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Uttarakhand News: प्रदेश के 13 गांव बनेंगे संस्कृत संरक्षण के आदर्श, आज CM धामी करेंगे योजना का शुभारंभ

On: August 10, 2025 6:26 AM
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देहरादून। देववाणी संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन को नया आयाम देने के लिए उत्तराखंड सरकार ने एक अनोखी पहल शुरू की है। प्रदेश के हर जिले में एक-एक आदर्श संस्कृत ग्राम स्थापित किया जाएगा, जहां ग्रामीण आपसी बातचीत से लेकर दैनिक कार्य तक संस्कृत भाषा में करेंगे। इस योजना का उद्देश्य संस्कृत को जनभाषा का दर्जा दिलाना और इसके प्राचीन गौरव को पुनः स्थापित करना है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को देहरादून स्थित संस्कृत ग्राम भोगपुर से इस महत्वाकांक्षी योजना की औपचारिक शुरुआत की। इस अवसर पर सभी जिलों के चयनित संस्कृत ग्राम वर्चुअल माध्यम से जुड़े। यह योजना उत्तराखंड संस्कृत अकादमी और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में संचालित की जा रही है।

हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"

संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि पहले ही सभी जिलों में आदर्श संस्कृत ग्रामों का चयन कर लिया गया था। संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विधिवत उद्घाटन किया।

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

संस्कृत में होगा संवाद और कार्य

इन ग्रामों में ग्रामीण न केवल आपसी वार्तालाप बल्कि सरकारी कार्य, सामाजिक गतिविधियां और धार्मिक अनुष्ठान भी संस्कृत में करेंगे। वेद, पुराण और उपनिषदों के पाठ से लेकर विभिन्न संस्कारों में सनातन परंपराओं का पालन होगा। साथ ही, इन गांवों में नशामुक्ति अभियान, नारी सम्मान, चरित्र निर्माण और अपराध प्रवृत्ति रोकने जैसे सामाजिक कार्य भी संचालित किए जाएंगे।

इन आदर्श ग्रामों का उद्देश्य प्रदेश की संस्कृति, संस्कार और ज्ञान-विज्ञान को बढ़ावा देना, सामाजिक सद्भावना कायम रखना और संस्कृत को जन-जीवन का हिस्सा बनाना है।

प्रदेश के चयनित आदर्श संस्कृत ग्राम

उत्तराखंड सरकार द्वारा घोषित आदर्श संस्कृत ग्रामों में —

नरपुर पंजनहेड़ी (हरिद्वार)

कोटगांव (उत्तरकाशी)

डिम्मर (चमोली)

बैंजी (रुद्रप्रयाग)

मुखेम (टिहरी)

भोगपुर (देहरादून)

गोदा (पौड़ी)

उर्ग (पिथौरागढ़)

खर्ककार्की (चंपावत)

सेरी (बागेश्वर)

जैंती पांडेकोटा (अल्मोड़ा)

पांडेगांव (नैनीताल)

नगला तराई (ऊधमसिंह नगर) शामिल हैं।

कर्नाटक का मत्तूर – प्रेरणा का स्रोत

कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले का मत्तूर गांव देश में संस्कृत भाषा के जीवंत उदाहरण के रूप में प्रसिद्ध है। यहां दैनिक जीवन में बातचीत से लेकर शैक्षिक गतिविधियां भी संस्कृत में होती हैं। गांव में संस्कृत शिक्षा के लिए विशेष स्कूल और संस्थान स्थापित हैं। भले ही राज्य की मुख्य भाषा कन्नड़ है, लेकिन मत्तूर ने संस्कृत को अपने जीवन का अहम हिस्सा बना रखा है।

यह भी पढें- Weather Update: देहरादून में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट, जानें आज उत्तराखंड का मौसम कैसा रहेगा

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