मुख्य बिंदु:
- हादसे का स्थान: सैदुलअजाइब, साकेत मेट्रो स्टेशन के पास, दक्षिणी दिल्ली।
- बड़ा एक्शन: लापरवाही बरतने के आरोप में MCD के JE अमन जैन और AE सुदेश सिंह चौहान तत्काल प्रभाव से सस्पेंड।
- हताहत: अब तक 5 लोगों की दर्दनाक मौत, कई घायल AIIMS में भर्ती।
- सरकारी कदम: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने किया घटनास्थल का दौरा, DM की अध्यक्षता में मजिस्ट्रियल जांच का एलान।
नई दिल्ली:
राजधानी दिल्ली के साकेत इलाके से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। साकेत मेट्रो स्टेशन के पास स्थित सैदुलअजाइब इलाके में एक पांच मंजिला रिहायशी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस भीषण हादसे में अब तक पांच लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि मलबे से निकाले गए कई घायलों का इलाज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में चल रहा है। इस प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए दिल्ली सरकार और नगर निगम (MCD) ने बड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री के निरीक्षण के तुरंत बाद इलाके के जूनियर इंजीनियर (JE) और असिस्टेंट इंजीनियर (AE) को सस्पेंड कर दिया गया है।
रविवार सुबह CM रेखा गुप्ता ने किया ग्राउंड ज़ीरो का दौरा
हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता रविवार सुबह खुद घटनास्थल पर पहुंचीं। उन्होंने मलबे को हटाने और राहत-बचाव कार्य (Rescue Operations) में जुटी टीमों से पूरी स्थिति की जानकारी ली। घटनास्थल का मुआयना करने के बाद मुख्यमंत्री ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया और अधिकारियों को सख्त लहजे में हिदायत दी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मीडिया से बात करते हुए कहा:
”यह हादसा बेहद हृदयविदारक है और इसमें मासूम लोगों ने अपनी जान गंवाई है। इस लापरवाही के लिए जो भी अधिकारी या बिल्डर जिम्मेदार होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। दोषियों पर ऐसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी जो भविष्य के लिए एक नजीर बनेगी।”
MCD के दो अधिकारियों पर गिरी गाज, तुरंत प्रभाव से निलंबन
इस हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। मुख्यमंत्री के कड़े तेवरों के बाद निगम ने प्राथमिक तौर पर चूक मानने वाले अधिकारियों पर चाबुक चलाया है। इस दर्दनाक हादसे को लेकर MCD के जूनियर इंजीनियर (JE) अमन जैन और असिस्टेंट इंजीनियर (AE) सुदेश सिंह चौहान को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि अवैध और कमजोर निर्माण की शिकायतें मिलने के बावजूद स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया था।
DM के नेतृत्व में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश
मामले की तह तक जाने और कानूनी जवाबदेही तय करने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही सरकार ने एक बड़ा सुरक्षा कदम उठाते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि साकेत और उसके आस-पास के इलाकों में जितनी भी पुरानी, जर्जर, टूटी-फूटी या खतरनाक इमारतें हैं, उनकी तुरंत पहचान की जाए और उन्हें खाली कराकर सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए।
मृतकों में डॉक्टर भी शामिल, कैंटीन में खाना खाते वक्त हुआ हादसा
इस भयावह हादसे ने कई हंसते-खेलते परिवारों को कभी न भूलने वाला जख्म दिया है। मलबे से निकाले गए शवों में से अब तक तीन लोगों की शिनाख्त हो चुकी है, जबकि अन्य की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
पहचान किए गए मृतकों के नाम इस प्रकार हैं:
- रवि
- नलिन कपिल
- पार्वती ओझा
मृतकों में शामिल ‘रवि’ की कहानी बेहद भावुक करने वाली है। रवि ने हाल ही में किर्गिस्तान (Kyrgyzstan) से अपनी MBBS की डिग्री पूरी की थी और इन दिनों वह दिल्ली में रहकर पोस्ट ग्रेजुएशन (MD/MS) की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था। हादसे के वक्त रवि अपने दोस्तों के साथ उसी इमारत के निचले हिस्से में स्थित एक कैंटीन में खाना खाने गया था। किसे पता था कि चंद मिनटों का यह लंच ब्रेक उसके जीवन का आखिरी वक्त साबित होगा।
राहत और बचाव कार्य जारी, AIIMS में घायलों की स्थिति पर नजर
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग (Delhi Fire Services) और आपदा प्रबंधन की टीमों ने मोर्चा संभाल लिया था। मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए कटर और क्रेन की मदद ली गई। मलबे से सुरक्षित निकाले गए घायलों को तुरंत एम्बुलेंस के जरिए AIIMS ट्रॉमा सेंटर भेजा गया, जहां डॉक्टरों की विशेष टीम उनका इलाज कर रही है। कुछ घायलों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है, जिसके चलते प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है।
इलाके में दहशत का माहौल, अवैध निर्माण पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद सैदुलअजाइब और साकेत इलाके के निवासियों में डर और आक्रोश का माहौल है। संकरी गलियों में नियमों को ताक पर रखकर बनाई जा रही बहुमंजिला इमारतें अब लोगों की जान की दुश्मन बनने लगी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते MCD ने इन अवैध और कमजोर ढांचों पर कार्रवाई की होती, तो आज पांच घरों के चिराग न बुझते। अब देखना यह होगा कि मजिस्ट्रियल जांच की रिपोर्ट आने के बाद इस पूरे नेक्सस (बिल्डर-अधिकारी गठजोड़) पर प्रशासन क्या बड़ा एक्शन लेता है।










