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देहरादून में बच्चों की खांसी-जुकाम की दवाओं पर सख्ती, एफडीए की बड़ी कार्रवाई — सात मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस रद्द, एक निलंबित

On: October 9, 2025 10:55 AM
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देहरादून में बच्चों की खांसी और जुकाम की दवाओं की बिक्री पर लगी रोक के बाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने व्यापक अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान सात मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए, जबकि एक स्टोर का लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है। टीम ने विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण करते हुए दवाओं के नमूने एकत्र किए और दुकानदारों को अगली सूचना तक इन दवाओं की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए।

स्वास्थ्य सचिव एवं खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार के निर्देश पर औषधि निरीक्षक मानेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में यह विशेष अभियान चलाया गया। एफडीए की टीम ने चकराता रोड, किशननगर चौक, बल्लूपुर चौक, कांवली रोड, बल्लीपुर चौक और प्रेमनगर क्षेत्रों में कई मेडिकल स्टोरों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान पाया गया कि कुछ दुकानों में बच्चों को दी जाने वाली खांसी और सर्दी-जुकाम की दवाओं का भंडारण किया जा रहा था। ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई करते हुए दवाओं को सील कर दिया गया।

जिन मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं, उनमें शामिल हैं — आलमेड लाइफ साइंसेज (विहार बल्लीवाला चौक), अजंता फार्मेसी (जीएमएस रोड, पीएफ कार्यालय के पास), आरंभ एंटरप्राइजेज (निरंजनपुर जीएमएस रोड), बीएसबी क्योर (दुर्गा एन्क्लेव, कारगी ग्रांट), बी. चेम बायोटेक (रामपुर कलां, विकासनगर), शान मेडिकल स्टोर (जमनपुर, बीहाइव कॉलेज रोड, सेलाकुई) और स्माइल मेडिकल स्टोर (सहारनपुर रोड, हर्बटपुर, विकासनगर)। वहीं, पंवार मेडिकोज (वीरभद्र रोड, ऋषिकेश) का लाइसेंस निलंबित किया गया है।

टीम ने मौके से 11 प्रकार के सीरप के नमूने जांच के लिए लिए। जांच के दौरान यह पाया गया कि कोल्ड्रिफ, रेस्पिफ्रेश-टीआर और रीलाइफ जैसे सीरप किसी भी स्टोर पर उपलब्ध नहीं थे। निरीक्षण के बाद एफडीए टीम ने सभी विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि अगली सूचना तक बच्चों की खांसी-जुकाम की कोई भी दवा न बेची जाए।

अभियान के दौरान यह भी सामने आया कि कई मेडिकल स्टोर संचालकों ने स्वयं पहल करते हुए इन दवाओं को पहले ही अपने स्टॉक से हटा दिया था। एफडीए के अपर आयुक्त एवं ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है, और इसी उद्देश्य से यह सख्त कदम उठाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्यभर में ऐसे निरीक्षण लगातार जारी रहेंगे और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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