Dehradun Fake Call Center: 5 Major Revelations the Cyber ​​
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Dehradun Fake Call Center: 5 आरोपी गिरफ्तार, एंटीवायरस के नाम पर अमेरिकी-कनाडाई नागरिकों से ठगी

On: October 13, 2026 4:10 PM
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Dehradun Fake Call Center case involving five arrested accused, laptops, mobile phones and alleged antivirus-related gift card fraud.

Dehradun Fake Call Center: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में साइबर ठगी के एक मामले का पुलिस ने खुलासा किया है। यहां कथित तौर पर एक फर्जी कॉल सेंटर चलाकर विदेशी नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा था। आरोपी मोबाइल और लैपटॉप में एंटीवायरस ऐप इंस्टॉल करने के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठते थे। देहरादून पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मौके से कई मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं।

पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह खास तौर पर अमेरिका और कनाडा के नागरिकों को निशाना बनाता था। आरोपी अंग्रेजी नामों का इस्तेमाल करते थे और गूगल वॉइस ऐप के जरिए विदेशी नागरिकों से संपर्क करते थे। वे लोगों को डिवाइस में तकनीकी खराबी होने की बात कहकर डराते थे। इसके बाद समस्या ठीक करने और एंटीवायरस सेवा देने के नाम पर 100 डॉलर का गिफ्ट कार्ड खरीदने के लिए कहते थे।

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Dehradun Fake Call Center से जुड़े इस मामले में पुलिस अब आरोपियों के नेटवर्क, इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों और कथित ठगी से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

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देहरादून के फ्लैट में चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर

पुलिस के अनुसार, एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र डोबाल के नेतृत्व में थाना राजपुर पुलिस ने 12 अक्टूबर की देर रात कार्रवाई की। पुलिस ने तरला नागल रोड स्थित ऑर्चिड पार्क के एक फ्लैट में छापा मारा। जांच के दौरान वहां कथित फर्जी कॉल सेंटर संचालित होने की जानकारी सामने आई।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। मौके से 14 मोबाइल फोन, चार लैपटॉप, एक आईपैड और पांच चार्जर बरामद किए गए। इसके अलावा तीन लग्जरी वाहन भी मिले। इनमें आई-20, वरना और थार शामिल हैं। पुलिस ने इन तीनों वाहनों को सीज कर दिया है।

बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इनके जरिए कॉल करने, संपर्कों का विवरण जुटाने और कथित धोखाधड़ी के तरीके से जुड़े साक्ष्य मिल सकते हैं। हालांकि, जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने आने बाकी हैं।

एंटीवायरस ऐप के नाम पर ऐसे करते थे ठगी

पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य विदेशी नागरिकों को फोन करते थे। वे अंग्रेजी नामों का इस्तेमाल कर खुद को भरोसेमंद दिखाने की कोशिश करते थे। गूगल वॉइस ऐप के माध्यम से संपर्क करने के बाद वे लोगों को बताते थे कि उनके मोबाइल या लैपटॉप में कोई तकनीकी समस्या है।

इसके बाद आरोपी समस्या दूर करने और एंटीवायरस ऐप उपलब्ध कराने का दावा करते थे। इसके बदले वे पीड़ितों से 100 डॉलर मूल्य का गिफ्ट कार्ड खरीदने के लिए कहते थे। गिफ्ट कार्ड मिलने के बाद उसका नंबर या फोटो हासिल कर लिया जाता था।

पुलिस के अनुसार, कई मामलों में ग्राहकों को वादा किया गया एंटीवायरस ऐप उपलब्ध नहीं कराया जाता था। इसके बजाय गिफ्ट कार्ड को कम कीमत पर दूसरे विदेशी नागरिकों को बेच दिया जाता था। इस तरीके से आरोपी कथित तौर पर आर्थिक लाभ कमाते थे।

इस तरह Dehradun Fake Call Center में तकनीकी सहायता देने का बहाना बनाकर लोगों का भरोसा जीता जाता था। फिर गिफ्ट कार्ड के जरिए ठगी की जाती थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से कितने लोग प्रभावित हुए और कथित तौर पर कितनी रकम की धोखाधड़ी हुई।

