देहरादून, राष्ट्रीय ब्यूरो।
भारत के खेल इतिहास में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज (शूटर) जसपाल राणा के निधन से खेल जगत और राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है। दिवंगत जसपाल राणा के त्रयोदशी संस्कार और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन आज यानी बुधवार को देहरादून में किया जा रहा है। इस दुखद घड़ी में दिवंगत आत्मा को नमन करने और शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाने के लिए देश की कई बड़ी राजनीतिक हस्तियां उत्तराखंड पहुंच रही हैं।
इस क्रम में देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज देहरादून पहुंचेंगे, जहां वे श्रद्धांजलि सभा में सम्मिलित होकर दिवंगत खिलाड़ी को अपने श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे। वहीं, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक भी देहरादून पहुंचकर परिवार से मुलाकात कर चुके हैं।
मझौन ग्राम शूटिंग रेंज में जुटेंगे गणमान्य लोग
पारिवारिक सूत्रों और प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, जसपाल राणा का त्रयोदशी संस्कार देहरादून के मझौन ग्राम स्थित उनके निजी शूटिंग रेंज स्थल पर आयोजित किया जा रहा है। यही वह मैदान है जहां जसपाल राणा ने खुद अपनी प्रतिभा को निखारा था और देश के कई युवा निशानेबाजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार किया था। आज इसी स्थल पर एक भव्य और भावुक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
- निधन तिथि: 12 जून, दिल्ली के एक अस्पताल में हुआ था निधन।
- मुख्य अतिथि: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (आज बुधवार को आगमन)।
- विशिष्ट अतिथि: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक (मुलाकात संपन्न)।
- कार्यक्रम स्थल: मझौन ग्राम स्थित शूटिंग रेंज, देहरादून (उत्तराखंड)।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कार्यक्रम
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज बुधवार को विशेष विमान से देहरादून पहुंचेंगे। प्रशासनिक स्तर पर उनके आगमन को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। रक्षा मंत्री सीधे मझौन ग्राम स्थित कार्यक्रम स्थल पर जाएंगे, जहां वे दिवंगत निशानेबाज के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे।
राजनाथ सिंह का जसपाल राणा के परिवार से पुराना और गहरा संबंध रहा है। वे न केवल एक राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी को खोने पर देश की ओर से शोक प्रकट करेंगे, बल्कि परिवार के सदस्यों से मिलकर अपनी संवेदनाएं भी व्यक्त करेंगे। रक्षा मंत्री के दौरे को देखते हुए देहरादून और कार्यक्रम स्थल के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
यूपी के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने साझा किया दुख
इससे पहले, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक भी दिवंगत जसपाल राणा के आवास पर पहुंचे। उन्होंने वहां आयोजित श्रद्धांजलि सभा में शिरकत की और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने जसपाल राणा के पिता और दिग्गज राजनेता नारायण सिंह राणा से मुलाकात की। नारायण सिंह राणा उत्तराखंड सरकार में पूर्व मंत्री रह चुके हैं और राज्य की राजनीति में एक सम्मानित नाम हैं। बृजेश पाठक ने नारायण सिंह राणा का हाथ थामकर उन्हें ढांढस बंधाया और कहा कि जसपाल राणा का इस तरह असमय चले जाना पूरे देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती।
12 जून को दिल्ली में हुआ था निधन
बता दें कि बीते 12 जून को देश को गौरवान्वित करने वाले इस महान खिलाड़ी ने दिल्ली के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली थी। उनके निधन की खबर आते ही देश के खेल प्रशंसकों और खेल बिरादरी में मायूसी छा गई थी। जसपाल राणा पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके निधन के बाद से ही उनके देहरादून स्थित आवास पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा हुआ है।
खेल जगत में जसपाल राणा का स्वर्णिम योगदान
जसपाल राणा भारत के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में से थे जिन्होंने 90 के दशक में वैश्विक पटल पर भारतीय निशानेबाजी का लोहा मनवाया था। उनका करियर उपलब्धियों से भरा रहा है:
- एशियाई खेलों के नायक: उन्होंने 1994 के हिरोशिमा एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था।
- पदकों की झड़ी: अपने करियर में उन्होंने एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) और सैफ खेलों में दर्जनों स्वर्ण और रजत पदक देश की झोली में डाले।
- प्रतिष्ठित पुरस्कार: खेल क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा ‘अर्जुन पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था। बाद में एक बेहतरीन कोच के रूप में उन्होंने कई ओलंपिक स्तर के निशानेबाजों को तराशा, जिसके लिए उन्हें ‘द्रोणाचार्य पुरस्कार’ भी मिला।
उत्तराखंड और देश के लिए अपूरणीय क्षति
जसपाल राणा मूल रूप से उत्तराखंड के रहने वाले थे और उन्होंने राज्य में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए बहुत काम किया। उनके पिता नारायण सिंह राणा ने भी हमेशा उनके खेल को आगे बढ़ाने में मदद की। आज जसपाल भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन मझौन ग्राम की शूटिंग रेंज में उनके द्वारा सिखाए गए गुर और उनकी यादें हमेशा जीवित रहेंगी।
आज आयोजित हो रही इस श्रद्धांजलि सभा में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, स्थानीय विधायक, खेल संघों के पदाधिकारी और भारी संख्या में प्रशंसक भी पहुंच रहे हैं, जो देश के इस वीर सपूत को अपनी अंतिम विदाई दे रहे हैं।






