Metro Viral Video: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक Metro Viral Video तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। इस वीडियो में एक महिला मेट्रो ट्रेन में सफर के दौरान अंग्रेजी उपन्यास “How to Kill Men and Get Away With It” पढ़ती हुई नजर आती है। किताब का शीर्षक इतना चौंकाने वाला है कि वीडियो कुछ ही समय में इंटरनेट पर लाखों लोगों तक पहुंच गया। अब तक इस वीडियो को करीब 1.9 करोड़ (19 मिलियन) से अधिक बार देखा जा चुका है, जबकि लाखों यूजर्स इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं।
हालांकि, इस वीडियो की सबसे बड़ी वजह महिला नहीं बल्कि उसके हाथ में मौजूद किताब का नाम बना, जिसने सोशल मीडिया पर बहस और मीम्स दोनों को जन्म दे दिया।
वीडियो वायरल होते ही शुरू हुई चर्चा
वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स ने अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया। कई लोगों ने इसे केवल एक मजाकिया संयोग बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे गंभीर नजरिए से देखने की कोशिश की।
इंटरनेट पर वायरल इस क्लिप में महिला पूरी तन्मयता के साथ किताब पढ़ रही है। आसपास मौजूद यात्रियों का ध्यान शायद उस पर नहीं था, लेकिन वीडियो रिकॉर्ड करने वाले व्यक्ति ने किताब के कवर को कैमरे में कैद कर लिया। इसके बाद यह वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया।
पुणे के चर्चित केस से जोड़ने लगे लोग
इस Metro Viral Video के सामने आने का समय भी चर्चा का विषय बन गया। हाल के दिनों में पुणे में सामने आए चर्चित सिया गोयल और केतन अग्रवाल मामले की वजह से सोशल मीडिया पर पहले से ही कई तरह की बहस चल रही थी।
ऐसे में कुछ यूजर्स ने बिना किसी तथ्य के इस वायरल वीडियो को उस घटना से जोड़ना शुरू कर दिया। हालांकि, इस तरह की तुलना का कोई प्रमाण या आधार मौजूद नहीं है। केवल किताब का शीर्षक देखकर किसी व्यक्ति की सोच या इरादों का अनुमान लगाना उचित नहीं माना जा सकता।
सोशल मीडिया पर आई मजेदार प्रतिक्रियाएं
वीडियो पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने मजाकिया अंदाज में कमेंट किए, जबकि कुछ ने इसे देखकर हैरानी जताई।
एक यूजर ने लिखा, ‘किसी किताब को उसके कवर से मत आंकिए… लेकिन इस किताब को शायद उसके कवर से ही आंकना पड़े।’ दूसरे यूजर ने लिखा, ‘आजकल मेट्रो में भी लोग डराने लगे हैं।’ एक अन्य ने मजाक करते हुए लिखा, ‘दोस्तों, अब सफर के दौरान आसपास कौन क्या पढ़ रहा है, इस पर भी ध्यान रखना पड़ेगा।’
वहीं कुछ लोगों ने समझदारी दिखाते हुए कहा कि किसी फिक्शन उपन्यास को वास्तविक जीवन से जोड़ना गलत है।
आखिर कौन सी है यह किताब?
जिस किताब को लेकर इतना शोर मचा हुआ है, वह ब्रिटिश लेखिका Katy Brent का चर्चित उपन्यास “How to Kill Men and Get Away With It” है।
यह कोई वास्तविक अपराध की गाइडबुक नहीं, बल्कि एक फिक्शन (काल्पनिक) साइकोलॉजिकल थ्रिलर है। इसमें डार्क कॉमेडी, सस्पेंस, अपराध और व्यंग्य का मिश्रण देखने को मिलता है।
यह किताब अपने अनोखे शीर्षक और रोचक कहानी की वजह से दुनिया के कई देशों में लोकप्रिय हो चुकी है। कई बुक रिव्यू प्लेटफॉर्म्स पर भी इसे अच्छी रेटिंग मिली है।
किताब का शीर्षक क्यों बना चर्चा की वजह?
असल में इस उपन्यास का नाम ही इसकी सबसे बड़ी मार्केटिंग रणनीति माना जाता है। शीर्षक पढ़ते ही लोगों की जिज्ञासा बढ़ जाती है और वे इसके बारे में जानना चाहते हैं।
यही वजह रही कि जब यह किताब मेट्रो में पढ़ते हुए एक महिला दिखाई दी, तो वीडियो वायरल होने में ज्यादा समय नहीं लगा। सोशल मीडिया के दौर में किसी भी असामान्य दृश्य को लोग तेजी से शेयर करते हैं और यही इस वीडियो के साथ भी हुआ।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
साहित्य और मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी उपन्यास का शीर्षक हमेशा उसके वास्तविक संदेश को पूरी तरह नहीं दर्शाता। फिक्शन साहित्य का उद्देश्य कल्पना, मनोरंजन और सामाजिक विषयों को अलग-अलग दृष्टिकोण से प्रस्तुत करना होता है। ऐसे में केवल किसी किताब का नाम देखकर उसके पाठक के व्यक्तित्व या सोच का आकलन करना सही नहीं है। विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि सोशल मीडिया पर किसी भी वीडियो को संदर्भ से हटाकर देखने से गलत धारणाएं बन सकती हैं।
सोशल मीडिया पर बढ़ रहा है वायरल कंटेंट का असर
आज के समय में कुछ सेकंड का वीडियो भी करोड़ों लोगों तक पहुंच सकता है। Metro Viral Video इसका ताजा उदाहरण है। कभी किसी का डांस, कभी किसी का पहनावा और कभी किसी के हाथ में मौजूद किताब इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन जाती है। हालांकि, ऐसे मामलों में यह जरूरी है कि लोग वायरल कंटेंट को मनोरंजन और वास्तविकता के बीच का अंतर समझते हुए देखें।
फिक्शन और वास्तविकता में अंतर समझना जरूरी
यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि हर किताब, फिल्म या कहानी को वास्तविक जीवन से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। How to Kill Men and Get Away With It एक काल्पनिक उपन्यास है, जिसका उद्देश्य केवल मनोरंजन करना है। सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भले ही इस किताब को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हों, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसे पढ़ने वाला व्यक्ति उस कहानी से सहमत हो या वास्तविक जीवन में वैसी सोच रखता हो।










