नई टिहरी। उत्तराखंड की प्रसिद्ध टिहरी झील में शनिवार देर शाम कुदरत का कहर देखने को मिला। अचानक आए भीषण आंधी-तूफान के कारण डोबरा-चाटी के समीप स्थित फ्लोटिंग हटमेंट (तैरते हुए कमरे) टूटकर झील में बह गए। इस घटना के दौरान हटमेंट में 22 पर्यटक मौजूद थे, जिनकी जान पर बन आई थी। हालांकि, एसडीआरएफ (SDRF) की मुस्तैदी ने एक बड़े हादसे को होने से रोक लिया और सभी पर्यटकों को सकुशल बचा लिया गया। यह घटना जबलपुर में हुए हालिया हादसे की याद दिलाती है, लेकिन राहत की बात यह रही कि यहाँ कोई जनहानि नहीं हुई।
शाम ढलते ही बदला मौसम का मिजाज
शनिवार का दिन पर्यटकों के लिए आनंदमय था, लेकिन शाम होते-होते टिहरी का मौसम बेहद आक्रामक हो गया। रात करीब 8 बजे के आसपास क्षेत्र में तेज आंधी और तूफान ने दस्तक दी। आंधी इतनी शक्तिशाली थी कि टिहरी झील की लहरों में भारी उथल-पुथल शुरू हो गई। देखते ही देखते डोबरा-चाटी क्षेत्र में पर्यटकों के ठहरने के लिए बनाए गए फ्लोटिंग हटमेंट अपनी नींव और बंधनों से उखड़ गए और झील के बीचों-बीच अनियंत्रित होकर बहने लगे।
जैसे ही हटमेंट टूटने शुरू हुए, वहां ठहरे पर्यटकों में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। अंधेरे और तेज हवाओं के बीच लोग खुद को बचाने की गुहार लगाने लगे। स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी सूचना आपदा कंट्रोल रूम, टिहरी को दी।
SDRF का साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे की खबर मिलते ही आपदा प्रबंधन तंत्र सक्रिय हो गया। एसडीआरएफ पोस्ट कोटी कॉलोनी से उपनिरीक्षक नरेंद्र राणा के नेतृत्व में एक विशेष रेस्क्यू टीम आवश्यक उपकरणों के साथ तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुई।
जब टीम मौके पर पहुंची, तो स्थिति काफी गंभीर थी। हटमेंट क्षतिग्रस्त होकर पानी के तेज बहाव और हवा के दबाव में दूर तक बह गए थे। रात का अंधेरा और उफनती झील रेस्क्यू में बड़ी बाधा बन रहे थे। लेकिन एसडीआरएफ के जवानों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए तुरंत ऑपरेशन शुरू किया।
पर्यटन विभाग की लाइफ बोट्स और अन्य संसाधनों की मदद से टीम ने एक-एक कर सभी 22 पर्यटकों को सुरक्षित निकाला। रेस्क्यू किए गए पर्यटकों को तुरंत कोटी कॉलोनी पहुंचाया गया, जहां उन्हें प्राथमिक सहायता दी गई। प्रशासन ने पुष्टि की है कि सभी पर्यटक पूरी तरह सुरक्षित हैं।
जबलपुर जैसी त्रासदी होने से बची
गौरतलब है कि हाल ही में मध्य प्रदेश के जबलपुर में भी पानी से संबंधित एक बड़ा हादसा हुआ था, जिसने देश को झकझोर कर रख दिया था। टिहरी की यह घटना भी उसी तरह की विभीषण त्रासदी का रूप ले सकती थी, यदि रेस्क्यू टीम पहुंचने में जरा भी देरी करती। डोबरा-चाटी क्षेत्र में हवाओं का वेग इतना अधिक था कि मजबूत माने जाने वाले हटमेंट भी ताश के पत्तों की तरह बिखर गए।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
इस घटना ने टिहरी झील में संचालित हो रहे पर्यटन ढांचों की सुरक्षा पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। पर्यटकों का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए। हालांकि, प्रशासन ने इस बार मुस्तैदी दिखाई, लेकिन भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए फ्लोटिंग हटमेंट की मजबूती और उनके निर्माण की तकनीक की समीक्षा करना आवश्यक हो गया है।
ये भी पढ़े➜दिल्ली: विवेक विहार की चार मंजिला इमारत में भीषण अग्निकांड, 4 लोगों की दर्दनाक मौत
प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन और एसडीआरएफ ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान झील के किनारे या पानी के बीच बने अस्थायी ढांचों में रहने से परहेज करें। मौसम विभाग द्वारा जारी अलर्ट को गंभीरता से लेने की सलाह दी गई है।
मुख्य बिंदु:
- स्थान: डोबरा-चाटी, टिहरी झील।
- समय: शनिवार रात 8 बजे।
- बचाव: 22 पर्यटकों का सुरक्षित रेस्क्यू।
- टीम: एसडीआरएफ (उपनिरीक्षक नरेंद्र राणा व टीम)।
- क्षति: फ्लोटिंग हटमेंट पूरी तरह क्षतिग्रस्त।











