Former Deputy Speaker Ashish Banerjee के आकस्मिक और दर्दनाक निधन की खबर ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है। बीरभूम जिले के रामपुरहाट स्थित तृणमूल कांग्रेस (TMC) पार्टी कार्यालय में रविवार सुबह राज्य विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष और वरिष्ठ नेता आशीष बनर्जी का शव फंदे से लटकता हुआ पाया गया। 75 वर्षीय कद्दावर नेता के इस अप्रत्याशित कदम से न केवल बीरभूम बल्कि पूरे राज्य के सियासी हलकों में सन्नाटा पसर गया है। मौके पर पहुंची पुलिस को शव के पास से एक पन्ने का सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसने राजनीतिक गलियारों में गहरी बहस छेड़ दी है।
पुलिस प्रशासन ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और सुसाइड नोट को फॉरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित रख लिया है।
रामपुरहाट TMC कार्यालय में घटना: Former Deputy Speaker Ashish Banerjee की मौत से सनसनी
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और पार्टी कार्यकर्ताओं के मुताबिक, रविवार की सुबह जब पार्टी कार्यालय के दरवाजे खोले गए, तो अंदर का दृश्य देखकर सभी सन्न रह गए। आशीष बनर्जी का पार्थिव शरीर उनके आवास के करीब स्थित पार्टी कार्यालय के एक कमरे में फंदे से झूल रहा था। घटना की सूचना बिजली की गति से इलाके में फैली और देखते ही देखते दफ्तर के बाहर हजारों समर्थकों और स्थानीय लोगों की भीड़ जुट गई।
सूचना मिलते ही रामपुरहाट थाना पुलिस और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर साक्ष्य जुटाए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है, लेकिन मौत के सटीक कारणों और समय की पुष्टि विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही की जाएगी।
सुसाइड नोट में गहरा दर्द: राजनीति में प्रवेश को बताया जिंदगी की सबसे बड़ी भूल
जांच के दौरान पुलिस को मृतक के पास से एक बेहद भावुक सुसाइड नोट मिला है। अपने अंतिम पत्र में पूर्व मंत्री ने लिखा कि उनकी मौत के लिए सीधे तौर पर कोई भी व्यक्ति जिम्मेदार नहीं है। हालांकि, पत्र की अगली पंक्तियों ने सभी को स्तब्ध कर दिया। उन्होंने लिखा कि आज जीवन के इस पड़ाव पर उन्हें गहराई से यह अहसास हो रहा है कि राजनीति में कदम रखना ही उनके जीवन की सबसे बड़ी भूल साबित हुई।
पेशे से शिक्षक रहे आशीष बनर्जी ने अपने बेदाग और स्वच्छ राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए लिखा कि उन्होंने पूरी जिंदगी कभी किसी से अनुचित तरीके से एक पैसा नहीं लिया। वे ताउम्र विद्यार्थियों को बिना किसी शुल्क के पढ़ाते रहे और शिक्षा को कभी व्यापार नहीं बनने दिया।
TRDA विवाद और अपमान का आरोप: Former Deputy Speaker Ashish Banerjee ने बयां की उपेक्षा
सुसाइड नोट में स्थानीय राजनीतिक खींचतान और प्रशासनिक उपेक्षा का भी स्पष्ट संकेत मिलता है। उन्होंने तारापीठ रामपुरहाट डेवलपमेंट अथॉरिटी (TRDA) में खुद को किनारे किए जाने और अपनी बेदाग छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए रची जा रही साजिशों का जिक्र किया।
उन्होंने भारी मन से लिखा कि वे जीवन भर किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार से कोसों दूर रहे, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पार्टी और व्यवस्था के भीतर लगातार उपेक्षा और मानसिक अपमान झेलना पड़ा। अपनी इस गहरी हताशा और आत्मग्लानि को व्यक्त करते हुए उन्होंने परिवार के सदस्यों और आने वाली पीढ़ियों को स्पष्ट सलाह दी कि वे भविष्य में कभी भी राजनीति की दुनिया में कदम न रखें।
पांच बार विधायक रहे Former Deputy Speaker Ashish Banerjee का राजनीतिक सफर
आशीष बनर्जी का बीरभूम और पश्चिम बंगाल की राजनीति में दशकों पुराना और बेहद मजबूत दखल रहा है। वे इलाके में एक बेहद सम्मानित, सहज और सुलभ राजनेता के तौर पर पहचाने जाते थे:
- लगातार पांच बार जीत का रिकॉर्ड: उन्होंने वर्ष 2001 से 2026 तक लगातार 25 वर्षों तक रामपुरहाट विधानसभा क्षेत्र का मजबूती से प्रतिनिधित्व किया।
- मंत्रिमंडल में अहम जिम्मेदारियां: ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार के पहले कार्यकाल में उन्होंने राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री और बाद में कृषि मंत्री जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला।
- विधानसभा उपाध्यक्ष की भूमिका: अपने लंबे विधायी अनुभव, शांत स्वभाव और संसदीय ज्ञान के चलते उन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा के डिप्टी स्पीकर पद की महत्वपूर्ण संवैधानिक जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी।
- हालिया चुनावी झटका: 2001 से अजेय रहे इस वरिष्ठ नेता को हालिया विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी ध्रुव साहा के हाथों कड़े मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था।
सत्ता समीकरण और राजनीतिक अलग-थलगता पर उठे सवाल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी हार के बाद बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में वे खुद को बेहद अकेला और अलग-थलग महसूस कर रहे थे। पिछले कुछ समय से स्थानीय संगठन में हो रहे बदलावों और नए समीकरणों के चलते पुराने और समर्पित नेताओं की अनदेखी की बातें सामने आ रही थीं। ऐसे माहौल में एक समर्पित नेता का इस तरह दुनिया छोड़ जाना कई गंभीर प्रशासनिक और संगठनात्मक सवाल खड़े करता है।
पुलिस जांच और फॉरेंसिक विश्लेषण
रामपुरहाट पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्टि की है कि बरामद सुसाइड नोट की लिखावट और उसमें इस्तेमाल स्याही की फॉरेंसिक लैब में गहन जांच कराई जा रही है, ताकि इसकी प्रामाणिकता सुनिश्चित की जा सके। पुलिस पार्टी कार्यकर्ताओं और उनके करीबी परिजनों से भी पूछताछ कर रही है ताकि घटना से ठीक पहले की मानसिक स्थिति और परिस्थितियों को समझा जा सके।
पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने Former Deputy Speaker Ashish Banerjee के इस दुखद अंत पर गहरा शोक प्रकट किया है और इसे बंगाल की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।










