कर्णप्रयाग क्षेत्र के गैरसैंण सीमांत इलाकों में गुलदार के बढ़ते हमलों से लोगों में भय का माहौल बना हुआ है। लगातार हो रहे हमलों से आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग से गुलदार को पकड़ने के लिए गांव में पिंजरा लगाने की मांग की। हालात इतने बिगड़ गए कि गुस्साए ग्रामीणों ने कुछ समय के लिए वनकर्मियों को बंधक भी बना लिया।
गैरसैंण के सीमावर्ती मेहलचौरी और कुनीगाड़ क्षेत्रों में बीते एक माह से गुलदार मवेशियों पर लगातार हमला कर रहा है। गुरुवार रात को उजेटिया गांव में गुलदार ने राजेंद्र मेहरा की गौशाला में घुसकर एक गाय और उसके बछड़े को मार डाला। इस घटना के बाद गांव में दहशत और गुस्सा और बढ़ गया।
मेहलचौरी के समीप कुमाऊं और गढ़वाल के सीमांत क्षेत्र में भी गुलदार का आतंक बना हुआ है। गढ़वाल क्षेत्र के भंडारीखोड गांव में कृष्णानंद थपलियाल की तीन गायों को गुलदार ने अपना शिकार बना लिया। वहीं उजेटिया गांव में मोहन सिंह के पालतू कुत्ते पर दिनदहाड़े हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। इसके अलावा रंगचौणा गांव में लीला देवी की गाय को भी गुलदार ने गौशाला में घुसकर मार डाला।
गुलदार का आतंक केवल गढ़वाल क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है। कुमाऊं मंडल के अल्मोड़ा जनपद अंतर्गत पसारागांव, पुरानालोहबा और नवाण गांवों में भी गुलदार अब तक पांच गायों को अपना शिकार बना चुका है। लगातार हो रहे इन हमलों से ग्रामीणों में भय के साथ-साथ आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि गुलदार इसी तरह गौवंश पर हमले करता रहा तो आने वाले समय में वह बच्चों और बुजुर्गों को भी निशाना बना सकता है। इसी डर के चलते ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल पिंजरा लगाकर गुलदार को पकड़ने और उसे सुरक्षित क्षेत्र में भेजने की मांग की। उजेटिया गांव में हालिया हमले के बाद ग्रामीणों ने करीब दो घंटे तक वनकर्मियों को बंधक बनाए रखा।
मौके पर पहुंचे जिला पंचायत सदस्य सुरेश बिष्ट ने ग्रामीणों को समझाया और तत्काल पिंजरा लगवाने का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने बंधक बनाए गए वनकर्मियों को मुक्त किया और मरी हुई गायों का पोस्टमार्टम कराकर दफनाने की प्रक्रिया पूरी की।
बढ़ते हमलों से बढ़ी चिंता
जिपंस सुरेश बिष्ट ने बताया कि गुलदार के लगातार हमलों को देखते हुए उसके हिंसक और संभावित नरभक्षी होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी को लेकर उन्होंने जिला मुख्यालय पहुंचकर डीएफओ और कंजरवेटिव से वार्ता की, जिसके बाद प्रभावित क्षेत्र में पिंजरा लगाने की अनुमति मिल गई है।
सिलंगा गांव की प्रधान दीपा देवी और क्षेत्र पंचायत सदस्य वीरेंद्र नेगी ने कहा कि जिस तरह अल्मोड़ा जनपद में घटनाओं के तुरंत बाद पिंजरा लगाकर गुलदार को पकड़ लिया गया था, उसी तरह उनके क्षेत्र से भी गुलदार को जल्द दूर किया जाना चाहिए।
वन क्षेत्राधिकारी प्रदीप गौड़ ने बताया कि प्रभावित गांवों में पिंजरा लगा दिया गया है और वनकर्मियों की गश्त भी बढ़ा दी गई है। उन्होंने ग्रामीणों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत वन विभाग को देने की अपील की है।








