Uttarakhand: देहरादून में मेट्रो और नियो मेट्रो की बजाय अब बाई-आर्टिकुलेटेड बसों की योजना, शुरुआत में प्रस्तावित दो कॉरिडोर बनाए जाएंगे - Doonprimenews
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Uttarakhand: देहरादून में मेट्रो और नियो मेट्रो की बजाय अब बाई-आर्टिकुलेटेड बसों की योजना, शुरुआत में प्रस्तावित दो कॉरिडोर बनाए जाएंगे

On: August 26, 2025 8:57 AM
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देहरादून में अब रैपिड ट्रांजिस्ट सिस्टम के तहत मेट्रो लाइट या नियो मेट्रो की बजाय बाई-आर्टिकुलेटेड बसों (द्वि-संयुक्त बसों) का संचालन करने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (यूकेएमआरसी) ने इस साल अप्रैल में स्विट्ज़रलैंड की कंपनी एचईएसएस के साथ करार किया है।

कंपनी ने शहर में यातायात दबाव और पीक समय में यात्रियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली है। यूकेएमआरसी अगले महीने इस रिपोर्ट का मुख्य सचिव के सामने प्रस्तुतीकरण देगा।

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मेट्रो और रोपवे के विकल्पों के बाद नया प्रस्ताव

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

देहरादून में 2019 में मेट्रो लाइट के लिए डीपीआर तैयार की गई थी, लेकिन विशेषज्ञों ने शहर की परिस्थितियों और लागत को देखते हुए इसे उपयुक्त नहीं माना।

इसके बाद 2020 में रोपवे सिस्टम की डीपीआर तैयार की गई, जबकि मेट्रो नियो का मानक कम यातायात वाले शहरों के लिए आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने जारी किया। वर्ष 2022 में नासिक मॉडल के आधार पर मेट्रो नियो के लिए डीपीआर केंद्र को भेजी गई, लेकिन मई 2025 में इसे यह कहकर लौटाया गया कि इतना यातायात ई-बस और बीआरटीएस (बस रैपिड ट्रांजिस्ट सिस्टम) से संभाला जा सकता है।

इसी बीच यूकेएमआरसी ने एचईएसएस कंपनी के साथ मिलकर बाई-आर्टिकुलेटेड बसें चलाने का नया प्रस्ताव तैयार किया।

बाई-आर्टिकुलेटेड बसें: विशेषताएँ

बैटरी संचालित और दो कोच वाली बसें

फ्लैश चार्जिंग तकनीक के साथ तेजी से चार्ज होने वाली

शहर में 30-40 किमी/घंटा की गति

सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल

ऑस्ट्रेलिया, स्विट्जरलैंड, फ्रांस और हाल ही में लेटिन अमेरिका में परीक्षण

प्रस्तावित रूट और कॉरिडोर

दो मुख्य चरणों में रूट बनाए जाएंगे, जिनसे 42 वार्डों की लगभग 40% आबादी सीधे कवर होगी। निजी रैपिड ट्रांजिस्ट सिस्टम से जोड़कर 75% आबादी को सेवा दी जा सकेगी।

पहले चरण के कॉरिडोर:

कॉरिडोर 1: उत्तर से दक्षिण, आईएसबीटी से गांधी पार्क – 8.523 किमी, 10 स्टेशन

कॉरिडोर 2: पूर्व से पश्चिम, एफआरआई से रायपुर – 13.901 किमी, 15 स्टेशन

दूसरे चरण के कॉरिडोर:

रेलवे स्टेशन से पंडितवाड़ी – 4.65 किमी, 6 स्टेशन

गांधी पार्क से आईटी पार्क – 6.2 किमी, 7 स्टेशन

क्लेमेंटटाउन से बल्लीवाला चौक – 7.77 किमी, 8 स्टेशन

पहले चरण फेस-2:

गांधी पार्क से मैक्स अस्पताल – 6.8 किमी, 7 स्टेशन

एफआरआई से प्रेमनगर (एक किलोमीटर भूमिगत) – 3.3 किमी, 3 स्टेशन

रिस्पना से विंडलास रिवर वैली – 6.5 किमी, 5 स्टेशन

दूसरे चरण फेस-2:

सुभाष नगर/चंद्रबनी से आईएसबीटी से रिस्पना – 7.0 किमी, 4 स्टेशन

सेवला कलां से हर्बर्टपुर – 47 किमी, 24 स्टेशन

पथरी बाग चौक से कारगी चौक से केदारपुर – 4 किमी, 5 स्टेशन

अजबपुर खुर्द से दून विवि – 2.5 किमी, 3 स्टेशन

चंद्रबनी चौक से वाइल्ड लाइफ संस्थान – 1.5 किमी, 2 स्टेशन

लागत और तुलना

बाई-आर्टिकुलेटेड बस प्रणाली इलेक्ट्रिक रैपिड ट्रांजिट (ई-आरटी) के तहत आएगी। यह मेट्रो लाइट से सस्ती, लेकिन रोपवे से महंगी होगी।

मेट्रो लाइट (2019 डीपीआर): 91 करोड़ रुपये/किमी (देहरादून कॉरिडोर के लिए 110 करोड़ रुपये/किमी)

रोपवे (2020 डीपीआर): 103 करोड़ रुपये /किमी (2021 स्तर), 126 करोड़ रुपये /किमी (2025 स्तर)

मेट्रो नियो: अनुमानित 40–50 करोड़/किमी (नासिक मॉडल के आधार पर)

नई प्रणाली पूरी तरह इलीवेटेड कॉरिडोर पर चलेगी और इसमें आधुनिक स्टेशन, फ्लैश चार्जिंग तकनीक और हाई कैपेसिटी इलेक्ट्रिक बसें शामिल होंगी। विशेषज्ञों के अनुसार रखरखाव खर्च मेट्रो और नियो मेट्रो से कम होगा।

यह भी पढें- “राज्यपाल ने धराली और हर्षिल के आपदाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा कर प्रभावितों को राहत और सहायता का भरोसा दिलाया”

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