Nepal Flood: नेपाल में आई विनाशकारी अचानक बाढ़ ने पूरे हिमालयी क्षेत्र को गहरे संकट में डाल दिया है। रविवार, 30 अगस्त 2026 तक उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, Nepal Floods 2026 में मरने वालों की संख्या बढ़कर 724 हो गई है, जबकि करीब 2,500 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव अभियान का पांचवां दिन चल रहा है और प्रभावित इलाकों में मलबे के बीच लापता लोगों की तलाश लगातार जारी है। सभी आठ प्रभावित जिलों से शव बरामद किए जा चुके हैं।
आपदा के बाद नेपाल में 18 हजार से ज्यादा सुरक्षा कर्मियों को खोज, बचाव और राहत कार्यों में लगाया गया है। सेना, पुलिस और अन्य आपातकालीन टीमें नदी किनारे, मलबे से दबे इलाकों और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के आसपास लगातार अभियान चला रही हैं। इस बीच भोटे कोशी नदी का जलस्तर और बहाव फिर बढ़ने की चेतावनी ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है।
आठ जिलों में मिलीं मौत की बड़ी संख्या
Nepal Floods 2026 की तबाही का सबसे गंभीर असर आठ जिलों में दिखाई दे रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक चितवन में सबसे ज्यादा 246 शव बरामद किए गए हैं। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 165, नवलपरासी वेस्ट में 63, गोरखा में 57, नुवाकोट में 51, धाडिंग में 45, तनहुन में 35 और रसुवा में 13 शव मिले हैं।
गोरखा में बरामद किए गए अवशेषों में मानव शरीर के कई अंग भी शामिल बताए गए हैं। भारी मलबे, कीचड़ और लगातार बदलते मौसम के कारण राहत टीमों को शवों और लापता लोगों की पहचान में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है कि फोरेंसिक विशेषज्ञों की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
2,498 लोग अब भी लापता
सरकारी सूची के अनुसार करीब 2,498 लोग अभी भी लापता हैं। इस सूची में आम नागरिकों के अलावा हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी, विदेशी नागरिक और सुरक्षा एवं सरकारी कर्मी शामिल हैं।
इनमें हाइड्रोपावर परियोजनाओं से जुड़े 933 लोगों के लापता होने की जानकारी है, जबकि 589 विदेशी नागरिकों का अब तक पता नहीं चल पाया है। इसी कारण बचाव अभियान का एक बड़ा हिस्सा हाइड्रोपावर साइटों, सुरंगों और नदी घाटियों की तलाशी पर केंद्रित है। विशेषज्ञों का मानना है कि मलबे के नीचे फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए सामान्य बचाव तकनीकों के साथ विशेष उपकरणों की भी जरूरत है।
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नेपाल में फंसे भारतीयों की भी हो रही सुरक्षित वापसी
बाढ़ के बीच भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी और नेपाल को मानवीय सहायता देने के लिए अभियान तेज किया है। उपलब्ध ताजा जानकारी के मुताबिक 108 भारतीय नागरिकों को प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित निकाला जा चुका है और कई अन्य लोगों से संपर्क भी बहाल किया गया है।
केरल के 36 लोगों का एक समूह भी नेपाल से निकलकर भारत पहुंचा। इन लोगों ने नेपाल सीमा से करीब 100 किलोमीटर की यात्रा कर भारत में प्रवेश किया और फिर गोरखपुर एयरपोर्ट से अलग-अलग उड़ानों के जरिए अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए। इस तरह Nepal Floods 2026 के बीच भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी भी राहत अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।
भारत ने भेजी चौथी राहत उड़ान
नेपाल की मदद के लिए भारत ने रविवार को चौथी राहत उड़ान काठमांडू भेजी। भारतीय वायुसेना के C-130 विमान में 11 टन जरूरी राहत सामग्री के साथ विशेष तकनीकी और विशेषज्ञ टीमें भेजी गईं। इसमें सुरंगों में खोज और बचाव के लिए प्रशिक्षित दल तथा DNA जांच में मदद करने वाले फोरेंसिक विशेषज्ञ शामिल हैं।
राहत सामग्री में कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट जैसी जरूरी वस्तुएं शामिल हैं। भारत इससे पहले भी नेपाल को राहत सामग्री और तकनीकी सहायता भेज चुका है। चौथी उड़ान के साथ भारत की सहायता अब चिकित्सा और राहत सामग्री से आगे बढ़कर तकनीकी और फोरेंसिक सहयोग तक पहुंच गई है।
अमेरिका ने भी खोला राहत का खजाना
