तिरुवनंतपुरम:
दक्षिण भारतीय राज्य केरल में एक बार फिर कुदरत का कहर देखने को मिल रहा है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं से राज्य में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। बारिश से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में अब तक 15 लोगों की दुखद मौत हो चुकी है, जबकि 7 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
राज्य प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), आईटीबीपी (ITBP) और रक्षा बलों को मैदान में उतार दिया है।
सोमवार को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, मंत्रियों और जिला कलेक्टरों के साथ हुई आपातकालीन समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने आपदा की स्थिति की विस्तृत जानकारी मीडिया के साथ साझा की।
मौतों का आंकड़ा और प्रभावित जिले
मौसम के इस रौद्र रूप के कारण राज्य के विभिन्न हिस्सों से जान-माल के नुकसान की खबरें सामने आ रही हैं। मुख्यमंत्री द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मौतों का जिलावार विवरण इस प्रकार है:
• मलप्पुरम: सर्वाधिक 4 लोगों की मौत।
• कोट्टायम: 3 लोगों की जान गई (जिसमें पूंजर विधानसभा क्षेत्र के 2 लोग और पानी की टंकी में डूबने से एक बच्चे की मृत्यु शामिल है)।
• एर्नाकुलम और कोल्लम: 2-2 लोगों की मृत्यु।
• कन्नूर, कोझिकोड, इडुक्की और मुवात्तुपुझा: 1-1 व्यक्ति की मौत।
इसके अलावा, लापता 7 लोगों की तलाश लगातार जारी है। लापता लोगों में कोल्लम और कन्नूर से 2-2 नागरिक, जबकि मलप्पुरम, इडुक्की और मुवात्तुपुझा से 1-1 व्यक्ति शामिल हैं।
300 से अधिक राहत शिविर स्थापित, 11 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित
बाढ़ प्रभावित इलाकों से सुरक्षित निकाले गए लोगों के लिए राज्य सरकार ने पूरे केरल में बड़े पैमाने पर राहत शिविर शुरू किए हैं। सोमवार सुबह तक की रिपोर्ट के अनुसार:
• कुल सक्रिय राहत शिविर: 316
• आश्रय लेने वाले लोग: 11,018 से अधिक
पीड़ित परिवारों की सहायता के लिए मुख्यमंत्री ने मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए तत्काल 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
3 हजार से अधिक किसान प्रभावित, फसलों को भारी नुकसान
मानसून की इस तबाही ने केरल के कृषि क्षेत्र को भी गहरा जख्म दिया है। प्राथमिक सर्वेक्षण के अनुसार, अब तक लगभग 165 हेक्टेयर कृषि भूमि पूरी तरह जलमग्न या बर्बाद हो चुकी है, जिससे 3,596 किसान सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।
हालात को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री सतीशन ने कृषि विभाग को निर्देश दिया है कि वे हुए नुकसान का विस्तृत आकलन करें और मुआवजा राशि में संशोधन का एक नया प्रस्ताव जल्द से जल्द सरकार के समक्ष पेश करें।
NDRF, सेना और हेलीकॉप्टर तैनात
राहत और बचाव कार्यों को युद्ध स्तर पर चलाने के लिए सुरक्षा बलों की कई टुकड़ियों को संवेदनशील जिलों में तैनात कर दिया गया है:
• NDRF की तैनाती: पथानामथिट्टा में 1 टीम और कोट्टायम में 2 टीमें पहले से मोर्चा संभाले हुए हैं। तमिलनाडु के अराक्कोनम से 2 और अतिरिक्त NDRF टीमें बुलाई गई हैं।
• सेना व सुरक्षा बल: संकट की स्थिति को देखते हुए अलाप्पुझा में ITBP के जवानों को तैयार रहने को कहा गया है, जबकि कन्नूर और वायनाड में डिफेंस सिक्योरिटी कॉर्प्स (DSC) के जवानों को अलर्ट पर रखा गया है।
• हवाई मदद: आपात स्थिति में हवाई सर्वेक्षण और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए सेना के हेलीकॉप्टर भी तैनात कर दिए गए हैं।
मौसम विभाग की नई चेतावनी: समुद्र में न जाने की सलाह
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने केरल के लिए नया अलर्ट जारी करते हुए बताया है कि 3 और 6 अगस्त को राज्य के अधिकांश हिस्सों में फिर से भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने की आशंका है।
तटीय इलाकों के लिए प्रमुख चेतावनी:
▪ मछुआरों को चेतावनी: केरल, कर्नाटक और लक्षद्वीप के तटीय क्षेत्रों में समुद्र में स्थिति अत्यंत खराब रहने की संभावना है, इसलिए मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है।
▪ ऊंची लहरों का अलर्ट: इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशियन इंफॉर्मेशन सर्विसेज (INCOIS) ने उत्तरी केरल तट पर 2.7 से 3.5 मीटर तक ऊंची समुद्री लहरें उठने की चेतावनी जारी की है।
प्रशासन ने तटीय और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सरकारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और सभी जिलों के कलेक्टर चौबीसों घंटे हालात पर नजर बनाए हुए हैं।