Uttarakhand High Court: 5 Key Updates on NIT Promotions
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Uttarakhand High Court: नॉन-टीचिंग स्टाफ के प्रमोशन पर 9 महीने में फैसला, हाईकोर्ट ने 451 सहायक शिक्षक पदों पर भर्ती के भी दिए निर्देश

On: October 14, 2026 5:01 PM
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Uttarakhand High Court hearing on NIT Uttarakhand non-teaching staff promotions, salary levels and recruitment for 451 primary assistant teacher posts.

Uttarakhand High Court: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) उत्तराखंड, श्रीनगर के गैर-शिक्षक कर्मचारियों की पदोन्नति और वेतन स्तर से जुड़े मामले में अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के सचिव को निर्देश दिए हैं कि कर्मचारियों की पदोन्नति और वेतन निर्धारण से संबंधित प्रकरण पर नौ महीने के भीतर निर्णय लिया जाए। इसके साथ ही प्राथमिक शिक्षा में सहायक अध्यापकों के 451 रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया जल्द शुरू करने के निर्देश भी दिए गए हैं। दोनों मामलों की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने की।

NIT के नॉन-टीचिंग स्टाफ को प्रमोशन का इंतजार

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान उत्तराखंड के गैर-शिक्षक कर्मचारियों ने पदोन्नति के अवसर और वेतन स्तर से जुड़ी समस्याओं को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया था। नेहा रतूड़ी समेत अन्य याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि उनके वेतन का निर्धारण भर्ती नियम 2019 के अनुसार किया जाए। उनका कहना था कि समान श्रेणी के गैर-शिक्षण उच्च तकनीकी कर्मचारियों के साथ वेतन और सेवा संबंधी मामलों में समानता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"

याचिकाकर्ताओं ने पूर्वव्यापी प्रभाव से पदोन्नति देने और उससे जुड़े वित्तीय व अन्य परिणामी लाभ उपलब्ध कराने की मांग भी की थी। उन्होंने संबंधित पदों के लिए भर्ती नियम 2019 के तहत लेवल-9 का लाभ देने का अनुरोध किया था। इसके अलावा, याचिका के अंतिम निस्तारण तक गैर-शिक्षण पदों पर अन्य भर्ती और पदोन्नति प्रक्रियाओं को रोकने की मांग भी की गई थी।

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बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने दी थी सैद्धांतिक मंजूरी

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि पदोन्नति के पर्याप्त अवसर नहीं मिलने से कर्मचारियों को सेवा में ठहराव का सामना करना पड़ रहा था। इस संबंध में संस्थान के सक्षम प्राधिकारी को प्रत्यावेदन दिया गया था। इसके बाद मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई और प्रकरण को 6 जनवरी 2026 को हुई बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक में रखा गया।

जानकारी के अनुसार, बोर्ड ने गैर-शिक्षक कर्मचारियों की मैपिंग या उच्चीकरण को उनकी फीडिंग कैडर में पात्रता की तारीख से लागू करने और संबंधित पदों के पुनर्जीवन को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। बोर्ड ने इस संबंध में प्रस्ताव केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को भेजने का भी निर्णय लिया था।

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Uttarakhand High Court शिक्षा मंत्रालय को नौ महीने में निर्णय लेने का निर्देश

हाईकोर्ट ने कहा कि जब संस्थान का बोर्ड इस विषय पर निर्णय ले चुका है, तो अब मामले की जांच और अंतिम निर्णय मंत्रालय के स्तर पर होना है। इसी आधार पर कोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया।

अदालत ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के सचिव को निर्देश दिया कि यदि इस मामले में अब तक अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, तो आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने की तारीख से नौ महीने के भीतर उचित निर्णय लिया जाए। इससे कर्मचारियों की पदोन्नति और वेतन निर्धारण से जुड़े मामले पर समयबद्ध कार्रवाई की उम्मीद बढ़ी है।

सहायक अध्यापकों के 451 पदों पर भर्ती जल्द शुरू करने के आदेश

एक अन्य मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने प्राथमिक शिक्षा के सहायक अध्यापकों के 451 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया जल्द शुरू करने के निर्देश दिए हैं। ये पद पहले जारी विज्ञप्ति के बावजूद लंबे समय से खाली हैं।

सूरज गैरोला, मनोज पांडे समेत अन्य याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि वर्ष 2019-20 में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने प्राथमिक शिक्षा में सहायक अध्यापकों के 2,287 पदों के लिए विज्ञप्ति जारी की थी। हालांकि, कोरोना काल के दौरान केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) में देरी के कारण डीएलएड उत्तीर्ण कई अभ्यर्थी निर्धारित समय पर पात्रता पूरी नहीं कर सके।

2021 में जारी हुई थी 451 पदों की विज्ञप्ति

याचिका के अनुसार, इस विषय पर एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने ऐसे अभ्यर्थियों को विशेष छूट देने को कहा था। तत्कालीन शिक्षा सचिव ने 20 सितंबर 2021 को अदालत में लिखित आश्वासन दिया था कि पात्र अभ्यर्थियों को नियमानुसार छूट दी जाएगी। इसके बाद शिक्षा विभाग ने 451 अतिरिक्त पद चिह्नित किए और 11 अक्टूबर 2021 को इनके लिए विज्ञप्ति जारी की। हालांकि, इन पदों पर नियुक्तियां नहीं हो सकीं।

इस बीच, बीएड धारकों ने भी इन पदों के लिए आवेदन किया था। वर्ष 2022-23 में सुप्रीम कोर्ट ने देवेश शर्मा बनाम अन्य मामले में फैसला दिया कि बीएड धारक प्राथमिक सहायक अध्यापक पदों के लिए योग्य नहीं हैं। इसके बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।

अब हाईकोर्ट ने 451 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया जल्द शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इन आदेशों के बाद NIT कर्मचारियों के सेवा संबंधी मामले और प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती, दोनों पर संबंधित विभागों की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

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