Haryana power strike के कारण प्रदेश के कई जिलों में हाहाकार मचा हुआ है। बिजली निगम के कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से जनता का दैनिक जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुका है। Hisar सर्कल के लगभग 355 इलाकों में पिछले 24 से 48 घंटे से लगातार ब्लैकआउट की स्थिति बनी हुई है। बिजली सप्लाई ठप होने के कारण अब पीने के पानी का संकट भी गहराने लगा है और लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
Haryana Power Strike का कारण और निजीकरण का विरोध
गुरुग्राम और नूंह क्षेत्र में बिजली वितरण का जिम्मा एक निजी कंपनी को देने के सरकारी फैसले के खिलाफ बिजली कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। हरियाणा बिजली कर्मचारी व इंजीनियर्स साझा संघर्ष मोर्चा के बैनर तले लगभग 40 हजार अधिकारी और कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल हैं।
हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"
वीरवार को हिसार के राजगढ़ रोड स्थित SE कार्यालय और विद्युत सदन के गेट नंबर-4 पर 450 से अधिक अभियंताओं और कर्मचारियों ने एकत्र होकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साझा मोर्चा के पदाधिकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि निजी कंपनी को दिया गया लाइसेंस तुरंत रद्द नहीं किया गया, तो वे आगामी बैठकों में इस आंदोलन को और उग्र बनाएंगे।
स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ
बिजली दफ्तरों में 98 प्रतिशत से अधिक स्टाफ अनुपस्थित
हिसार सर्कल के आंकड़ों पर नजर डालें तो हड़ताल का असर बेहद गंभीर रहा है:
- रेगुलर अधिकारी व कर्मचारी: कुल 544 में से 538 अनुपस्थित रहे (98.90% हड़ताल पर)।
- अनुबंधित कर्मचारी: कुल 203 में से 198 कर्मचारी काम पर नहीं आए।
- कुल प्रभाव: कुल 747 में से 736 कर्मचारी अनुपस्थित रहे, जिससे बिजली व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर गई।
कंट्रोल रूम में 2100 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं, लेकिन कर्मचारियों के न होने के कारण मात्र 5 शिकायतों का ही समाधान हो पाया।
सड़क पर उतरे आक्रोशित नागरिक: कई जगहों पर लगे जाम
बिजली-पानी न मिलने से परेशान होकर आम जनता का सब्र टूट गया।
- सेक्टर-13 और 16-17 का हाल: सेक्टर-13 स्थित सब-स्टेशन के बाहर सैकड़ों निवासियों ने रात आठ बजे प्रदर्शन किया और मुख्य सड़क को बाधित कर दिया। लगभग 8 घंटे तक बिजली बंद रहने से 5 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए। अधिकारियों द्वारा फोन न उठाए जाने पर CTM को मौके पर पहुंचना पड़ा और सुरक्षा बल तैनात करना पड़ा।
- बरवाला में हाईवे जाम: बरवाला में नेशनल हाईवे-52 पर स्थित बिजली बोर्ड के सामने गुस्साए लोगों ने चक्का जाम कर दिया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह स्थिति को संभाला।
- आजाद नगर और अन्य इलाके: आजाद नगर में रात 10 बजे विशाल विरोध प्रदर्शन किया गया।
पानी का गहराता संकट और ठप पड़ा सिस्टम
हिसार के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जल आपूर्ति पूरी तरह ठप है। 23 घंटे से अधिक समय तक पावर कट रहने की वजह से वाटर पंपिंग स्टेशन काम नहीं कर पा रहे हैं।
प्रभावित प्रमुख ग्रामीण और शहरी क्षेत्र:
- ग्रामीण क्षेत्र: अग्रोहा, नंगथला, मंगाली, चौधरीवास, मिर्चपुर, थुराना, बास, उमरा, राजली, सदलपुर, और सातरोड पंप सहित दर्जनों गांव।
- शहरी क्षेत्र: नागोरी गेट, राजगुरु मार्केट, आजाद नगर, सूर्य नगर, पटेल नगर, जवाहर नगर, मिल गेट, कैमरी रोड, और नागरिक अस्पताल के समीप का इलाका।
कानून और प्रशासनिक अव्यवस्था: जुगाड़ से चला काम
बिजली सेवाओं जैसी आवश्यक सुविधाओं को बाधित करने पर कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जा सकती है। विधिक विशेषज्ञों के अनुसार:
”दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) आचरण नियमावली, 2006 के तहत हड़ताल पर रोक है। हरियाणा आवश्यक सेवा रखरखाव कानून (ESMA) और संबंधित नियमों के तहत किसी भी कर्मचारी को हड़ताल करने या उकसाने पर 3 साल तक की सजा हो सकती है।”
दूसरी ओर, प्रशासनिक मुख्यालयों में स्थिति इतनी विकट रही कि विद्युत सदन में मंगाया गया जनरेटर चलाने के लिए कोई ऑपरेटर तक उपलब्ध नहीं था। कंट्रोल रूम में काम चालू रखने के लिए ठेकेदारों के जरिए कुंडी लगाकर काम चलाया गया, जिससे कागजी रिपोर्ट भेजी जा सकी।
यदि सरकार और कर्मचारियों के बीच जारी यह तनातनी जल्द समाप्त नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में यह संकट और भयानक रूप ले सकता है।











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