नेपाल में बिगड़ते मानवीय संकट को देखते हुए अमेरिका ने भी 3.6 मिलियन डॉलर से ज्यादा की जीवनरक्षक सहायता देने की घोषणा की है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार इस सहायता में बाढ़ प्रभावित करीब 10 हजार परिवारों के लिए तीन महीने तक की आपातकालीन खाद्य सहायता भी शामिल है। इसके साथ आश्रय, जरूरी राहत सामग्री तथा पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी मदद भी दी जाएगी।
अमेरिकी सरकार ने यह भी कहा है कि नेपाल और चीन में उसके दूतावास अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा और आपदा राहत से जुड़े प्रयासों में समन्वय कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि Nepal Floods 2026 का असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता का विषय बन चुका है।
गांवों में तबाही का मंजर, मलबे में अपनों की तलाश
बाढ़ के बाद कई इलाके पूरी तरह मलबे में बदल गए हैं। घर, दुकानें और सड़कें कीचड़ की मोटी परत के नीचे दब गई हैं। जिन लोगों की जान बच गई, वे अब अपने घरों से बची-खुची चीजें तलाश रहे हैं और साथ ही लापता परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पानी और मलबा इतनी तेजी से आया कि लोगों को अपनी जान बचाने के लिए कुछ ही पलों में सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा। कई परिवार अपने घर और जरूरी सामान पीछे छोड़ गए। अब राहत शिविरों और अस्थायी सुरक्षित स्थानों पर विस्थापित लोगों की संख्या बढ़ रही है।
हाइड्रोपावर और सोलर परियोजनाओं को बड़ा नुकसान
अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के ऊर्जा ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। कई हाइड्रोपावर परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं और त्रिशूली नदी के किनारे स्थित एक सोलर प्लांट का बड़ा हिस्सा मलबे में दबकर क्षतिग्रस्त हो गया है।
हाइड्रोपावर परियोजनाओं से जुड़े लोगों के बड़ी संख्या में लापता होने की वजह से बचाव अभियान में इन साइटों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन से जुड़ी क्षति के कारण आपदा के बाद सामान्य जनजीवन बहाल करना भी बड़ी चुनौती बन गया है।
भोटे कोशी का जलस्तर फिर बढ़ा, हाई अलर्ट
सबसे बड़ी चिंता अब यह है कि बाढ़ के बाद भी खतरा खत्म नहीं हुआ है। नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने भोटे कोशी नदी के बहाव और जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी को देखते हुए चेतावनी जारी की है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों और राहत टीमों को सतर्क रहने तथा ऊंचे स्थानों की ओर जाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जैसे प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। लगातार बदलती नदी की स्थिति राहत टीमों के लिए भी जोखिम बढ़ा रही है।
पांचवें दिन भी जारी है रेस्क्यू ऑपरेशन
Nepal Floods 2026 के पांचवें दिन भी बचाव अभियान पूरी गति से जारी है। हजारों सुरक्षाकर्मी, स्थानीय प्रशासन और विशेषज्ञ दल लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। खराब मौसम और क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण कई जगह पहुंचना मुश्किल है, लेकिन राहत दल नदी किनारे और मलबे वाले क्षेत्रों की छानबीन कर रहे हैं।
फोरेंसिक विशेषज्ञों की तैनाती का एक बड़ा उद्देश्य बरामद शवों की पहचान करना भी है, ताकि परिजनों को अपने लापता लोगों के बारे में निश्चित जानकारी मिल सके। भारत समेत कई देशों की मदद से अब राहत अभियान को अतिरिक्त तकनीकी क्षमता भी मिल रही है।
तबाही के बाद नेपाल के सामने बड़ी चुनौती
नेपाल में आई यह आपदा केवल जान-माल के नुकसान तक सीमित नहीं है। सड़क, पुल, ऊर्जा परियोजनाओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़े असर से आने वाले समय में पुनर्निर्माण की चुनौती भी बड़ी होगी। विशेषज्ञों और राहत एजेंसियों के सामने फिलहाल पहली प्राथमिकता जीवित लोगों को सुरक्षित निकालना, लापता लोगों की तलाश करना और प्रभावित परिवारों तक जरूरी सहायता पहुंचाना है।
Nepal Floods 2026 के बीच लगातार बढ़ता जलस्तर एक और चुनौती बनकर सामने आया है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन राहत और बचाव अभियान के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। 724 मौतों और करीब 2,500 लोगों के लापता होने की इस त्रासदी के बीच नेपाल और उसके सहयोगी देश अब राहत, खोज और पुनर्वास के लिए व्यापक प्रयास कर रहे हैं।










