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61 साल बाद वीरांगना को मिला सम्मान, पेंशन हुई चार गुना; CRPF डीआईजी की पहल से मिला न्याय

On: August 9, 2025 2:43 AM
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नैनीताल से एक भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है। पिथौरागढ़ के वीर सिपाही दान सिंह, जिन्होंने 61 साल पहले देश की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, उनकी पत्नी चंद्रा देवी को आखिरकार उनका हक मिल गया है। सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर काठगोदाम के डीआईजी शंकर दत्त पांडे की पहल पर अब 89 वर्षीय चंद्रा देवी को 34 हजार रुपये मासिक पेंशन मिलने लगी है, जबकि पहले उन्हें केवल 9 हजार रुपये ही मिलते थे। साथ ही, उन्हें बकाया राशि के रूप में 31 लाख रुपये भी प्रदान किए गए हैं।

पति का बलिदान और जीवनभर का संघर्ष
साल 1963 में, नार्थ ईस्ट फ्रंटियर रीजन (अब अरुणाचल प्रदेश) के चियांग क्षेत्र में भूमिगत आदिवासी विद्रोहियों के साथ मुठभेड़ के दौरान, सीआरपीएफ की 9वीं बटालियन के सिपाही दान सिंह सहित नौ जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे। उस समय उनकी पत्नी चंद्रा देवी मात्र 27 वर्ष की थीं और गोद में एक साल की बेटी थी। पति के न लौटने का दर्द और बेटी के भविष्य की चिंता के बीच पहाड़ जैसे हालातों में जीवन गुजारना आसान नहीं था।

शादी के कुछ ही वर्षों बाद मिली यह बड़ी चोट चंद्रा देवी के जीवन की दिशा बदल गई। सरकारी व्यवस्था की खामी के कारण उन्हें उचित पारिवारिक पेंशन का अधिकार भी नहीं मिल पाया। शुरुआत में मात्र 26 रुपये 35 पैसे मासिक पेंशन और 632 रुपये एकमुश्त ग्रेच्युटी पर ही उनका जीवन बीतता रहा। वर्षों तक यह पेंशन धीरे-धीरे बढ़कर 9 हजार रुपये तक पहुंची, लेकिन यह भी सम्मानजनक जीवन के लिए पर्याप्त नहीं थी।

डीआईजी की पहल से बदली किस्मत
केंद्र सरकार ने हाल के वर्षों में बलिदानी जवानों की पुण्यतिथि पर उनके परिजनों की समस्याएं सुनने और समाधान करने की व्यवस्था शुरू की है। इसी क्रम में 31 मई 2024 को डीआईजी शंकर दत्त पांडे, शहीद दान सिंह को श्रद्धांजलि देने उनके गांव बेरीगांव, पिथौरागढ़ पहुंचे। बातचीत के दौरान चंद्रा देवी ने अपनी पेंशन संबंधी समस्या बताई। लौटकर डीआईजी ने उनके दस्तावेज निकाले और लगातार पत्राचार किया। कुछ ही महीनों में चंद्रा देवी के नाम पारिवारिक पेंशन स्वीकृत हो गई और राशि उनके खाते में आ गई।

फोटो तक नहीं थी उपलब्ध
दिलचस्प बात यह रही कि मई 2024 में जब डीआईजी शहीद के घर पहुंचे और उन्होंने दान सिंह की पुरानी फोटो मांगी, तो परिवार के पास कोई भी तस्वीर नहीं थी। आज, चंद्रा देवी की एकमात्र संतान लीला देवी 62 वर्ष की हैं, जिनके पति भी सेना से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

हालांकि, चंद्रा देवी को इस बात का मलाल जरूर है कि अगर यह पेंशन शुरुआती संघर्ष के दिनों में मिल जाती, तो जीवन कुछ आसान हो सकता था। फिर भी, दशकों के इंतजार के बाद उनका हक मिलना, न सिर्फ उनके लिए बल्कि हर शहीद परिवार के लिए न्याय की मिसाल है।

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