Haridwar Kanwar Mela: हरिद्वार में आयोजित कांवड़ मेले के दौरान इस बार सिर्फ श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा पर ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हर साल करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन से नगर निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती कूड़ा प्रबंधन की होती है। विशेष रूप से गंगा स्नान के बाद घाटों पर छोड़े गए पुराने कपड़े, पॉलीथीन और अन्य ठोस कचरे का निस्तारण एक गंभीर समस्या बन जाता है। इस बार हरिद्वार नगर निगम ने इस चुनौती को अवसर में बदलने का प्रयास किया है।
नगर निगम ने Plastic Exchange और पुराने वस्त्रों के वैज्ञानिक संग्रहण की अनूठी पहल शुरू की है। इस अभियान के तहत श्रद्धालुओं द्वारा छोड़े गए कपड़ों को अब कचरे में फेंकने के बजाय एकत्र कर उनका पुनर्चक्रण (Recycling) किया जाएगा। वहीं, सिंगल यूज प्लास्टिक के बदले श्रद्धालुओं को निशुल्क कम्पोस्टेबल बैग उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि हरिद्वार को स्वच्छ और प्लास्टिक मुक्त बनाया जा सके।
Kanwar Mela में बढ़ता कचरा बना बड़ी चुनौती
कांवड़ मेले के दौरान हरिद्वार में लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन पहुंचते हैं। इस दौरान नगर निगम क्षेत्र से निकलने वाले कचरे की मात्रा सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है।
नगर निगम के अनुसार सामान्य दिनों में हरिद्वार शहर से प्रतिदिन करीब 200 टन कूड़ा निकलता है, जबकि कांवड़ मेले के दौरान यह मात्रा लगभग दोगुनी हो जाती है। ऐसे में केवल सफाई करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन भी आवश्यक हो जाता है।
इसी आवश्यकता को देखते हुए नगर निगम ने पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था लागू की है, जिसमें पुराने कपड़ों और प्लास्टिक कचरे का अलग-अलग संग्रहण किया जा रहा है।
Plastic Exchange अभियान से कम होगा प्लास्टिक प्रदूषण
इस वर्ष Plastic Exchange अभियान कांवड़ मेले का सबसे चर्चित प्रयास बनकर सामने आया है। इसके तहत श्रद्धालुओं से प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलीथीन एकत्र की जा रही है। बदले में उन्हें पर्यावरण अनुकूल कम्पोस्टेबल बैग निशुल्क दिए जा रहे हैं।
नगर निगम की टीमें घाटों और प्रमुख मार्गों पर लोगों को प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी भी दे रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि केवल जुर्माना लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि लोगों की सोच बदलना ज्यादा जरूरी है।
पुराने कपड़ों से तैयार होगा Recycled Cotton Fiber
घाटों पर लगाए गए विशेष संग्रह केंद्र
हरकी पैड़ी, मालवीय घाट, सुभाष घाट, विष्णु घाट, नाई घाट और सीसीआर घाट सहित प्रमुख स्थानों पर पुराने वस्त्रों के लिए विशेष डस्टबिन लगाए गए हैं।
यहां तैनात प्रशिक्षित कर्मचारी श्रद्धालुओं द्वारा छोड़े गए कपड़ों को अलग-अलग एकत्र कर सराय स्थित Material Recovery Facility (MRF) सेंटर भेज रहे हैं। वहां इन वस्त्रों का वजन दर्ज किया जाता है और सुरक्षित रखा जाता है।
कांवड़ मेला समाप्त होने के बाद इन कपड़ों का पुनर्चक्रण कर Recycled Cotton Fiber तैयार किया जाएगा, जिसका उपयोग विभिन्न औद्योगिक और वस्त्र उत्पादों में किया जा सकेगा। इससे न केवल कचरा कम होगा बल्कि संसाधनों का दोबारा उपयोग भी संभव हो सकेगा।
Swachh Doot कर रहे हैं जागरूक
नगर निगम ने घाटों पर Swachh Doot भी तैनात किए हैं। ये कर्मचारी मेगाफोन के माध्यम से श्रद्धालुओं से लगातार अपील कर रहे हैं कि वे कूड़ा केवल डस्टबिन में डालें, गंगा में प्लास्टिक या अन्य अपशिष्ट न फेंकें और सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग से बचें।
सहायक नगर आयुक्त दीपक गोस्वामी ने बताया कि इस बार प्रशासन का मुख्य उद्देश्य दंडात्मक कार्रवाई के बजाय लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। यदि श्रद्धालु स्वयं सहयोग करेंगे तो हरिद्वार को स्वच्छ बनाए रखना कहीं अधिक आसान होगा।
श्रद्धालु भी कर रहे हैं नई पहल की सराहना
कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालु भी इस अभियान की प्रशंसा कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि सभी लोग थोड़ी जिम्मेदारी निभाएं तो गंगा घाटों पर गंदगी काफी हद तक कम की जा सकती है।
श्रद्धालुओं का मानना है कि पुराने कपड़ों को कचरे में फेंकने के बजाय उनका पुनर्चक्रण किया जाना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। साथ ही Plastic Exchange अभियान लोगों को प्लास्टिक के विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
प्रतिबंधित पॉलीथीन पर लगातार कार्रवाई
नगर निगम केवल जागरूकता अभियान ही नहीं चला रहा बल्कि प्रतिबंधित प्लास्टिक के खिलाफ कार्रवाई भी जारी है।
हाल ही में हरकी पैड़ी के पास स्थित एक गोदाम से करीब 50 किलो प्रतिबंधित पॉलीथीन जब्त की गई। इससे पहले भी एक अन्य गोदाम से लगभग 5 हजार किलो सिंगल यूज प्लास्टिक बरामद की गई थी, जिस पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
प्रशासन का कहना है कि प्लास्टिक प्रदूषण रोकने के लिए जागरूकता और कानूनी कार्रवाई दोनों साथ-साथ जारी रहेंगी।
स्वच्छ हरिद्वार बनाने की दिशा में बड़ा कदम
नगर आयुक्त नंदन कुमार के अनुसार हर वर्ष गंगा घाटों पर बड़ी मात्रा में छोड़े गए कपड़ों के निस्तारण की समस्या सामने आती है। नई व्यवस्था से घाटों की स्वच्छता बनाए रखने में मदद मिलेगी और पुनर्चक्रण के माध्यम से पर्यावरण को भी लाभ पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि यह अभियान केवल कांवड़ मेले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में भी जारी रखने की योजना है। नगर निगम का उद्देश्य हरिद्वार को स्वच्छ, प्लास्टिक मुक्त और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार धार्मिक नगरी के रूप में विकसित करना है।