसी व्यवस्थाएं भी सुझाएगी, जिनसे दान और चढ़ावे का प्रबंधन अधिक पारदर्शी, डिजिटल, उत्तरदायी और प्रभावी बनाया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर आधुनिक वित्तीय निगरानी प्रणाली लागू करने से श्रद्धालुओं का भरोसा और मजबूत होगा।

BKTC ने निजी सहायक को किया निलंबित

मामले के सामने आने के बाद श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने भी प्रारंभिक स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है।

Badrinath Temple Donation Investigation के बीच अध्यक्ष कार्यालय में तैनात निजी सहायक प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

BKTC के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के अनुसार शुरुआती जांच में कुछ अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है। हालांकि अंतिम निर्णय विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा।

पहले से गठित है चार सदस्यीय जांच समिति

सोशल मीडिया पर दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर आरोप सामने आने के बाद BKTC ने पहले ही चार सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी थी।

इस समिति में वित्त नियंत्रक हेम कांडपाल, विधि अधिकारी एस.एस. बर्त्वाल, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजन नैथानी और केदारनाथ के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डी.एस. भुजवान को शामिल किया गया।

अब राज्य सरकार की उच्चस्तरीय समिति और BKTC की आंतरिक जांच समानांतर रूप से Badrinath Temple Donation Investigation के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा कर रही हैं।

श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती

बदरीनाथ धाम देश के सबसे प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में Badrinath Temple Donation Investigation केवल वित्तीय जांच का विषय नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास और धार्मिक संस्थानों की विश्वसनीयता से भी जुड़ा मामला है। विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक संस्थानों में दान प्रबंधन पूरी तरह पारदर्शी होना चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही हो।

सरकार ने पारदर्शिता का दिया भरोसा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि धार्मिक संस्थानों की गरिमा और जनता के विश्वास से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। Badrinath Temple Donation Investigation के माध्यम से सरकार का उद्देश्य निष्पक्ष जांच कर तथ्यों को सामने लाना और यदि आवश्यकता हो तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करना है। साथ ही सरकार भविष्य में ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करना चाहती है, जिनसे दान और चढ़ावे की निगरानी अधिक आधुनिक और पारदर्शी बन सके।

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