देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत उपनल कर्मियों को बड़ी राहत दी है। अब इन कर्मचारियों को उनकी सेवाओं से नहीं हटाया जाएगा। कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर सहमति बनी और तय किया गया कि उपनल कर्मियों के नियमितीकरण के लिए एक स्पष्ट नियमावली तैयार की जाएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद इस दिशा में पहल कर चुके हैं और इसकी घोषणा भी कर चुके हैं।
उपनल कर्मचारियों को स्थायी करने की प्रक्रिया को कानूनी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए सात सदस्यीय समिति गठित की गई है। इस समिति की अध्यक्षता प्रमुख सचिव आरके सुधांशु करेंगे। समिति में प्रमुख सचिव न्याय प्रशांत जोशी, सचिव कार्मिक शैलेश बगौली, सचिव वित्त दिलीप जावलकर, सचिव सैनिक कल्याण दीपेंद्र कुमार चौधरी, सचिव श्रीधर बाबू अद्दांकी और उपनल के प्रबंध निदेशक सदस्य के रूप में शामिल हैं। यह समिति सभी कानूनी पहलुओं का अध्ययन कर नियमावली का प्रारूप तैयार करेगी, जिसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट के विभिन्न फैसलों के मद्देनज़र सरकार पर उपनल कर्मियों के भविष्य को लेकर ठोस कदम उठाने का दबाव था। हालांकि, इन कर्मियों को नियमित करना चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि अधिकतर की तैनाती सीधे नियमित पदों पर की गई है। ऐसे में भर्ती प्रक्रियाओं और आरक्षण व्यवस्था में आवश्यक संशोधन करना होगा। कई पदों पर चयन लोक सेवा आयोग के माध्यम से होता है, जिससे नियमों में बदलाव की आवश्यकता भी महसूस की जा रही है।
कैबिनेट में यह भी स्पष्ट किया गया कि जब सरकार खुद उपनल कर्मियों को स्थायी करने की दिशा में कार्य कर रही है, तो फिलहाल किसी भी कर्मी को हटाया नहीं जाएगा। इस फैसले से हजारों उपनल कर्मियों को राहत मिली है और उनके भविष्य को लेकर एक सकारात्मक दिशा मिलती दिख रही है।