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अमेरिका और कनाडा के नागरिक थे निशाने पर

पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, गिरोह के निशाने पर मुख्य रूप से अमेरिका और कनाडा के नागरिक थे। आरोपियों ने विदेशी लोगों से संपर्क करने के लिए बड़ी संख्या में मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया।

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने विदेशी नागरिकों के नाम से करीब पांच हजार मोबाइल नंबर खरीदे थे। इन नंबरों के जरिए लोगों को कॉल किया जाता था। हालांकि, इन सभी नंबरों से कितने लोगों को कॉल किया गया और कितने लोग ठगी का शिकार बने, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

गिरोह कथित तौर पर कुछ समय तक एक जगह से कॉल सेंटर चलाता था। इसके बाद वह स्थान बदल देता था। पुलिस के अनुसार, ऐसा करने का उद्देश्य पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों की नजर से बचना था।

बड़ी संख्या में मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल और बार-बार ठिकाना बदलना इस मामले को गंभीर बनाता है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि गिरोह का नेटवर्क केवल देहरादून तक सीमित था या इसके तार अन्य शहरों से भी जुड़े हुए हैं।

नोएडा के कॉल सेंटर से जुड़ा है मुख्य आरोपी का पुराना अनुभव

पुलिस पूछताछ में मुख्य आरोपी आशीष नागर ने बताया कि वह पहले नोएडा के एक कॉल सेंटर में काम करता था। उसके मुताबिक, वहां भी विदेशी नागरिकों के साथ इसी तरह की धोखाधड़ी की जाती थी।

पुलिस के अनुसार, आशीष ने करीब तीन महीने पहले नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद वह देहरादून आ गया और राजपुर क्षेत्र में एक फ्लैट किराये पर लिया। आरोप है कि यहीं उसने अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी कॉल सेंटर शुरू किया।

इस जानकारी के आधार पर पुलिस गिरोह के काम करने के तरीके और उसके पुराने संपर्कों की भी पड़ताल कर सकती है। हालांकि, नोएडा के कॉल सेंटर से जुड़े दावों और संभावित संबंधों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के निष्कर्षों के बाद ही होगी।

मेरठ और सुल्तानपुर के रहने वाले हैं पांचों आरोपी

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आशीष नागर, अक्षत शर्मा, अंशु मुद्गल, राज सिंह और अभिनव सिंह के रूप में की है। पुलिस के अनुसार, इनमें से चार आरोपी मेरठ के रहने वाले हैं, जबकि एक आरोपी उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर का निवासी है।

थाना राजपुर प्रभारी पीड़ी भट्ट के मुताबिक, पांचों आरोपियों के खिलाफ थाना राजपुर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 3(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को कब्जे में लेकर आगे की जांच शुरू कर दी है।

जांच के दौरान आरोपियों के डिजिटल रिकॉर्ड, संपर्कों और कथित लेनदेन से जुड़ी जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है। फिलहाल, मामले में पुलिस की जांच जारी है और आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।

विदेशी नागरिकों को ऑनलाइन ठगी से कैसे बचना चाहिए?

यह मामला ऑनलाइन तकनीकी सहायता के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के प्रति सतर्क रहने की जरूरत भी बताता है। किसी अनजान व्यक्ति के फोन करने पर उसकी बातों पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति डिवाइस में वायरस या तकनीकी खराबी होने का दावा करता है, तो संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित सहायता सेवा से संपर्क करना बेहतर है।

अनजान कॉल करने वालों के कहने पर गिफ्ट कार्ड खरीदना या उसका नंबर और फोटो साझा करना जोखिम भरा हो सकता है। वैध तकनीकी सहायता के नाम पर भुगतान मांगने वाले व्यक्ति की पहचान और सेवा की प्रामाणिकता की जांच करनी चाहिए।

देहरादून में सामने आए इस मामले में पुलिस की आगे की जांच से गिरोह के पूरे नेटवर्क और कथित ठगी के दायरे को लेकर और जानकारी मिलने की उम्मीद है। फिलहाल पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस बरामद उपकरणों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।

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