हल्द्वानी: उत्तराखंड में पर्यावरणीय पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चोरगलिया के पास नंधौर सेंचुरी से सटे क्षेत्र में राज्य का पहला ईको विलेज विकसित किया जाएगा। इस परियोजना को मूर्त रूप देने के लिए वन विभाग ने शासन को 5 करोड़ रुपये का बजट प्रस्ताव भेजा है। यह ईको विलेज एक हेक्टेयर क्षेत्र में बनाया जाएगा, जहां पर्यटकों को गांव जैसा वातावरण और आधुनिक सुविधाएं एक साथ मिलेंगी।
पर्यटकों के लिए ईको हट्स और कॉटेज, ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा
इस ईको विलेज में आने वाले पर्यटकों को रहने के लिए लकड़ी से बने ईको हट्स और कॉटेज उपलब्ध होंगे। इनमें कैफेटेरिया, किचन, पेयजल, शौचालय और कूड़ा प्रबंधन जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं मौजूद होंगी। खास बात यह है कि यहां कंक्रीट की बजाय अधिकतर निर्माण कार्य प्राकृतिक सामग्री, विशेषकर लकड़ी से किया जाएगा।
रात्रि विश्राम के लिए यह स्थान नंधौर सेंचुरी घूमने आए पर्यटकों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनेगा। इच्छुक पर्यटक इसकी बुकिंग www.nandhaurwildlife.uk.gov.in वेबसाइट पर जाकर कर सकेंगे।
स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार, महिलाएं बेचेंगी उत्पाद
ईको विलेज के संचालन और पर्यटकों की गाइडिंग का जिम्मा स्थानीय युवाओं को सौंपा जाएगा। नेचर ट्रेल और गांव भ्रमण के दौरान पर्यटक पहाड़ी संस्कृति और ग्रामीण जीवन को करीब से समझ सकेंगे।
इसके अलावा आस-पास के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अपने हस्तनिर्मित उत्पादों की बिक्री भी यहां कर सकेंगी, जिससे उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता का अवसर मिलेगा।
नंधौर के जंगलों के करीब, प्रकृति और संस्कृति से होगा साक्षात्कार
यह ईको विलेज हल्द्वानी वन प्रभाग के तहत आने वाले लाखनमंडी गांव के पास ‘आम बगीचा’ नामक स्थान पर बनाया जाएगा, जो रिजर्व फॉरेस्ट की श्रेणी से बाहर है। वन विभाग इस स्थान को पर्यावरण पर्यटन की दृष्टि से विकसित करना चाहता है।
डीएफओ कुंदन कुमार ने बताया कि इस प्रोजेक्ट से न केवल क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए स्वरोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे।
जल्द शुरू होगा निर्माण कार्य
विकास कार्यों के लिए पेयजल निर्माण निगम ने डिजाइन और डीपीआर तैयार कर ली है। बजट की स्वीकृति के बाद निर्माण कार्य हेतु टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। परियोजना पूरी होने के बाद नंधौर ईको विलेज उत्तराखंड में पर्यावरण-संवेदनशील पर्यटन का एक आदर्श मॉडल बनेगा।
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