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टिहरी के लाल का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार: तिरंगे में लिपटे वीर सपूत रोहित रावत को देख हर आंख हुई नम, पैतृक गांव में बनेगा ‘स्मृति द्वार’

On: June 12, 2026 1:39 PM
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​टिहरी गढ़वाल: उत्तराखंड की वीर प्रसूता भूमि ने देश की संप्रभुता और सुरक्षा की वेदी पर एक और युवा लाल की आहुति दे दी है। जम्मू में ड्यूटी के दौरान अपने प्राण गंवाने वाले टिहरी के जांबाज अग्निवीर रोहित रावत का शुक्रवार की सुबह उनके पैतृक घाट बिनपुला पर पूरे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया।

जब सेना के विशेष वाहन से इस वीर सपूत का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर उनके पैतृक गांव पहुंचा, तो वहां मौजूद हजारों लोगों का कलेजा फट गया। बूढ़ी आंखें रो पड़ीं और युवाओं की भुजाएं फड़क उठीं। पूरा इलाका जब तक सूरज-चांद रहेगा, ‘रोहित रावत अमर रहे’ और ‘भारत माता की जय’ के गगनभेदी नारों से गूंज उठा।

​देश सेवा का सपना लेकर सेना में हुए थे भर्ती

​मूल रूप से टिहरी गढ़वाल जिले के घनसाली विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ‘मेंदू सिंधवाल’ गांव के रहने वाले रोहित रावत के भीतर बचपन से ही देश सेवा का जज्बा कूट-कूट कर भरा था। भारतीय सेना की वर्दी पहनने की चाहत लिए रोहित ने दिन-रात कड़ी मेहनत की थी। महज़ एक साल पहले ही उनका चयन भारतीय सेना में बतौर ‘अग्निवीर’ हुआ था।


​रोहित की काबिलियत और कड़ी मेहनत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने जनवरी 2026 में ही अपनी बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण सैन्य ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा किया था। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्हें भारतीय सेना की प्रतिष्ठित ’20 गढ़वाल राइफल्स’ में पहली तैनाती मिली और उन्हें देश की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील मोर्चे यानी जम्मू-कश्मीर में तैनात किया गया था। किसे पता था कि अपनी पहली ही पोस्टिंग के कुछ ही महीनों बाद यह होनहार जवान तिरंगे में लिपटकर घर लौटेगा।
​ड्यूटी के दौरान हुआ दर्दनाक हादसा, सर्विस राइफल से लगी गोली

​मिली जानकारी के मुताबिक, यह दुखद और दिल दहला देने वाला हादसा बीते बुधवार, 10 जून 2026 की सुबह हुआ। जम्मू के अग्रिम मोर्चे पर ड्यूटी के दौरान अचानक रोहित की अपनी ही सर्विस राइफल से गोली चल गई। गोली सीधे रोहित को लगी, जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गए। घाव इतना गहरा था कि उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया।


​इस अचानक हुई घटना से पूरी बटालियन और सैन्य महकमा स्तब्ध है। हालांकि, गोली किन परिस्थितियों में और कैसे चली, इस बात का अभी पूरी तरह से खुलासा नहीं हो पाया है। सेना के उच्च अधिकारियों द्वारा इस पूरे मामले की अत्यंत बारीकी और गहनता से जांच की जा रही है, ताकि हादसे के सही कारणों का पता लगाया जा सके।

​बड़े बेटे के जाने से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

​शहीद रोहित रावत अपने परिवार के बड़े बेटे थे और पूरे घर की उम्मीदें उन्हीं पर टिकी थीं। उनके पिता सुरेंद्र सिंह वर्तमान में अपनी आजीविका चलाने के लिए सुदूर दुबई के एक होटल में कार्यरत हैं, जबकि उनका छोटा भाई मोहित अभी गांव के ही स्कूल में नौवीं कक्षा का छात्र है।
​घर के बड़े और लाडले बेटे की शहादत की खबर जैसे ही मेंदू सिंधवाल गांव पहुंची, वैसे ही पूरे क्षेत्र में सन्नाटा पसर गया। मां और परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता को जैसे ही सात समंदर पार अपने बेटे की शहादत की खबर मिली, उन पर वज्रपात हो गया। पूरे गांव में चूल्हे तक नहीं जले, हर कोई इस वीर सपूत के जाने से गहरे सदमे में है।

​तिरंगे में लिपटकर जब पैतृक गांव पहुंची पार्थिव देह

​जम्मू में सभी आवश्यक सैन्य औपचारिकताओं और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद, गुरुवार देर शाम सेना के एक विशेष वाहन के जरिए रोहित का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव लाया गया। जैसे ही तिरंगे से ढका ताबूत गांव की सीमा में दाखिल हुआ, वहां का माहौल पूरी तरह से गमगीन हो गया।


​शहीद जवान के अंतिम दर्शन करने और उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए न केवल उनके सगे-संबंधी, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीण, महिलाएं, बुजुर्ग और भारी संख्या में जनप्रतिनिधि उमड़ पड़े। हर कोई अपने इस लाल की एक झलक पाने के लिए व्याकुल नजर आया।

​बिनपुला घाट पर सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

​शुक्रवार की सुबह रोहित की अंतिम यात्रा उनके पैतृक आवास से बिनपुला घाट के लिए रवाना हुई। अंतिम यात्रा में शामिल हजारों युवाओं ने हाथों में तिरंगा लेकर देश भक्ति के नारे लगाए। इसके बाद बिनपुला घाट पर सेना की टुकड़ी ने हवा में गोलियां दागकर (फायर कर) अपने साथी जवान को पूरे सैन्य प्रोटोकॉल के साथ अंतिम सलामी (Guard of Honour) दी। इसके बाद रुंधे गलों और नम आंखों के साथ रोहित के पार्थिव शरीर को पंचतत्व में विलीन कर दिया गया।

​विधायक निधि से गांव में बनेगा भव्य ‘स्मृति द्वार’

​इस अत्यंत दुखद और भावुक कर देने वाली घड़ी में क्षेत्र के विधायक शक्ति लाल शाह भी वीर सपूत को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करने बिनपुला घाट पहुंचे। उन्होंने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें नमन किया।
​विधायक शक्ति लाल शाह ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और कहा कि इस अपार दुख की घड़ी में पूरी सरकार और क्षेत्र की जनता उनके साथ खड़ी है।

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विधायक ने मौके पर ही एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि बलिदानी रोहित रावत के इस सर्वोच्च बलिदान को हमेशा जीवंत रखने के लिए, उनकी याद में जल्द ही विधायक निधि से उनके पैतृक गांव ‘मेंदू सिंधवाल’ में एक भव्य ‘स्मृति द्वार’ (Welcome Gate) का निर्माण कराया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस वीर सपूत के शौर्य से प्रेरणा ले सकें।


​उत्तराखंड के इस वीर अग्निवीर का बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। डोइवाला और संपूर्ण उत्तराखंड की ओर से अमर शहीद रोहित रावत को शत-शत नमन!

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