NEET पेपर लीक: 26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन, केंद्र से मिलीं 3 प्रमुख मांगों पर लिखित सहमति

नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट

​NEET-UG परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक के खिलाफ महीनों से सड़कों पर उतरे युवाओं और छात्रों की आवाज को एक नया मोड़ मिल गया है। प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने पिछले 26 दिनों से जारी अपना आमरण अनशन आधिकारिक तौर पर समाप्त करने की घोषणा कर दी है।

केंद्र सरकार की ओर से छात्रों के हित में तीन सबसे महत्वपूर्ण मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना अनशन वापस लिया है।

​सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक वीडियो संदेश जारी कर देशवासियों और प्रदर्शनकारी छात्रों को इस निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की तरफ से सकारात्मक रुख और केंद्रीय मंत्रियों की बातचीत के बाद ही यह सहमति बनी है।

​केंद्रीय मंत्रियों संग बैठक के बाद बनी सहमति

​वांगचुक ने अपने वीडियो संदेश में बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ उच्चस्तरीय बातचीत के बाद यह महत्वपूर्ण मोड़ आया। उन्होंने बताया कि सरकार ने छात्रों की मांगों की गंभीरता को समझा है और तीन प्रमुख बिंदुओं पर लिखित में आश्वासन दिया है।

​सोनम वांगचुक ने कहा, “हमारा मुख्य उद्देश्य छात्रों के भविष्य की सुरक्षा करना और उन्हें न्याय दिलाना था। जब सरकार ने हमारी प्राथमिक मांगों को लिखित रूप में स्वीकार कर लिया है, तो आंदोलन के इस चरण को विराम देना ही उचित निर्णय है।”

​वे 3 प्रमुख मांगें, जिन पर सरकार ने दी लिखित सहमति

​आंदोलन के दौरान सोनम वांगचुक और प्रदर्शनकारी छात्रों की कई मांगें थीं, लेकिन केंद्र सरकार ने इनमें से 3 अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण मांगों पर अपनी मुहर लगाई है:

​1. प्रदर्शनकारी छात्रों पर नहीं होगी कोई कानूनी कार्रवाई

​NEET पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे युवाओं और 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च में भाग लेने वाले छात्रों के ऊपर से कानूनी कार्रवाई की तलवार हट गई है।

• ​लिखित आश्वासन: सरकार ने स्पष्ट किया है कि विरोध प्रदर्शन में शामिल किसी भी छात्र या युवा के खिलाफ कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी और न ही कोई अन्य दंडात्मक कदम उठाया जाएगा। इससे आंदोलनरत छात्रों को बड़ी राहत मिली है।

​2. मृत छात्रों के परिजनों को मिलेगा उचित मुआवजा

​पेपर लीक और परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के कारण उपजे मानसिक तनाव और अवसाद की वजह से देश के विभिन्न हिस्सों में 20 से अधिक छात्रों की जान जाने की दुखद घटनाएं सामने आई थीं।

• ​लिखित आश्वासन: वांगचुक के दबाव के बाद सरकार इस बात पर सहमत हुई है कि इन पीड़ित परिवारों को सरकार की ओर से उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाएगा, ताकि प्रभावित परिवारों को सहारा मिल सके।

​3. संसद में शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पर होगी विशेष चर्चा

​भविष्य में इस प्रकार की धांधली और पेपर लीक की घटनाओं पर पूर्ण विराम लगाने के लिए व्यापक सुधारों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

• ​लिखित आश्वासन: केंद्र सरकार ने वादा किया है कि आगामी संसद सत्र के दौरान देश की शिक्षा प्रणाली, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) जैसी परीक्षा संस्थाओं और उनकी जवाबदेही पर विस्तृत चर्चा कराई जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करना है।

​शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर नहीं बनी सहमति

​हालांकि, वांगचुक ने यह भी साफ किया कि आंदोलनकारियों द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी रखी गई थी, जिस पर सरकार की ओर से कोई आश्वासन या सहमति नहीं मिली है।

​इस पर अपनी राय रखते हुए सोनम वांगचुक ने कहा, “शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर भले ही सहमति न बनी हो, लेकिन हमारे लिए वे 3 मांगें सबसे ज्यादा जरूरी थीं जो सीधे तौर पर देश के लाखों छात्रों के भविष्य, सुरक्षा और उनके परिवारों के न्याय से जुड़ी थीं। जब उन मुख्य मांगों पर लिखित मुहर लग गई, तो हमने अनशन समाप्त करना ही सही समझा।”

​क्या है NEET पेपर लीक मामला और आगे की राह?

​NEET परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक ने देशभर के लाखों अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों के विश्वास को झकझोर कर रख दिया था। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र लगातार सड़कों पर उतरकर जवाबदेही की मांग कर रहे थे। सोनम वांगचुक के इस अनशन से छात्रों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत आधार मिला।

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​अब जबकि सरकार ने संसद में चर्चा और छात्रों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने का लिखित वादा किया है, तो उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में देश की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में बड़े और पारदर्शी बदलाव देखने को मिलेंगे।

यह कदम न सिर्फ छात्रों के आक्रोश को शांत करने में सहायक होगा, बल्कि भारत की प्रशासनिक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार का एक नया मार्ग भी प्रशस्त करेगा।

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