देहरादून। उत्तराखंड सरकार राज्य के सैनिकों, शहीदों और उनके परिजनों के सम्मान और कल्याण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में बीते चार वर्षों में कई दूरदर्शी निर्णय लिए गए हैं, जो सैनिक समुदाय को सामाजिक, आर्थिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।
जल्द तैयार होगा शौर्य स्थल: वीरता की प्रतीक स्थली
प्रदेश में निर्माणाधीन भव्य शौर्य स्थल (सैन्य धाम) अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। यह स्थल अमर शहीदों की स्मृति में बनाया जा रहा है, जहां राज्य की 28 नदियों का जल और बलिदानी सैनिकों के घरों से लाई गई मिट्टी का प्रयोग किया गया है, जो इसे एक पवित्र और भावनात्मक महत्व का प्रतीक बनाता है।
अग्निवीरों को 10% क्षैतिज आरक्षण का प्रस्ताव
सरकार ने अग्निवीर योजना से लौटने वाले युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में भी पहल की है। पुलिस, परिवहन, वन जैसे विभागों में उन्हें 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट में पेश किया जाएगा।
बलिदानी परिवारों को अब 50 लाख की सहायता
प्रदेश सरकार ने शहीद सैनिकों के परिजनों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया है। इसके साथ ही, परमवीर चक्र विजेताओं को मिलने वाली राशि भी 50 लाख से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दी गई है।
ड्रोन दीदी योजना से महिला सशक्तिकरण
पूर्व सैनिकों की वीरांगनाओं और बेटियों को ‘ड्रोन दीदी’ योजना के तहत तकनीकी प्रशिक्षण देकर रोजगार के नए अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। यह पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी सशक्त करती है।
सरकारी नौकरी में दी जा रही प्राथमिकता
बलिदानी सैनिकों के परिजनों को सरकारी नौकरी में प्राथमिकता देने की व्यवस्था लागू है। अब तक 37 आश्रितों को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। साथ ही, नौकरी के लिए आवेदन की समयसीमा को 2 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दिया गया है।
पूर्व सैनिकों को मिल रही विशेष सुविधाएं
पूर्व सैनिकों और वीरता पुरस्कार प्राप्त जवानों को उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा मिल रही है। इसके अतिरिक्त, 25 लाख रुपये तक की अचल संपत्ति खरीदने पर स्टांप ड्यूटी में 25% की छूट भी दी जा रही है, जिससे उनका आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित हो सके।
निष्कर्ष
उत्तराखंड सरकार द्वारा किए जा रहे ये सभी निर्णय न केवल सैनिक समुदाय के सम्मान को बढ़ावा देते हैं, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा में आत्मनिर्भर और सशक्त नागरिक के रूप में स्थापित करने का प्रयास भी हैं। शौर्य, सेवा और सम्मान की इस परंपरा को आगे बढ़ाने में राज्य का यह योगदान सराहनीय है।
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