वन विभाग ने मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक अनोखी पहल शुरु की है। विभाग अब संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों—विशेषकर बच्चों और महिलाओं—को प्लास्टिक की तुरही और सीटी उपलब्ध कराएगा। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इन उपकरणों का उपयोग जंगल से गुजरते समय किया जाए तो जंगली जानवरों को मानव उपस्थिति का संकेत मिल जाएगा और टकराव की संभावना कम हो जाएगी।
वन विभाग के शीर्ष अधिकारी प्रमुख वन संरक्षक (हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स) रंजन कुमार मिश्र ने सभी जिलों के डीएफओ को इस योजना को तत्काल लागू करने के निर्देश दिए हैं। राज्य में लगातार बढ़ रही वन्यजीव गतिविधियों और हमलों के चलते सरकार और विभाग पूरा ध्यान स्थिति को नियंत्रित करने पर लगाए हुए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और वन मंत्री सुबोध उनियाल भी लगातार अपडेट ले रहे हैं।
जागरूकता के लिए स्कूलों में होगा नया पाठ्यक्रम
अल्मोड़ा और हरिद्वार के डीएफओ ने बैठक के दौरान सुझाव दिया कि स्कूलों में जागरूकता फैलाना बेहद प्रभावी साबित हो सकता है। इस पर विभाग ने निर्णय लिया कि भालू, गुलदार, बाघ, हाथी, सांप आदि से बचाव और सावधानियों से जुड़ा एक दिशानिर्देश तैयार कर उसे शिक्षा विभाग को भेजा जाएगा, ताकि इसे स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जा सके।
संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त मानव-संसाधन तैनात
मानव–वन्यजीव संघर्ष रोकने के प्रयासों को मजबूत करने के लिए 11 वन प्रभागों में 142 सहायक कार्मिकों को एक माह के लिए नियुक्त किया गया है। ये फायर वॉचरों की तरह काम करते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाएंगे।
होटल–ढाबा संचालकों पर अब सख्त कार्रवाई
वन क्षेत्रों के आसपास कचरे के गलत निस्तारण से जंगली जानवर आबादी की ओर आकर्षित होते हैं। इसे रोकने के लिए विभाग ने सभी डीएफओ को निर्देश दिया है कि ऐसे होटल, रिसॉर्ट या ढाबों को सख्त नोटिस जारी किए जाएं जो कचरे को जंगलों में फेंकते हैं। उन्हें उचित अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था अनिवार्य रूप से करनी होगी।
चारा–लकड़ी हेतु जंगल न जाने की अपील
जिन ग्रामीण इलाकों में जंगली जानवरों की आवाजाही अधिक है, वहां स्थानीय लोगों से आग्रह किया जाएगा कि वे चारा और लकड़ी के लिए जंगलों में न जाएं। पशुपालन विभाग की मदद से इन स्थानों पर पशुओं के लिए चारे की आपूर्ति सुनिश्चित करने की योजना है।
डीएफओ को जारी प्रमुख निर्देश
• जहां भी पिंजरा लगाने या ट्रैंकुलाइज करने की जरूरत हो, प्रस्ताव तुरंत भेजें।
• खतरनाक घोषित वन्यजीवों की पकड़ या वैध कार्रवाई हेतु अनुमति विस्तार का प्रस्ताव शीघ्र भेजा जाए।
• वन सीमाओं पर नियमित एंटी-स्नेयर (कड़का/फंदा) गश्त हो।
• फॉक्स लाइट, बुश कटर, सोलर लाइट और पिंजरों की खरीद में किसी भी तरह की देरी न हो।
• किसी घटना के बाद डीएफओ का मौके पर पहुंचना अनिवार्य रहे।
• कचरा प्रबंधन, सोलर लाइट स्थापना और झाड़ी कटान के कार्य में डीएम से समन्वय बनाए रखें।
• जंगल की आग रोकने की तैयारियां अभी से शुरू कर दी जाएं।
• वाटर होल की मरम्मत कर उनमें पर्याप्त मात्रा में पानी सुनिश्चित किया जाए।
एक माह के लिए उपलब्ध कराए गए कार्मिक (प्रभाग–संख्या)
• गढ़वाल – 15
• रुद्रप्रयाग – 15
• केदारनाथ – 15
• टिहरी – 12
• गोविंद वन्यजीव विहार – 10
• चंपावत – 10
• नरेंद्रनगर – 15
• उत्तरकाशी – 15
• बद्रीनाथ – 15
• नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क – 10
• पिथौरागढ़ – 10
Uttarakhand :जंगल में सुरक्षा के लिए तुरही–सीटी योजना, सभी DFO को सख्त निर्देश
On: December 6, 2025 6:17 AM








