उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में मंगलवार को खीर गंगा नदी में आई भीषण बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई। बाढ़ की वजह से करीब 20 से 25 होटल और होमस्टे पूरी तरह से तबाह हो गए। इस दुखद आपदा में जन-धन की भारी क्षति हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, अब भी 10 से 12 मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि खीर गंगा के जलग्रहण क्षेत्र में ऊपर कहीं बादल फटने के बाद यह विनाशकारी बाढ़ आई, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है।
इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गहरा शोक व्यक्त किया है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा,
“उत्तरकाशी के धराली में हुई इस त्रासदी से प्रभावित लोगों के प्रति मैं अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं। सभी पीड़ितों की कुशलता की कामना करता हूं। मैंने मुख्यमंत्री पुष्कर धामी जी से बात कर स्थिति की जानकारी ली है। राहत और बचाव कार्य पूरी गंभीरता से चल रहा है और किसी भी जरूरत को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बात कर आपदा की स्थिति की विस्तृत जानकारी ली और हरसंभव केंद्रीय सहायता का भरोसा दिलाया। गृह मंत्री ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और अन्य एजेंसियों को राहत कार्य में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस गंभीर स्थिति को देखते हुए अपना पूर्व निर्धारित दौरा रद्द कर देहरादून लौटने का निर्णय लिया। वे अब राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के साथ लगातार समन्वय बनाकर राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।
केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन प्रभावित क्षेत्र में पूरी सक्रियता के साथ जुटा है। प्रभावितों तक तुरंत राहत पहुंचाने और जान-माल की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। धराली और आसपास के क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
सरकार ने स्थानीय प्रशासन को भी सतर्क रहने और जरूरतमंदों तक हरसंभव मदद सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। एनडीआरएफ की टीमें घटनास्थल पर तैनात हैं और लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं ताकि मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकाला जा सके।
यह आपदा उत्तराखंड के संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं की चेतावनी भी है, जिससे निपटने के लिए दीर्घकालिक रणनीति की आवश्यकता महसूस की जा रही है।





