मुख्य बिंदु:
- घटनास्थल: लालकुआं कोतवाली के हल्दूचौड़ चौकी क्षेत्र स्थित बेरीपड़ाव का खुरपिया सरकारी फार्म।
- मृतका की पहचान: मूल रूप से बदायूं (यूपी) की निवासी, वर्तमान में बेरीपड़ाव के गोला गेट के पास रह रही थी।
- लापता होने का समय: मंगलवार शाम से लापता, बुधवार को संयुक्त खोजबीन के दौरान मिला शव।
- पुलिस की शुरुआती थ्योरी: शरीर पर मिले घाव वन्य जीव के हमले जैसे; पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार।
हल्द्वानी/लालकुआं:
उत्तराखंड के नैनीताल जिले के तहत आने वाले लालकुआं कोतवाली क्षेत्र से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। हल्दूचौड़ के बेरीपड़ाव स्थित खुरपिया सरकारी फार्म के भीतर एक महिला का क्षत-विक्षत शव मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। शव की हालत देखकर स्थानीय लोगों में भारी दहशत का माहौल है।
सूचना मिलने के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम मौके पर पहुंच चुकी है और साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
मंगलवार शाम को बाजार जाने की बात कहकर निकली थी महिला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतका की पहचान बेरीपड़ाव (गोला गेट, हल्दूचौड़) की रहने वाली एक महिला के रूप में हुई है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले की निवासी थी। परिजनों ने पुलिस को बताया कि महिला मंगलवार शाम को घर से यह कहकर निकली थी कि वह कुछ काम से बाजार जा रही है। जब देर रात तक वह घर वापस नहीं लौटी, तो परिजनों की चिंता बढ़ने लगी। रातभर रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में खोजबीन करने के बाद भी महिला का कहीं कोई सुराग नहीं मिल सका।
बुधवार को पुलिस और परिजनों के सर्च ऑपरेशन में मिला शव
बुधवार सुबह जब महिला का कोई पता नहीं चला, तो परेशान परिजनों ने लालकुआं कोतवाली पुलिस को मामले की लिखित सूचना दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए हल्दूचौड़ चौकी पुलिस तुरंत एक्टिव हुई और परिजनों के साथ मिलकर एक संयुक्त तलाशी अभियान (सर्च ऑपरेशन) शुरू किया गया।
खोजबीन के दौरान टीम बेरीपड़ाव स्थित खुरपिया सरकारी फार्म के अंदरूनी हिस्से में पहुंची, जहाँ झाड़ियों के बीच महिला का लहूलुहान और क्षत-विक्षत शव पड़ा हुआ मिला। शव को देखते ही परिजनों में कोहराम मच गया और देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई।
वन्य जीव के हमले की आशंका, फॉरेंसिक टीम ने जुटाए सबूत
महिला के शरीर पर गहरे घाव और खरोंच के निशान पाए गए हैं, जिससे प्रथम दृष्टया यह प्रतीत हो रहा है कि महिला पर किसी हिंसक वन्य जीव ने हमला किया है। चूंकि यह इलाका जंगल और सरकारी फार्म के बड़े भूभाग से सटा हुआ है, इसलिए यहाँ गुलदार (तेंदुआ) या अन्य जंगली जानवरों की आवाजाही बनी रहती है।
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस के उच्च अधिकारियों को मामले से अवगत कराया गया, जिसके बाद मौके पर फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने शव के आसपास के पैरों के निशान (पगमार्क) और अन्य महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्यों को अपने कब्जे में लिया है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हमला किस जानवर ने किया या मामले में कोई अन्य आपराधिक पहलू तो नहीं है।
नशे की लत और देर रात घूमने की बात आई सामने
स्थानीय स्तर पर की गई प्रारंभिक पूछताछ और जांच में पुलिस को कुछ अन्य जानकारियां भी हाथ लगी हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, शुरुआती तौर पर यह बात सामने आई है कि महिला कथित तौर पर नशे की आदी थी और अक्सर देर रात तक घर से बाहर या सुनसान इलाकों में घूमती रहती थी।
पुलिस इस थ्योरी पर भी काम कर रही है कि मंगलवार की रात भी महिला नशे की हालत में भटकते हुए सरकारी फार्म के घने और असुरक्षित इलाके के भीतर दाखिल हो गई होगी। चूंकि रात के समय ऐसे स्थानों पर जंगली जानवर बेहद सक्रिय रहते हैं, इसलिए वह आसानी से उनका शिकार बन गई। हालांकि, पुलिस प्रशासन अभी किसी एक अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रहा है।
अधिकारियों का बयान: पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा राज
मामले की जानकारी देते हुए क्षेत्राधिकारी (CO) अमित कुमार सैनी ने बताया कि पुलिस हर संभावित एंगल से इस पूरे प्रकरण की बारीकी से तफ्तीश कर रही है। पुलिस ने पंचनामा भरने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है।
सीओ अमित कुमार सैनी के मुताबिक:
”शव पर मिले घाव वन्य जीव के हमले की ओर इशारा कर रहे हैं, लेकिन मौत के वास्तविक और सटीक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा। यदि रिपोर्ट में कोई अन्य बात सामने आती है, तो उस आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस की टीमें क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों और महिला के मोबाइल लोकेशन की भी जांच कर रही हैं।”
स्थानीय निवासियों में वन विभाग के खिलाफ आक्रोश
इस घटना के बाद से हल्दूचौड़ और बेरीपड़ाव के ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता और रोष देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि खुरपिया फार्म और आसपास के क्षेत्रों में जंगली जानवरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन वन विभाग द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि फार्म के आसपास गश्त बढ़ाई जाए और यदि यह किसी आदमखोर जानवर का काम है, तो उसे पकड़ने के लिए तुरंत पिंजरा लगाया जाए।









