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घटिया दवाएं बना रहीं थीं कंपनियां, उत्तराखंड सरकार ने तीन पर लगाई रोक

On: July 27, 2025 1:45 PM
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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देशों के बाद उत्तराखंड में नकली और घटिया दवाओं के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया गया। शनिवार को पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय रहीं और देहरादून से लेकर भारत-नेपाल सीमा तक औषधि निर्माण इकाइयों और मेडिकल स्टोरों पर सघन छापेमारी की गई। इस दौरान भारी अनियमितताएं सामने आईं, जिसके आधार पर तीन फार्मा कंपनियों के उत्पादन पर रोक लगाई गई है, जबकि एक कंपनी का लाइसेंस रद्द करने की संस्तुति की गई है।

तीन फार्मा कंपनियों पर कार्रवाई, एक का लाइसेंस निरस्तीकरण की संस्तुति

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सेलाकुई फार्मा क्षेत्र में की गई जांच के दौरान पाया गया कि तीन दवा निर्माता कंपनियां—करनानी फार्मास्युटिकल प्राइवेट लिमिटेड, लेक्सस इंडिया लिमिटेड और कैरोन लाइफ साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड—दवा निर्माण के दौरान गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) के मानकों का पालन नहीं कर रहीं थीं। इस पर तीनों के उत्पादन को तत्काल प्रभाव से बंद कराया गया।

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

विशेष रूप से लेक्सस इंडिया लिमिटेड में गंभीर स्तर की अनियमितताएं पाई गईं, जिसके आधार पर उसके लाइसेंस को रद्द करने की सिफारिश की गई है। अन्य दो इकाइयों से जवाब तलब किया गया है।

मेडिकल स्टोरों पर भी शिकंजा, कई दुकानों की बिक्री पर रोक

औषधि निरीक्षक मानेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में राजधानी के सेलाकुई और सहसपुर क्षेत्र में औषधि विक्रय प्रतिष्ठानों और निर्माण इकाइयों की जांच की गई। जांच टीम में विनोद जगूड़ी और निधि रतूड़ी भी शामिल रहे। इस कार्रवाई में पांच मेडिकल स्टोरों को नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया गया। इनके क्रय-विक्रय पर रोक लगाई गई है और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

इन प्रतिष्ठानों से सात प्रकार की औषधियों और कच्चे माल के नमूने गुणवत्ता जांच के लिए लिए गए हैं।

गंभीर खामियां उजागर, कई जगह जब्ती और नष्ट करने की कार्रवाई

जांच के दौरान कई जगह फार्मेसिस्ट की अनुपस्थिति, रेफ्रिजरेशन की खराब व्यवस्था, गंदगी, अव्यवस्थित अभिलेख, और एक्सपायरी दवाओं का गलत ढंग से भंडारण जैसी गंभीर लापरवाहियां पाई गईं। कुछ स्थानों पर दवाओं को जब्त कर वहीं पर नष्ट भी किया गया।

सीमा क्षेत्रों तक फैला अभियान, पिथौरागढ़ से झूलाघाट तक जांच

यह छापेमारी सिर्फ देहरादून तक सीमित नहीं रही। भारत-नेपाल सीमा से सटे पिथौरागढ़, धारचूला और झूलाघाट में भी एसएसबी, सीआरपीएफ और स्थानीय पुलिस के सहयोग से औचक निरीक्षण किए गए। इन क्षेत्रों में 13 औषधि प्रतिष्ठानों की जांच की गई और 5 नमूने लिए गए।

विकासनगर और हरबर्टपुर में भी कार्रवाई

सहायक औषधि नियंत्रक हेमंत सिंह नेगी के नेतृत्व में विकासनगर और हरबर्टपुर क्षेत्र में सात मेडिकल स्टोरों और एक निर्माण इकाई की जांच की गई। यहां भी दो दुकानों पर बिक्री पर रोक लगाई गई और उनके लाइसेंस निलंबन की सिफारिश की गई है।

जनस्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं: स्वास्थ्य सचिव

स्वास्थ्य सचिव डा. आर. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि यह अभियान जारी रहेगा। उन्होंने कहा, “जनस्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, वहां त्वरित और सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

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