मोहकमपुर-आशारोड़ी एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जन आक्रोश भड़क उठा है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी नई अधिसूचना के बाद स्थानीय निवासियों ने मोर्चा खोल दिया है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि परियोजना के मूल नक्शे में किए गए अनियोजित बदलावों के कारण हजारों आवासीय मकान, दुकानें और परिवार बेघर होने की कगार पर पहुंच गए हैं। इसी मुद्दे को लेकर प्रभावित लोगों ने विधानसभा के बाहर जोरदार प्रदर्शन करते हुए सरकार से योजना पर तत्काल पुनर्विचार करने की मांग उठाई है।
मोहकमपुर-आशारोड़ी एलिवेटेड रोड का नया अलाइनमेंट और गजट अधिसूचना
भारत सरकार के राजपत्र (गजट) संख्या-4205 और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग-07 (NH-07) के किमी 0 से किमी 12.7 तक इस परियोजना का निर्माण स्वीकृत हुआ है। इसमें मोहकमपुर से आशारोड़ी के बीच कुछ हिस्से में मोहकमपुर-आशारोड़ी एलिवेटेड रोड और शेष हिस्से पर हाईवे के चौड़ीकरण का प्रस्ताव है।
हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"
संघर्ष समिति के अनुसार, नए नक्शे में सड़क को मोहकमपुर से भारतीय रेलवे संस्थान (IRIPO) के पीछे से निकालते हुए रिस्पना नदी के पार अजाबपुर फ्लाईओवर तक ले जाने का प्लान है। इस रूट के कारण मोहकमपुर बस्ती, कंपनी बाग, योगीवाला फाटक, बीरपुर-पंजाबला, फ्रेंड्स एन्क्लेव, फ्रेंड्स कॉलोनी और रेलवे कॉलोनी जैसी घनी आबादी वाले क्षेत्र सीधे प्रभावित हो रहे हैं।
स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ
बिना पूर्व सूचना मकानों पर लगे लाल निशान, लोगों में बढ़ा डर
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्हें इस नई योजना की भनक तब लगी जब NHAI की टीमों ने बस्तियों में पहुंचकर घरों पर लाल निशान लगाने शुरू कर दिए। लोगों का गंभीर आरोप है कि:
- प्रभावित परिवारों को न तो कोई पूर्व नोटिस दिया गया और न ही समाचार पत्रों में कोई सूचना प्रकाशित की गई।
- जीवनभर की जमापूंजी लगाकर बनाए गए मकानों पर अचानक लाल निशान लगने से हजारों परिवारों के सामने बेघर होने का संकट मंडराने लगा है।
- प्रभावितों ने इसे संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत मिले जीवन और आवास के मौलिक अधिकार का सीधा उल्लंघन बताया है।
पुरानी योजना में फेरबदल का आरोप: क्यों भड़का जन-आक्रोश?
मोहकमपुर-आशारोड़ी एलिवेटेड रोड संघर्ष समिति ने खुलासा किया है कि पूर्व में एलिवेटेड रोड को NH-07 के मुख्य मार्ग के ऊपर से ही बनाने की योजना तैयार की गई थी। हालांकि, बाद में बिना जन-प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों को विश्वास में लिए अलाइनमेंट को रिहायशी कॉलोनियों की ओर मोड़ दिया गया।
समिति के पदाधिकारियों ने याद दिलाया कि वर्ष 2004-05 में भी इसी तरह सड़क निर्माण के लिए भवनों पर निशान लगाए गए थे, जिसे प्रचंड जन-विरोध के बाद सरकार को वापस लेना पड़ा था।
संघर्ष समिति की मुख्य मांगें और आगे की रणनीति
धरना-प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे समिति के मुख्य संयोजक सुशील कुमार, कोषाध्यक्ष प्रदीप कुमार भटनागर और सह-संयोजक मुकेश कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार मोहकमपुर-आशारोड़ी एलिवेटेड रोड के नए अलाइनमेंट पर पुनर्विचार नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रभावितों की प्रमुख मांगें:
- घनी आबादी वाली कॉलोनियों को छोड़कर एलिवेटेड रोड का निर्माण मुख्य हाईवे या रेलवे ट्रैक के समानांतर खाली भूमि पर किया जाए।
- भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया और चिह्नीकरण को तुरंत प्रभाव से रोका जाए।
- प्रभावित निवासियों के साथ उच्च स्तरीय वार्ता कर उनकी आपत्तियों का निस्तारण किया जाए।
इस प्रदर्शन में टीएस नेगी, धीरज सिंह रावत, पीके भटनागर, संतराम जायसवाल, ऊषा पडवाल, पूनम कुकरेती, राजेंद्र प्रसाद और अर्जुन सिंह सहित सैकड़ों प्रभावित परिवार मौजूद रहे।
ALSO READ THIS:Gopeshwar News: पत्नी की संदिग्ध मौत के गम में डूबा था परिवार, कमरे के अंदर गर्लफ्रेंड के साथ रंगे हाथों मिला पति






1 thought on “देहरादून में मोहकमपुर-आशारोड़ी एलिवेटेड रोड का भारी विरोध: योजना में बदलाव से उजड़ने की कगार पर आए हजारों आशियाने”