रुद्रप्रयाग (नगरासू): बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित नगरासू दमदमा साहिब गुरुद्वारे में पिछले तीन दिनों से चला आ रहा गतिरोध मंगलवार को पूरी तरह समाप्त हो गया। गुरुद्वारे की तीसरी और चौथी मंजिल पर पारंपरिक हथियारों के साथ डटे सभी सात निहंग सिख प्रशासन और पंजाब से आए विशेष निहंग जत्थे के साथ हुई सार्थक वार्ता के बाद शांतिपूर्वक नीचे उतर आए हैं।
इस गतिरोध के खत्म होने के बाद प्रशासन और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए गुरुद्वारा परिसर के आसपास फिलहाल भारी पुलिस बल और आईटीबीपी (ITBP) के जवान तैनात हैं।
वार्ता रही सफल, दोपहर बाद खत्म हुआ संकट
गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिलों पर शनिवार शाम से ही निहंगों का कब्जा बना हुआ था। रविवार देर रात प्रशासन के समझाने पर सबसे पहले एक निहंग नीचे आया था। सोमवार सुबह दो अन्य निहंग जब भोजन (लंगर) लेने नीचे पहुंचे, तो पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उनमें से एक को नीचे ही रोक लिया, जबकि दूसरा भोजन लेकर वापस ऊपर चला गया। इस दौरान छत पर मौजूद निहंगों ने पुलिस का ध्यान भटकाने के लिए पथराव भी किया और एक निहंग ने तलवार लहराते हुए आगे बढ़ने का प्रयास किया, लेकिन मुस्तैद पुलिस बल ने स्थिति को बिगड़ने से बचा लिया।
मंगलवार को पंजाब से एक विशेष निहंग जत्था मध्यस्थता के लिए नगरासू गुरुद्वारा पहुंचा। इस जत्थे ने ऊपरी मंजिल पर डटे निहंगों से लंबी बातचीत की और उन्हें कानून व्यवस्था का सम्मान करने के लिए मनाया। इसके बाद दोपहर बाद बाकी बचे चारों निहंग भी शांतिपूर्वक नीचे आ गए, जिसके बाद प्रशासन ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए परिसर के भीतर वाहन भेजे।
प्रशासनिक अधिकारियों ने खुद संभाली कमान
पूरे घटनाक्रम के दौरान जिला प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी मौके पर डटे रहे। सोमवार को जिलाधिकारी विशाल मिश्रा और पुलिस अधीक्षक निहारिका तोमर ने स्वयं घटना स्थल का जायजा लिया और सुरक्षा घेरे को मजबूत किया। निहंगों से उनके मुद्दों पर बात करने के लिए अपर जिलाधिकारी श्याम सिंह राणा, एसडीएम ऊखीमठ अनिल रावत, एसडीएम रुद्रप्रयाग सोहन सिंह सैनी, पुलिस क्षेत्राधिकारी विकास पुंडीर और कोतवाली प्रभारी सुरेश बलूनी की टीम लगातार प्रयासरत रही।
अधिकारियों का स्पष्ट कहना था कि उनकी प्राथमिकता मामले को बिना किसी बल प्रयोग के शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की थी, जिसमें सफलता मिली।
क्यों शुरू हुआ था नगरासू गुरुद्वारा विवाद?
इस पूरे विवाद की जड़ गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी और पंजाब के मोहाली से आए निहंग श्रद्धालुओं के बीच हुआ आपसी मतभेद है। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रबंधक बाबा बेअंत सिंह के अनुसार, निहंगों के एक दल ने गुरुद्वारे में आकर प्रदर्शन और धरने के लिए 50 से 60 कमरों की मांग की थी। जब गुरुद्वारा प्रबंधन ने इतनी बड़ी व्यवस्था करने में असमर्थता जताई, तो दोनों पक्षों में कहासुनी हो गई। इसके बाद निहंगों ने हंगामा करते हुए गुरुद्वारे की तीसरी और चौथी मंजिल को अंदर से बंद कर लिया।
प्रबंधक बाबा बेअंत सिंह ने आरोप लगाया कि ऊपरी मंजिलों पर डटे निहंगों ने गुरुद्वारे की दीवारों, खिड़कियों और सोलर पैनलों को भारी नुकसान पहुंचाया और तोड़ी गई निर्माण सामग्री को अपने बचाव के लिए पत्थर के रूप में इस्तेमाल किया।
कर्णप्रयाग की घटना से जुड़ाव पर पुलिस का रुख
एक तरफ जहां आंदोलनकारी निहंग और सेवादार इस पूरे विवाद को 16 जून को चमोली जिले के कर्णप्रयाग बाजार में हुई एक झड़प से जोड़ रहे थे और वहां गिरफ्तार किए गए अपने चार साथियों की रिहाई की मांग पर अड़े थे, वहीं पुलिस प्रशासन ने इस दावे को पूरी तरह खारिज किया है।
एसपी निहारिका तोमर ने स्पष्ट किया कि नगरासू गुरुद्वारे के भीतर हुआ विवाद पूरी तरह से प्रबंधन और यात्रियों के बीच का आंतरिक मामला था, इसका कर्णप्रयाग की घटना से कोई सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया पर फैल रही किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचनाओं और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
स्थानीय लोगों का रुख और सुरक्षा व्यवस्था
प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने साफ किया है कि इस गतिरोध का क्षेत्र के स्थानीय निवासियों से कोई सीधा संबंध या टकराव नहीं था। हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त की है कि देर रात कुछ बाहरी तत्व गुरुद्वारे के आसपास मंडरा रहे थे, जिससे माहौल खराब होने की आशंका बनी हुई थी। ग्रामीणों ने मांग की है कि रातों में हुई पत्थरबाजी की घटनाओं में शामिल इन बाहरी तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त जांच की जानी चाहिए।
श्रद्धालुओं की आवाजाही पर पड़ा असर, अब स्थिति सामान्य
राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात सुचारू रूप से चलता रहा, लेकिन सुरक्षा घेराबंदी और तनावपूर्ण माहौल के कारण पिछले तीन दिनों से गुरुद्वारे में आम श्रद्धालुओं की आवाजाही काफी सीमित हो गई थी। इस दौरान यात्रियों के लिए लंगर सेवा भी बहुत सीमित स्तर पर ही संचालित की जा पा रही थी।
निहंगों के नीचे आने और परिसर के खाली होने के बाद अब गुरुद्वारे में अरदास और लंगर व्यवस्था को एक बार फिर पूरी तरह सामान्य किया जा रहा है। शासन ने भी चेतावनी दी है कि चारधाम यात्रा मार्ग पर किसी भी प्रकार के सौहार्द को बिगाड़ने वाले तत्वों से सख्ती से निपटा जाएगा।





